गिरते रुपये के बीच इन 3 स्टॉक्स पर रखें नजर, कई देशों में कंपनियों का कारोबार; बन सकता है कमाई का मौका
कमाए गए हर डॉलर के बदले, साल की शुरुआत के मुकाबले अब कहीं ज्यादा रुपये मिल रहे हैं. जैसे-जैसे रुपये में गिरावट जारी है, ऐसे समय में कुछ स्टॉक्स पर नजर रखना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. तीन स्टॉक्स का नाम जान लीजिए.

भारतीय रुपये के लिए 2026 का साल काफी मुश्किल भरा रहा है. इस साल यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गई है. साल की शुरुआत से अब तक इसमें 6 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है और यह दबाव फिलहाल कम होता हुआ नजर नहीं आ रहा है. शुक्रवार को रुपया 96 रुपये के स्तर से नीचे गिर गया. आयात की बढ़ती लागत से भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ रहा है, जिससे देश के बाहरी खाते (External Account) पर दबाव की एक और परत जुड़ गई है. रुपये के कमजोर होने का फायदा भारतीय निर्यातक उठा रहे हैं. उन्हें कमाए गए हर डॉलर के बदले, साल की शुरुआत के मुकाबले अब कहीं ज्यादा रुपये मिल रहे हैं. जैसे-जैसे रुपये में गिरावट जारी है, ऐसे समय में कुछ स्टॉक्स पर नजर रखना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. इक्विटीमास्टर ने तीन स्टॉक्स के नाम सुझाए हैं.
ऑरोबिंदो फार्मा
ऑरोबिंदो फार्मा हैदराबाद में स्थित एक इंटीग्रेटेड ग्लोबल फार्मास्युटिकल कंपनी है, जो APIs, जेनेरिक्स, स्पेशलिटी प्रोडक्ट्स, इंजेक्टेबल्स, बायोसिमिलर्स, वैक्सीन्स, पेप्टाइड्स और मीटर्ड डोज इनहेलर्स के डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और कमर्शियलाइजेशन के काम में लगी हुई है.
यह कंपनी 150 से अधिक देशों में काम करती है, जिससे यह ग्लोबल फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में भारत के मुख्य योगदानकर्ताओं में से एक बन गई है. FY25 में, रेवेन्यू के मामले में यह तीसरी सबसे बड़ी भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनी बनकर उभरी. US में, प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर यह सबसे बड़ी जेनेरिक फार्मा कंपनी के तौर पर अपनी जगह बनाए हुए है.
यूरोप में, यह कंपनी एक अहम प्लेयर है और फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, जर्मनी, UK, नीदरलैंड्स, बेल्जियम और पोलैंड समेत 10 देशों में इसका कामकाज फैला हुआ है. कंपनी की मौजूदगी यूरोप के 75% जेनेरिक मार्केट तक है और इसके पास मार्केट में मौजूद प्रोडक्ट्स का एक बड़ा पोर्टफोलियो है. FY26 की तीसरी तिमाही (Q3) की कमाई से जुड़ी अपनी प्रेजेंटेशन के मुताबिक, कंपनी अपने रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा इंटरनेशनल मार्केट से हासिल करती है.
इस तिमाही के दौरान US, यूरोप और ग्रोथ मार्केट्स ने मिलकर ऑपरेशन्स से होने वाली कुल कमाई में लगभग 84.5% का योगदान दिया. इन क्षेत्रों से कंपनी की कुल कमाई 86.5 अरब रुपये में से लगभग 73.1 अरब रुपये आए, जो US और यूरोपीय बाजारों में कंपनी की मजबूत वैश्विक कारोबारी पकड़ को दिखाता है.
एक्सपोर्ट पर निर्भर
रुपये की कीमत में गिरावट के बीच, Aurobindo Pharma एक ऐसा स्टॉक बन जाता है जिस पर नजर रखी जानी चाहिए, क्योंकि कमजोर रुपया आम तौर पर एक्सपोर्ट पर निर्भर कंपनियों को फायदा पहुंचाता है, जिससे उन्हें विदेशी कमाई से ज्यादा रिटर्न मिलता है. आर्थिक मोर्चे पर, पिछले तीन सालों में कंपनी की कमाई में 10.6% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इसी दौरान नेट प्रॉफिट 9.6% की CAGR से बढ़ा है. कंपनी का तीन साल का औसत ROE और ROCE क्रमशः 9.5% और 13.6% रहा है.
