2026 की शुरुआत में ही झटका, Reliance के ₹1.35 लाख करोड़ डूबे, रिटेल की सुस्ती और रूस तेल विवाद ने बढ़ाई बेचैनी

कमजोर रिटेल मांग के संकेत और रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की सख्त बयानबाजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. इसका सीधा असर कंपनी के शेयरों और मार्केट वैल्यू पर दिख रहा है. अब निवेशकों और बाजार की नजर कंपनी के आने वाले तिमाही नतीजों पर टिकी है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज Image Credit: money9live.com

साल की शुरुआत शेयर बाजार में अक्सर नई उम्मीदों के साथ होती है. निवेशक नई रणनीति बनाते हैं और बड़ी कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखते हैं. लेकिन साल 2026 की शुरुआत रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए काफी कठिन साबित हो रही है. देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल रिलायंस के शेयर साल के शुरुआती दिनों में ही तेज दबाव में आ गए हैं.

कमजोर रिटेल मांग के संकेत और रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की सख्त बयानबाजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. इसका सीधा असर कंपनी के शेयरों और मार्केट वैल्यू पर दिख रहा है. अब निवेशकों और बाजार की नजर कंपनी के आने वाले तिमाही नतीजों पर टिकी है. इन्हीं नतीजों से तय होगा कि यह गिरावट थमेगी या आगे और परेशानी बढ़ेगी.

2026 की खराब शुरुआत

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के लिए साल 2026 की शुरुआत झटके के साथ हुई है. कंपनी के शेयर साल की शुरुआत से अब तक 6 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुके हैं. इस गिरावट के कारण रिलायंस की बाजार पूंजी से करीब 15 अरब डॉलर की रकम साफ हो गई है. हाल के वर्षों में यह रिलायंस के लिए किसी भी साल की सबसे कमजोर शुरुआतों में से एक मानी जा रही है. इस गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा है.

रिटेल कारोबार से बढ़ी चिंता

इस हफ्ते रिलायंस के शेयरों पर दबाव और तेज हो गया. देश की कई बड़ी रिटेल कंपनियों ने संकेत दिए कि उपभोक्ताओं की मांग उम्मीद से कमजोर रही है. इससे यह डर बढ़ गया कि रिलायंस का रिटेल कारोबार भी सुस्ती की चपेट में आ सकता है. रिलायंस रिटेल इस सेक्टर का बड़ा खिलाड़ी है. ऐसे में रिटेल से जुड़ी कमजोर खबरों ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है.

रूस के तेल पर अमेरिका की सख्ती

शेयरों में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका की सख्त बयानबाजी भी रही है. अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने उन देशों के खिलाफ कानून लाने का प्रस्ताव रखा है जो रूस से तेल खरीदते हैं. रिलायंस हाल के समय में सस्ते रूसी कच्चे तेल से फायदा उठा रही थी. इस प्रस्ताव के बाद निवेशकों को डर है कि अगर अमेरिका ने कड़े कदम उठाए तो कंपनी के रिफाइनिंग कारोबार पर असर पड़ सकता है. इसी कारण शेयरों में साप्ताहिक गिरावट 7 प्रतिशत से ज्यादा दर्ज की गई है.

पिछली तेजी के बाद बदला माहौल

यह कमजोरी ऐसे समय आई है जब पिछले साल रिलायंस के शेयरों में करीब 30 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली थी. उस समय उम्मीद थी कि कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स को शेयर बाजार में लिस्ट कर सकती है. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता था. लेकिन अब रूस को लेकर बढ़ते दबाव और रिटेल कारोबार की सुस्ती ने निवेशकों का उत्साह ठंडा कर दिया है.

निवेशकों की नजर आगे पर

हालिया गिरावट के बावजूद ज्यादातर विश्लेषक अब भी रिलायंस के शेयर को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं. कई ब्रोकरेज हाउस इसे खरीदने की सलाह दे रहे हैं. उनका मानना है कि अगले 12 महीनों में शेयर में करीब 16 प्रतिशत तक की तेजी की संभावना बनी हुई है. अब बाजार की नजर 16 जनवरी को आने वाले तिमाही नतीजों पर टिकी है. यही नतीजे तय करेंगे कि 2026 की यह खराब शुरुआत सिर्फ अस्थायी झटका थी या आगे और चुनौतियां आने वाली हैं.

डेटा सोर्स: Groww

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