क्या ईरान को मिला ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ में शामिल होने का न्योता, सऊदी अरब के साथ सुधर जाएंगे जटिल रिश्ते?
Mecca Pact: हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय या सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की की ओर से इस न्योते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए.

Mecca Pact: सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्की के बनाए डिफेंस अलायंस में जल्द ही एक चौंकाने वाला चौथा सदस्य शामिल हो सकता है. खबरों के मुताबिक, ईरान को ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ में शामिल होने का न्योता मिला है. यह एक अहम कदम हो सकता है, क्योंकि रियाद के साथ तेहरान की दशकों पुरानी दुश्मनी है और यमन के हूती आंदोलन से उसके संबंध हैं. यह दावा शनिवार को ‘अल मयादीन’ ने ईरान की संसद की समाचार एजेंसी ‘खानेह मेल्लत’ के प्रमुख मेहदी रहीमी के हवाले से किया.
क्षेत्रीय सुरक्षा कवच
हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय या सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की की ओर से इस न्योते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. रहीमी ने ‘अल मयादीन’ को बताया कि ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का न्योता मिला है और इस मामले पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के देश क्षेत्रीय सुरक्षा कवच की ओर बढ़ रहे हैं और इस घटनाक्रम को ‘ईरान की जीत’ बताया, क्योंकि वह लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था.
मक्का समझौते से नया गठबंधन बना
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के तहत, तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. समझौते में बेहतर रक्षा सहयोग और मज़बूत सामूहिक प्रतिरोध (Deterrence) की बात भी कही गई है. तीनों देशों का कहना है कि इस व्यवस्था का मकसद किसी खास देश को निशाना बनाना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है.
नाटो से तुलना
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने आपसी रक्षा के इस सिद्धांत की तुलना नाटो (NATO) के आर्टिकल 5 से की है, साथ ही इस बात पर जोर दिया है कि यह समझौता किसी अन्य विशिष्ट देश के खिलाफ़ नहीं है. उम्मीद है कि इस समझौते में सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के बीच तालमेल के साथ-साथ रक्षा उद्योगों में सहयोग और संयुक्त सैन्य अभ्यास भी शामिल होंगे.
मिस्र और बांग्लादेश के भी शामिल होने की संभावना
पाकिस्तान ने इस व्यवस्था को एक रक्षात्मक पहल बताया है और कहा है कि दूसरे देश भी इस ढांचे में शामिल हो सकते हैं. इससे एक बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा समूह के बनने की अटकलें तेज हो गई हैं, जिसमें मिस्र के भी शामिल होने की संभावना है. बांग्लादेश ने भी संकेत दिया है कि वह सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के साथ किसी आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने के लिए तैयार है, बशर्ते इसमें उसके अपने रणनीतिक और आर्थिक हित हों.
मक्का समझौते के बारे में ईरान ने क्या कहा है?
ईरान ने मक्का फ्रेमवर्क के निर्माण का विरोध नहीं किया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 10 अगस्त को कहा कि तेहरान को इस समझौते को लेकर चिंता करने की कोई वजह नहीं है. उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम क्षेत्रीय देशों के बीच अपनी सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को लेकर बढ़ती समझ को दिखाता है.
इस सावधानी भरी प्रतिक्रिया से खबरों में बताए गए निमंत्रण पर कम हैरानी हो सकती है. हालांकि, ईरान का असल में सदस्य बनना एक बहुत बड़ा कदम होगा, खासकर इसलिए क्योंकि रियाद के साथ तेहरान के रिश्ते जटिल हैं.
ईरान और सऊदी अरब
ईरान और सऊदी अरब लंबे समय से क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, और उनके बीच का टकराव यमन से लेकर पूरे खाड़ी क्षेत्र तक के संघर्षों में दिखता रहा है. यमन में, रियाद ने ईरान-समर्थित हूतियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन किया है. हूतियों ने हाल ही में सऊदी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं.
वर्षों की दुश्मनी के बाद दोनों देशों ने 2023 में राजनयिक संबंध बहाल किए थे, जिसमें चीन ने सुलह कराने में मदद की थी. लेकिन अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा रियाद और खाड़ी के अन्य देशों पर मिसाइल और ड्रोन दागने के बाद दोनों देशों के संबंध खराब हो गए हैं.