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़, टाटा ग्रुप की एक प्रमुख कंपनी है. यह एक IT सर्विसेज, कंसल्टिंग और बिज़नेस सॉल्यूशंस देने वाली संस्था है, जो पिछले 50 से अधिक साल से दुनिया की कई सबसे बड़ी कंपनियों के साथ उनके बदलाव के सफर में पार्टनर के तौर पर काम कर रही है. यह कंपनी बिजनेस, टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग सर्विसेज को मिलाकर एक ऐसा इंटीग्रेटेड पोर्टफोलियो पेश करती है, जो कंसल्टिंग पर आधारित और कॉग्निटिव टेक्नोलॉजी से लैस है.
कंपनी अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा इंटरनेशनल मार्केट से हासिल करती है. TCS के फ़ाइनेंशियल नतीजों (चौथी तिमाही और मार्च 2026 को खत्म हुआ साल) के मुताबिक, FY26 में नॉर्थ अमेरिका से कंपनी की कुल कमाई में 48.6% और यूरोप से लगभग 32.8% का योगदान रहा.
एशिया पैसिफिक, लैटिन अमेरिका और MEA जैसे दूसरे विदेशी क्षेत्रों को भी इसमें शामिल कर लें, तो इंटरनेशनल मार्केट से कंपनी की कुल कमाई का 94.1% हिस्सा आया. यह इस बात को दिखाता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल एक्सपोर्ट पर कितना ज्यादा निर्भर है.
रेवेन्यू और वित्तीय आंकड़े
FY26 में, कंपनी ने US$ 40.7 बिलियन का टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) ऑर्डर बुक दर्ज किया, जिसमें उत्तरी अमेरिका का योगदान US$ 19 बिलियन रहा. यह कुल TCV का लगभग 46.7% है, जो कंपनी की डील पाइपलाइन में उत्तरी अमेरिका की सबसे बड़ी भौगोलिक क्षेत्र के रूप में स्थिति की पुष्टि करता है. रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के साथ, TCS एक ऐसा स्टॉक बना हुआ है जिस पर नजर रखी जानी चाहिए, क्योंकि कमजोर रुपया आमतौर पर रेवेन्यू के आंकड़ों को बढ़ाता है और मार्जिन का विस्तार करता है.
वित्तीय मोर्चे पर, पिछले तीन वर्षों में कंपनी के रेवेन्यू में 5.8% की वृद्धि देखी गई है, जबकि नेट प्रॉफिट 5.3% के CAGR से बढ़ा है. कंपनी का तीन साल का औसत ROE और ROCE क्रमशः 49.5% और 67.1% रहा है.
Apex Frozen Foods
भारत में प्रोसेस्ड झींगा के सबसे बड़े एक्सपोर्टर्स में से एक, यह कंपनी कई तरह के कस्टमर्स को अपनी सेवाएं देती है, जिनमें फ़ूड कंपनियां, रिटेल चेन, रेस्टोरेंट, क्लब स्टोर और डिस्ट्रीब्यूटर्स शामिल हैं. इसके प्रोडक्ट्स कई जगहों पर एक्सपोर्ट किए जाते हैं, जैसे कि US, यूरोपियन यूनियन, चीन और दूसरे इंटरनेशनल मार्केट.
यह कंपनी अपनी पूरी वैल्यू चेन में भी अच्छी तरह से जुड़ी हुई है, जिसमें झींगा के बीज की हैचरी, झींगा पालन, प्री-प्रोसेसिंग, प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं.
Q3 इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन के अनुसार, इसकी सेल्स का ज्यादातर हिस्सा एक्सपोर्ट पर ही निर्भर है. FY26 के पहले 9 महीनों में US से 49% रेवेन्यू आया, उसके बाद यूरोपियन यूनियन से 46%, जबकि बाकी 5% रेवेन्यू दूसरे इलाकों से आया.
विदेशी मार्केट पर निर्भरता
विदेशी मार्केट पर इतनी ज्यादा निर्भरता की वजह से रुपये की कीमत गिरने के समय Apex Frozen Foods पर खास नजर रखना जरूरी हो जाता है. क्योंकि कमजोर रुपया एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई को बढ़ाने में मदद कर सकता है और सीफूड एक्सपोर्टर्स के लिए ऑपरेटिंग मार्जिन को बेहतर बना सकता है.
आर्थिक मोर्चे पर पिछले तीन साल में कंपनी के रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट में लगातार गिरावट देखने को मिली है. कंपनी का तीन साल का औसत ROE और ROCE क्रमशः 3.7% और 7.3% रहा है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.