सोना-चांदी पर सरकार की सख्ती, 15 फीसदी तक बढ़ गया टैरिफ, कस्टम ड्यूटी के साथ 5% एग्री सेस भी लगाया

भारत का सोना आयात FY26 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. देश का गोल्ड इंपोर्ट 2025-26 में 24 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 71.98 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि FY25 में यह 58 बिलियन डॉलर था. हालांकि मात्रा के हिसाब से देखें तो गोल्ड इंपोर्ट 4.76 फीसदी घटकर 721.03 टन रहा, जो पिछले वित्त वर्ष में 757.09 टन था. यानी कीमतें बढ़ने की वजह से आयात बिल तेजी से बढ़ा.

सोना-चांदी Image Credit: Canva

केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और दूसरे कीमती धातुओं के आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक सरकार ने गोल्ड, सिल्वर, प्लैटिनम और ज्वेलरी से जुड़े कई आयात उत्पादों पर ड्यूटी संरचना में बदलाव किया है. नई दरें 13 मई 2026 से लागू हो गई हैं. सरकार के इस फैसले के बाद सोना और चांदी का आयात महंगा हो जाएगा, जिसका असर घरेलू कीमतों और ज्वेलरी इंडस्ट्री दोनों पर देखने को मिल सकता है.

अब कितना लगेगा इंपोर्ट ड्यूटी?

नई व्यवस्था के तहत सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर 10 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 फीसदी Agriculture Infrastructure and Development Cess (AIDC) लगाया है. इसके बाद कुल प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी बढ़कर 15 फीसदी हो गई है, जो पहले करीब 6 फीसदी थी. सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करना बताया जा रहा है.

UAE से आने वाले सोने पर भी बढ़ा शुल्क

सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से तय कोटा व्यवस्था के तहत आने वाले सोने पर मिलने वाली रियायती ड्यूटी में भी बदलाव किया है. पहले इन आयातों पर कम ड्यूटी का फायदा मिलता था, लेकिन अब इन पर भी ज्यादा शुल्क देना होगा. यह अधिसूचना राजस्व विभाग ने Customs Act के तहत जारी की है, जिसमें 2018 और 2021 की पुरानी अधिसूचनाओं में संशोधन किया गया है.

ज्वेलरी इंडस्ट्री पर भी असर

नई अधिसूचना में ज्वेलरी “फाइंडिंग्स” यानी छोटे ज्वेलरी पार्ट्स पर भी ड्यूटी बढ़ाई गई है. इनमें हुक, क्लैप्स, क्लैंप, पिन और स्क्रू बैक जैसे छोटे कंपोनेंट शामिल हैं. अब गोल्ड और सिल्वर फाइंडिंग्स पर 5 फीसदी कस्टम ड्यूटी लगेगी, जबकि प्लैटिनम फाइंडिंग्स पर 5.4 फीसदी ड्यूटी देनी होगी. इसका असर ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग लागत पर पड़ सकता है.

रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री को राहत

सरकार ने कीमती धातुओं वाले स्पेंट कैटलिस्ट और ऐश के आयात पर रियायती ड्यूटी व्यवस्था में भी बदलाव किया है. अब ऐसे आयातों पर 4.35 फीसदी रियायती कस्टम ड्यूटी लगेगी, हालांकि इसके लिए तय शर्तों का पालन करना जरूरी होगा. इससे रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.

पीएम मोदी ने भी की बचत की अपील

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सादगी अपनाने की अपील की है. उन्होंने नागरिकों से सोने की खरीद टालने, विदेश यात्रा कम करने और ईंधन का सोच-समझकर इस्तेमाल करने की सलाह दी है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम किया जा सके.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा गोल्ड इंपोर्ट

भारत का सोना आयात FY26 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. देश का गोल्ड इंपोर्ट 2025-26 में 24 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 71.98 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि FY25 में यह 58 बिलियन डॉलर था. हालांकि मात्रा के हिसाब से देखें तो गोल्ड इंपोर्ट 4.76 फीसदी घटकर 721.03 टन रहा, जो पिछले वित्त वर्ष में 757.09 टन था. यानी कीमतें बढ़ने की वजह से आयात बिल तेजी से बढ़ा.

क्यों बढ़ रही है चिंता?

कॉमर्स मंत्रालय के मुताबिक, FY25 में गोल्ड की कीमत 76,617.48 डॉलर प्रति किलोग्राम थी, जो FY26 में बढ़कर 99,825.38 डॉलर प्रति किलोग्राम पहुंच गई. दिल्ली में फिलहाल सोने की कीमत करीब 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई है. पिछले साल अप्रैल में पहली बार सोना 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार गया था. बढ़ती कीमतों और इंपोर्ट बिल ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है.

व्यापार घाटे और CAD पर बढ़ा दबाव

सोने के बढ़ते आयात का असर भारत के ट्रेड डेफिसिट और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ा है. FY26 में देश का व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 बिलियन डॉलर पहुंच गया. RBI के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर तिमाही में भारत का Current Account Deficit (CAD) बढ़कर 13.2 बिलियन डॉलर यानी GDP का 1.3 फीसदी हो गया, जबकि एक साल पहले यह 11.3 बिलियन डॉलर था. इसमें बढ़ते ट्रेड डेफिसिट की बड़ी भूमिका रही.

भारत कहां से खरीदता है सबसे ज्यादा सोना?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है. देश की कुल इंपोर्ट बास्केट में सोने की हिस्सेदारी 9 फीसदी से ज्यादा है. भारत सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से आयात करता है, जिसकी हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है. इसके बाद UAE की हिस्सेदारी 16 फीसदी से ज्यादा और दक्षिण अफ्रीका की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी है.