AIF निवेशकों के लिए नया नियम, फंड बंद होने के बाद भी रकम रोक सकेंगे मैनेजर; SEBI ने जारी किया गाइडलाइन

SEBI ने Alternative Investment Funds यानी AIF के लिए नए नियम जारी किए हैं. अब विशेष परिस्थितियों में AIF अपनी निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी निवेशकों की राशि अपने पास रख सकेंगे. यह सुविधा कानूनी मामलों, संभावित देनदारियों और फंड बंद करने से जुडे खर्चों के लिए दी गई है.

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SEBI ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड यानी AIF के लिए नए गाइडलाइन जारी किए हैं. इसके तहत अब कुछ विशेष परिस्थितियों में AIF अपने निवेशकों के पैसे फंड की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी अपने पास रख सकेंगे. SEBI का कहना है कि यह कदम फंडों को कानूनी, टैक्स और रेगुलेटर मामलों के निपटारे के लिए अधिक लचीलापन देगा. इसके साथ ही सेबी ने Inoperative Fund नाम का नया स्ट्रक्चर भी शुरू किया है. यह व्यवस्था उन फंडों के लिए होगी जिनके निवेश बिक चुके हैं लेकिन कुछ देनदारियां या कानूनी मामले अभी बाकी हैं.

किन परिस्थितियों में पैसा रख सकेंगे AIF

SEBI के अनुसार यदि किसी AIF को किसी अदालत, टैक्स डिपार्टमेंट , जांच एजेंसी, निवेशक या अन्य पक्ष से कानूनी नोटिस मिला है तो वह संभावित देनदारियों के लिए पैसा रोक सकता है. इसके अलावा यदि फंड को भविष्य में किसी दायित्व का सामना करना पड़ सकता है और कम से कम 75 फीसदी निवेशक इसकी मंजूरी दे देते हैं तो भी राशि अपने पास रखी जा सकती है.

निवेशकों की मंजूरी होगी जरूरी

यदि फंड किसी संभावित देनदारी के लिए पैसा रोकना चाहता है तो उसे निवेशकों को पूरी जानकारी देनी होगी. फंड मैनेजर को बताना होगा कि कितनी अमाउंट रोकी जाएगी और उसे कितने समय तक रखा जाएगा. निवेशकों की वैल्यू के आधार पर कम से कम 75 फीसदी सहमति मिलने के बाद ही ऐसा किया जा सकेगा.

तीन साल तक रखा जा सकेगा पैसा

यदि पैसा केवल फंड बंद करने से जुड़ो प्रशासनिक और ऑपरेशनल खर्चों के लिए रखा जाता है तो इसकी अवधि सीमित होगी. SEBI ने कहा है कि ऐसी स्थिति में फंड अपनी निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद अधिकतम तीन साल तक ही राशि अपने पास रख सकेगा. इसके बाद शेष राशि निवेशकों को लौटानी होगी.

क्या है Inoperative Fund सिस्टम

SEBI ने Inoperative Fund नाम का नया स्ट्रक्चर भी पेश किया है. यह उन AIF के लिए होगा जिन्होंने अपने सभी निवेश बेच दिए हैं लेकिन कुछ राशि अभी भी अपने पास रखी हुई है या कोई कानूनी मामला लंबित है. ऐसे फंड अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने से पहले Inoperative Fund का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं.

Inoperative Fund पर क्या होंगी पाबंदियां

Inoperative Fund बनने के बाद फंड कोई नया निवेश नहीं कर सकेगा. वह कोई नई योजना भी शुरू नहीं कर पाएगा और निवेशकों से प्रबंधन शुल्क भी नहीं ले सकेगा. इसके पास मौजूद राशि केवल उन्हीं साधनों में निवेश की जा सकेगी जिनकी अनुमति AIF नियमों के तहत दी गई है.

हर साल देनी होगी रिपोर्ट

नए नियमों के तहत जिन AIF ने राशि अपने पास रोक रखी है या जो Inoperative Fund की कैटेगरी में आते हैं, उन्हें हर वित्त वर्ष के अंत के 30 दिनों के भीतर SEBI और निवेशकों को रिपोर्ट देनी होगी. इसमें रोकी गई राशि और लंबित देनदारियों की जानकारी शामिल होगी.

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तुरंत लागू हुए नए नियम

SEBI ने स्पष्ट किया है कि यह नया स्ट्रक्चर तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है. इसके अलावा यह व्यवस्था पुराने Venture Capital Funds पर भी लागू होगी, जो 1996 के पुराने नियमों के तहत रजिस्टर थे. SEBI का मानना है कि इससे फंडों को संचालन में आसानी मिलेगी और निवेशकों के हितों की भी बेहतर सुरक्षा हो सकेगी.