अमेरिका-ईरान वार्ता से बदला ऑयल मार्केट का मूड, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी; WTI $95 के नीचे, Brent भी 6.63% लुढ़का
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में 6 मई को बड़ी गिरावट देखने को मिली. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबर सामने आने के बाद ग्लोबल ऑयल मार्केट में तेज बिकवाली हुई, जिससे Brent Crude 102.6 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया.

Crude Oil: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में 6 मई को बड़ी गिरावट देखने को मिली. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबर सामने आने के बाद ग्लोबल ऑयल मार्केट में तेज बिकवाली हुई, जिससे Brent Crude 102.6 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया. इससे पहले Brent करीब 109 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
कच्चे तेल में बड़ी गिरावट
6 मई शाम 6 बजकर 40 मिनट पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. WTI Crude 7.43 फीसदी टूटकर 94.67 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं Brent Crude भी 6.63 फीसदी गिरकर 102.6 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इसके अलावा Murban Crude भी 98.29 डॉलर प्रति बैरल पर फिसल गया और इसमें 7.25 फीसदी की गिरावट देखी गई. मिडिल ईस्ट तनाव कम होने और संभावित अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से तेल बाजार पर दबाव देखने को मिला.
अमेरिका-ईरान डील की खबर से बदला माहौल
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान एक 14-पॉइंट समझौते के करीब पहुंच सकते हैं. व्हाइट हाउस इस संभावित डील को लेकर काफी सकारात्मक नजर आ रहा है. अगर यह समझौता होता है तो पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम हो सकता है और युद्ध खत्म करने की दिशा में इसे बड़ी पहल माना जा रहा है.
क्या हो सकता है समझौते में
रिपोर्ट्स के अनुसार संभावित समझौते का मुख्य फोकस हार्मुज स्ट्रेट को सामान्य करना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण और अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत देना है. इसके बदले ईरान अस्थायी रूप से यूरेनियम संवर्धन रोक सकता है. साथ ही दोनों देशों को समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही आसान बनानी होगी.
बातचीत फेल हुई तो बढ़ सकता है तनाव
फिलहाल समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लगी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले 48 घंटों में ईरान की प्रतिक्रिया सामने आ सकती है. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि तेहरान के भीतर इस डील को लेकर मतभेद भी मौजूद हैं. ऐसे में अगर बातचीत सफल रहती है तो तेल की कीमतों में और नरमी आ सकती है. लेकिन अगर वार्ता टूटती है तो अमेरिका दोबारा सख्त कदम उठा सकता है और सैन्य कार्रवाई की आशंका भी बढ़ सकती है.
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