WhatsApp, Telegram और Signal यूजर्स के लिए बदले नियम, जानें इस नए रूल से कैसे बंद हो सकता है आपका अकाउंट

दूरसंचार विभाग के SIM-बाइंडिंग नियम अब पूरी तरह लागू हो गए हैं. इसके तहत WhatsApp, Telegram और Signal जैसे ऐप्स को अब यूजर के रजिस्टर्ड सिम कार्ड से लगातार लिंक रहना अनिवार्य होगा. सिम हटाने या बदलने पर ऐप काम करना बंद कर देगा. सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर फ्रॉड और फर्जी अकाउंट संचालन पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है.

सिम बाइंडिंग नियम से क्या बदलेगा? Image Credit: @Money9live

SIM-Binding Rule Regulation: भारत में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है. दूरसंचार विभाग (DoT) की ओर से जारी SIM-बाइंडिंग नियम अब पूरी तरह प्रभावी हो चुके हैं. 90 दिन की अनुपालन अवधि 28 फरवरी को समाप्त हो गई थी, जिसके बाद WhatsApp, Telegram, Signal जैसे ऐप्स के लिए यह जरूरी हो गया है कि यूजर का रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी मोबाइल डिवाइस में एक्टिव और मौजूद रहे, जिससे अकाउंट चलाया जा रहा है. यह कदम डिजिटल सेफ्टी सिस्टम में एक अहम बदलाव माना जा रहा है. सरकार का उद्देश्य उन साइबर अपराधियों पर लगाम लगाना है, जो पहले एक बार OTP से अकाउंट वेरीफाई कर लेने के बाद सिम निकालकर या बदलकर भी मैसेजिंग सर्विसेज का गलत इस्तेमाल करते थे.

क्या है SIM-बाइंडिंग नियम?

पहले व्यवस्था यह थी कि यूजर एक बार OTP के जरिए अकाउंट रजिस्टर कर लेता था तो बाद में सिम कार्ड निकाल देने या फोन को केवल वाई-फाई पर चलाने के बावजूद ऐप काम करता रहता था. नए नियम के तहत अब मैसेजिंग ऐप और फिजिकल सिम कार्ड के बीच लगातार तकनीकी लिंक अनिवार्य कर दिया गया है. अगर रजिस्टर्ड सिम कार्ड-

  • फोन से निकाल दिया जाए,
  • किसी दूसरे सिम से बदल दिया जाए,
  • या इन-एक्टिव हो जाए,

तो संबंधित मैसेजिंग ऐप खुद से काम करना बंद कर देगा. सर्विस दोबारा शुरू करने के लिए उसी सिम कार्ड को फोन में लगाकर फिर से वेरिफाई करना होगा.

WhatsApp Web और मल्टी-डिवाइस पर क्या असर?

इस नियम का सबसे ज्यादा और तुरंत असर WhatsApp Web और डेस्कटॉप वर्जन पर देखा जाएगा. अब वेब या डेस्कटॉप सेशन हर छह घंटे में ऑटो-लॉगआउट हो जाएंगे. दोबारा लॉग-इन करने के लिए यूजर को अपने प्राइमरी फोन से, जिसमें एक्टिव सिम मौजूद हो, QR कोड स्कैन करना होगा. मोबाइल ऐप सामान्य रूप से चलता रहेगा, लेकिन “Linked Devices” जैसे फीचर- जैसे टैबलेट या सेकेंडरी डिवाइस पर बार-बार री-ऑथेंटिकेशन की जरूरत पड़ सकती है, खासकर अगर मुख्य सिम-युक्त फोन एक्टिव स्थिति में न मिले.

सरकार ने क्यों लागू किया यह नियम?

DoT के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में साइबर फ्रॉड और डिजिटल वित्तीय अपराधों में तेज बढ़ोतरी हुई है. जांच में सामने आया कि कई ठग भारतीय नंबरों से एक बार OTP वेरिफिकेशन कर लेते थे और फिर उन अकाउंट्स को देश से बाहर बैठकर संचालित करते थे. इन अकाउंट्स का इस्तेमाल फिशिंग, पहचान की नकल (इंपर्सनेशन) और वित्तीय ठगी के लिए किया जाता था. SIM-बाइंडिंग के जरिए हर अकाउंट को KYC-प्रमाणित सिम से स्थायी रूप से जोड़ दिया गया है. इससे डिजिटल ट्रेसबिलिटी मजबूत होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम कम करने में मदद मिलेगी.

किन्हें मिलेगी छूट?

यह नियम फिलहाल केवल भारत में रजिस्टर्ड अकाउंट्स पर लागू है. सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि जो लोग घरेलू या अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर हैं, उन्हें सेवा में रुकावट नहीं होगी, बशर्ते उनका मूल भारतीय सिम कार्ड उसी डिवाइस में मौजूद रहे. हालांकि, जो यात्री विदेश में स्थानीय फिजिकल सिम का इस्तेमाल करने के लिए अपना भारतीय सिम निकाल देते हैं, उन्हें अपने मैसेजिंग अकाउंट अस्थायी रूप से इन-एक्टिव मिल सकते हैं. सेवा बहाल करने के लिए उन्हें अपना मूल सिम फिर से लगाकर वेरिफिकेशन करना होगा.

डिजिटल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव यूजर सुविधा के लिहाज से कुछ अतिरिक्त प्रक्रियाएं जोड़ता है, लेकिन साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम है. SIM-बाइंडिंग से मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी अकाउंट संचालन और दूरस्थ धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मॉडल अन्य डिजिटल सेवाओं जैसे पेमेंट ऐप्स या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लागू होता है या नहीं. फिलहाल इतना तय है कि भारत का डिजिटल इकोसिस्टम अब पहले से ज्यादा सख्त और सुरक्षित ढांचे की ओर बढ़ रहा है.

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