बदल जाएगा Share Buyback का खेल? प्रमोटर ट्रेडिंग पर सख्ती समेत SEBI के 7 बड़े प्रस्ताव, क्या होगा असर?
SEBI ने शेयर बायबैक नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है. ओपन मार्केट बायबैक की वापसी से लेकर प्रमोटर ट्रेडिंग पर रोक और मर्चेंट बैंकर नियुक्ति को वैकल्पिक बनाने तक, जानिए निवेशकों और कंपनियों पर असर डालने वाले 7 बड़े प्रस्ताव क्या हैं.

SEBI buyback rules 2026: भारतीय शेयर बाजार के रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने लिस्टेड कंपनियों के लिए बायबैक नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है. सेबी का मकसद ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी व्यापार को आसान बनाना और निवेशकों के हितों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है. सेबी ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी कर स्टॉक एक्सचेंज के जरिए ओपन मार्केट बायबैक को फिर से शुरू करने और मर्चेंट बैंकर्स की अनिवार्य नियुक्ति में ढील देने जैसे कई बड़े प्रस्ताव रखे हैं.
इन बदलावों पर आम जनता और स्टेकहोल्डर्स 29 मई, 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं. आइए जानते हैं सेबी के इन प्रस्तावित बदलावों की 7 सबसे बड़ी बातें:
- ओपन मार्केट बायबैक की वापसी
सेबी ने स्टॉक एक्सचेंज के जरिए ओपन मार्केट बायबैक को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया है. गौर करने वाली बात है कि इस रूट को 1 अप्रैल, 2025 से बंद कर दिया गया था, लेकिन बाजार की मांग को देखते हुए अब इसे नई शर्तों के साथ वापस लाया जा रहा है. - मर्चेंट बैंकर अब अनिवार्य नहीं
कंपनियों के लिए अनुपालन लागत (Compliance Cost) कम करने के लिए सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि बायबैक के लिए मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति अब वैकल्पिक (Optional) होगी. सेबी का मानना है कि मर्चेंट बैंकर के ज्यादातर काम प्रक्रियात्मक होते हैं, जिन्हें कंपनी के सेक्रेटेरियल ऑडिटर या कंप्लायंस ऑफिसर भी संभाल सकते हैं. - बायबैक की समय-सीमा पर सख्ती
प्राइमरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी (PMAC) ने बायबैक की अवधि 6 महीने रखने का सुझाव दिया था, लेकिन सेबी ने इसे 66 वर्किंग डेज तक सीमित रखने का प्रस्ताव दिया है. सेबी का तर्क है कि 6 महीने की लंबी अवधि बाजार की बदलती परिस्थितियों में बायबैक को अप्रासंगिक बना सकती है. साथ ही, कंपनियों को पहले हाफ में आवंटित राशि का कम से कम 40% हिस्सा खर्च करना होगा. - प्रमोटर्स पर लगेगी लगाम
बायबैक के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी या इनसाइडर ट्रेडिंग रोकने के लिए सेबी ने ‘प्रमोटर होल्डिंग फ्रीज’ करने का प्रस्ताव दिया है. बायबैक अवधि के दौरान प्रमोटर्स और उनके सहयोगियों की शेयर होल्डिंग ISIN लेवल पर फ्रीज कर दी जाएगी ताकि वे ट्रेडिंग न कर सकें. हालांकि, वे टेंडर ऑफर रूट के जरिए अपने शेयर कंपनी को वापस बेच सकेंगे. - शेयरधारकों को तुरंत सूचना
अब कंपनियों को सार्वजनिक घोषणा के एक कार्य दिवस (1 Working Day) के भीतर सभी शेयरधारकों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से बायबैक की जानकारी देनी होगी. इससे सूचना का प्रसार तेजी से होगा और छोटे निवेशकों को निर्णय लेने का पूरा समय मिलेगा. - पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियम
न्यूनतम सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग (MPS) के नियमों को और सख्त किया जाएगा. सेबी ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कंपनी ऐसा बायबैक नहीं ला सकेगी जिससे कंपनी में जनता की हिस्सेदारी तय सीमा से कम हो जाए. - दो बायबैक के बीच का अंतर
सेबी ने दो बायबैक के बीच के गैप को ‘कंपनी एक्ट 2013’ के प्रावधानों के साथ जोड़ने का प्रस्ताव दिया है. इससे रेगुलेटरी उलझनें कम होंगी और कंपनियों को पूंजी प्रबंधन में आसानी होगी.
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सेबी के ये प्रस्ताव बताते हैं कि रेगुलेटर अब तकनीक और पारदर्शिता के जरिए प्रक्रिया को सरल बनाना चाहता है. जहां एक ओर मर्चेंट बैंकर की अनिवार्यता हटाकर खर्च कम करने की कोशिश है, वहीं प्रमोटर्स पर सख्ती कर छोटे निवेशकों का भरोसा जीतने का प्रयास भी दिख रहा है.