पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ी मुश्किलें, बासमती एक्सपोर्ट पर मंडराया खतरा, KRBL के शेयर में आई गिरावट

पश्चिम एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर भारत के बासमती चावल एक्सपोर्ट कारोबार पर दिखाई देने लगा है. इस अनिश्चितता के बीच प्रमुख बासमती एक्सपोर्टर कंपनी KRBL के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई. वेस्ट एशिया कंपनी की कुल आय का करीब 30 फीसदी हिस्सा देता है, इसलिए इस क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स बाधाओं और शिपमेंट में देरी की आशंका से निवेशकों की चिंता बढ़ी है.

शेयर मार्केट Image Credit: tv9 bharatvarsh

KRBL share price: पश्चिम एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर अब भारत के बासमती चावल एक्सपोर्ट कारोबार पर भी दिखने लगा है. इस क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स बाधाओं और शिपमेंट में देरी के कारण निर्यातक कंपनियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. भारत की प्रमुख बासमती एक्सपोर्टर कंपनी KRBL पर भी इसका असर देखने को मिला है. खबरों के बीच कंपनी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई.

शेयर में क्यों आई गिरावट

करीब 7295 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली KRBL के शेयरों में बुधवार को गिरावट देखने को मिली. कंपनी का स्टॉक 3.03 फीसदी गिरकर 320.50 रुपये पर पहुंच गया है. बाजार की चिंता का मुख्य कारण वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और वहां से जुड़े व्यापार मार्गों में आई अनिश्चितता है, जिससे निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है.

वेस्ट एशिया पर बड़ी निर्भरता

KRBL की कुल आय का लगभग 30 फीसदी हिस्सा वेस्ट एशिया के बाजारों से आता है. यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा कंपनी के कारोबार पर सीधा असर डाल सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने वेस्ट एशिया के लिए अपने कुछ एक्सपोर्ट प्रोडक्शन को अस्थायी रूप से रोक दिया है. यह क्षेत्र भारत के कुल बासमती चावल निर्यात का लगभग 60 फीसदी हिस्सा भी है, इसलिए यहां आई रुकावट पूरे सेक्टर के लिए चिंता का कारण बन सकती है.

बासमती की कीमतों में नरमी

वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के कारण भारतीय बासमती चावल की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है. पिछले एक सप्ताह में बासमती की कीमत करीब 50 डॉलर प्रति टन तक कम हो गई है. अगर कीमतों में यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है, तो निर्यातकों की कमाई और मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, खासतौर पर तब जब यह स्थिति पीक एक्सपोर्ट सीजन के दौरान सामने आई हो.

ईरान बाजार की अहम भूमिका

ईरान भारतीय बासमती चावल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल है. वित्त वर्ष 2025 में ईरान ने करीब 10 लाख टन भारतीय बासमती चावल आयात किया था, जिसकी कीमत लगभग 698 मिलियन डॉलर से 1.2 बिलियन डॉलर के बीच रही. हालांकि मौजूदा हालात में ईरान के बंदरगाहों पर शिपमेंट में देरी और भुगतान से जुड़ी अनिश्चितताएं बढ़ गई हैं, जिससे एक्सपोर्ट साइकिल और वर्किंग कैपिटल पर असर पड़ सकता है.

वित्तीय स्थिति क्या कहती है

वित्तीय आंकड़ों के अनुसार Q3 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 1477 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 1682 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 12.2 फीसदी कम है. वहीं तिमाही आधार पर भी इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई.

हालांकि ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा. EBITDA बढ़कर 229 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर करीब 17.4 फीसदी ज्यादा है. वहीं कंपनी का नेट प्रॉफिट 170 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले लगभग 27.8 फीसदी अधिक है.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.