एक बैंक ने ईरान में खड़ा कर दिया विद्रोह, 5 अरब डॉलर के बैड लोन ने मचाई तबाही; जानें Ayandeh Bank ने कैसे मचाया हाहाकार

ईरान में Ayandeh Bank के पतन के बाद देश की बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था की कमजोरियां खुलकर सामने आ गई हैं. 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा के बैड लोन, महंगाई और रियाल में भारी गिरावट ने जनता के गुस्से को सड़कों पर ला दिया है. इसी बीच हजारों लोगों की मौत के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं.

ईरान बैंक संकट Image Credit: AI/canva

Iran Protests: ईरान में इन दिनों बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहा है. लगातार आ रही तस्वीरों में हजारों लोग सड़कों पर विरोध करते दिख रहे हैं. विरोध प्रदर्शन भले ही राजनीतिक असंतोष को लेकर हो रहे हों, लेकिन इन प्रदर्शनों की जड़ में देश की चरमराती बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था भी शामिल है. इसकी सबसे बड़ी मिसाल Ayandeh Bank का पतन है. यह संकट न केवल एक बैंक की विफलता को दिखाता है, बल्कि पूरे ईरानी आर्थिक ढांचे की गंभीर कमजोरियों को उजागर करता है.

Ayandeh Bank पर करीब 5 बिलियन डॉलर के बैड लोन का बोझ था, जिसके चलते यह पिछले साल के अंत में ढह गया. यह बैंक सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों के नियंत्रण में था और लंबे समय से जोखिम भरे कर्ज बांट रहा था. सरकार ने इसे एक सरकारी बैंक में मिलाकर और बड़े पैमाने पर नोट छापकर इस घाटे को छिपाने की कोशिश की, लेकिन इससे समस्या और गहरी हो गई.

वैश्विक दबावों के बीच आया बैंक संकट

यह वित्तीय संकट ऐसे समय में सामने आया, जब ईरान पहले से ही गंभीर अंतरराष्ट्रीय दबावों से जूझ रहा था. जून में इजरायल और यूनाइटेड स्टेट्स के साथ 12 दिन तक चला सैन्य तनाव, परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख और संभावित नए प्रतिबंधों ने देश की अर्थव्यवस्था को और कमजोर कर दिया. ईरानी करेंसी रियाल तेजी से गिरने लगी, तेल से होने वाली कमाई घटी और विदेशी मुद्रा भंडार प्रतिबंधों के कारण कम हुए.

Ayandeh Bank कैसे बना संकट की जड़

Ayandeh Bank की स्थापना 2013 में अली अंसारी ने की थी, जो पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के करीबी माने जाते थे. यूनाइटेड किंगडम ने हाल ही में अंसारी पर प्रतिबंध लगाते हुए उन्हें भ्रष्ट बैंकर बताया था. Ayandeh Bank ने सबसे अधिक ब्याज दरें देकर लाखों लोगों को आकर्षित किया और केंद्रीय बैंक से भारी मात्रा में कर्ज लिया. लेकिन इनमें से अधिकांश कर्ज बाद में बैड लोन में बदल गए.

महंगाई और करेंसी संकट ने बढ़ाया गुस्सा

लगातार नोट छापने से ईरान में महंगाई तेज होती गई और रियाल की कीमत गिरती चली गई. आम लोगों की बचत और आय की वास्तविक कीमत कम होती गई, जिससे जनता में गुस्सा और असंतोष पनपता गया. यही आर्थिक दर्द अब बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों में बदल गया है.

भारत ने अपने नागरिकों से ईरान छोड़ने को कहा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक 2,500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इसी बीच ईरान में बढ़ते तनाव के बीच ईरान में स्थित इंडियन एम्बेसी ने सभी भारतीय नागरिकों से, चाहे वे छात्र हों, तीर्थयात्री हों, कारोबारी हों या पर्यटक, जल्द से जल्द उपलब्ध साधनों और कमर्शियल फ्लाइट्स के जरिये देश छोड़ने की अपील की है.

देश की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और कई हफ्तों से चल रहे प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. इसी बीच यूनाइटेड स्टेट्स के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों से अपनी संस्थाओं पर नियंत्रण करने और पीछे न हटने की अपील की है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि उनकी मदद रास्ते में है.

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