19 महीनों में ₹15 का शेयर हुआ 10 हजार के पार, रचा गया अमीर बनने का खेल! सेबी ने लगाई 39 लोगों और कंपनियों के ट्रेडिंग पर रोक
सेबी ने RRP Semiconductor Limited के शेयर में असामान्य तेजी पर 39 लोगों और कंपनियों पर कार्रवाई की. कंपनी का शेयर 19 महीनों में 15 रुपये से बढ़कर 10,887 रुपये पहुंचा, जिसमें मिलीभगत और हेरफेर के संकेत मिले. सेबी ने आरोपियों को बाजार से बैन किया, शेयर फ्रीज किए और करीब 2 करोड़ रुपये के कथित अवैध मुनाफे को जब्त किया है.

Sebi action on RRP Semiconductor Limited: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शेयर बाजार में कथित गड़बड़ी के एक बड़े मामले में 39 लोगों और कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की है. यह मामला RRP Semiconductor Limited के शेयर में आई असामान्य तेजी से जुड़ा है. सेबी की शुरुआती जांच में सामने आया कि इस कंपनी का शेयर 19 महीनों में 700 गुना से ज्यादा उछल गया. यानी अप्रैल 2024 में जो शेयर सिर्फ 15 रुपये का था, वो अक्टूबर 2025 तक बढ़कर 10,887 रुपये से ज्यादा हो गया.
सेबी ने कार्रवाई करते हुए सभी 39 लोगों और कंपनियों को फिलहाल शेयर बाजार में खरीद-बिक्री करने से रोक दिया है. साथ ही उनके डीमैट खातों में मौजूद शेयर फ्रीज कर दिए गए हैं.इसके अलावा, करीब 2 करोड़ रुपये के कथित अवैध मुनाफे को भी जब्त किया गया है. इसमें अलग-अलग कंपनियों से लाखों और करोड़ों रुपये वसूले गए हैं. सेबी ने सभी आरोपियों को 21 दिनों के अंदर अपना पक्ष रखने का मौका दिया है. इसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
ऐसे खुला मामला
महज चंद महीनो में किसी शेयर में आई इतनी तेजी आमतौर पर सामान्य नहीं मानी जाती, इसलिए सेबी की निगाहें इस पर तिरछी हो गई. मामले की जांच शुरू की गई. इस दौरान पता चला कि कंपनी पहले G D Trading and Agencies Ltd. के नाम से काम करती थी. बाद में कंपनी ने अपना नाम बदलकर खुद को सेमीकंडक्टर सेक्टर की कंपनी के रूप में पेश किया. इसके बाद कंपनी ने करीब 1.35 करोड़ शेयर सिर्फ 12 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से कुछ चुनिंदा लोगों को दिए. इस पूरी प्रक्रिया के बाद कंपनी के प्रमोटर्स की हिस्सेदारी बहुत कम होकर करीब 1.28% रह गई, जबकि आम निवेशकों (पब्लिक) की हिस्सेदारी बढ़कर 98% से ज्यादा हो गई.
शेयर को ऊंचे दाम पर कराया ट्रेड
सेबी के मुताबिक, राजेंद्र कमलकांत चोडणकर इस मामले में सबसे अहम व्यक्ति बनकर सामने आए. उन्हें अकेले ही 1.01 करोड़ शेयर मिले, जो कुल शेयरों का करीब 74.5% है. हैरानी की बात यह है कि उन्हें पब्लिक शेयरहोल्डर दिखाया गया. जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड और पैसों के लेनदेन के जरिए यह संकेत मिले कि चोडणकर और कई अन्य लोगों के बीच आपसी संबंध थे. इससे यह शक मजबूत हुआ कि कई लोग मिलकर योजना के तहत काम कर रहे थे.
सेबी ने यह भी पाया कि कुछ संस्थाओं ने शेयर की कीमत (LTP) को प्रभावित किया, यानी जानबूझकर शेयर को ऊंचे दाम पर ट्रेड कराया गया ताकि कीमत तेजी से बढ़े. इसे बाजार में हेरफेर माना जाता है. इसी के तहत एक्शन लिया गया है.