पाक में बहने लगी उल्टी गंगा, मुस्लिम इलाकों के नाम हिंदू-जैन-पंजाबियों के नाम पर, जानें क्यों हुआ हृदय परिवर्तन
पाकिस्तान में इन दिनों एक अलग तरह का बदलाव देखने को मिल रहा है. वहां के पंजाब प्रांत में कई पुराने इलाकों, सड़कों और चौकों के नाम फिर से बदले जा रहे हैं. खास बात यह है कि इन जगहों को अब उनके पुराने हिंदू, सिख, जैन और ब्रिटिश काल के नाम वापस दिए जा रहे हैं.

Pakistan Cities name Change: पड़ोसी देश पाकिस्तान में इन दिनों एक अलग तरह का बदलाव देखने को मिल रहा है. वहां के पंजाब प्रांत में कई पुराने इलाकों, सड़कों और चौकों के नाम फिर से बदले जा रहे हैं. खास बात यह है कि इन जगहों को अब उनके पुराने हिंदू, सिख, जैन और ब्रिटिश काल के नाम वापस दिए जा रहे हैं. इस कदम को पाकिस्तान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की कोशिश माना जा रहा है.
लाहौर में चल रहे इस अभियान के तहत कई मशहूर जगहों के नाम बदले गए हैं. इस्लामपुर का नाम फिर से कृष्ण नगर कर दिया गया है. वहीं बाबरी मस्जिद चौक का नाम बदलकर जैन मंदिर चौक रखा गया है. इसके अलावा कई इलाकों को उनके पुराने नाम वापस मिल रहे हैं.
मरियम नवाज सरकार का बड़ा कदम
यह अभियान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री Maryam Nawaz की पहल पर शुरू किया गया है. साल 2025 में शुरू हुई इस योजना को Lahore Authority for Heritage Revival यानी LAHR के तहत चलाया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इसका मकसद लाहौर की ऐतिहासिक पहचान और पुरानी विरासत को बचाना है.
किन-किन जगहों के नाम बदले गए
- सरकार ने कई पुराने नाम फिर से बहाल किए हैं.
- मौलाना जफर अली खान रोड का नाम अब फिर से लक्ष्मी चौक कर दिया गया है.
- सर आगा खान रोड को डेविड रोड नाम दिया गया है.
- फातिमा जिन्ना रोड का नाम बदलकर क्वींस रोड कर दिया गया.
- मुस्तफाबाद का नाम अब धरमपुरा और सुन्नत नगर का नाम संत नगर रखा गया है.
क्या बोली LAHR टीम
LAHR के सचिव कामरान लशारी ने कहा कि लाहौर सिर्फ एक समुदाय की नहीं, बल्कि कई धर्मों और संस्कृतियों की विरासत को अपने अंदर समेटे हुए है. उन्होंने कहा कि हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और पारसी समुदायों का इतिहास भी इस शहर से जुड़ा हुआ है और उसे सम्मान देना जरूरी है.
नवाज शरीफ का भी समर्थन
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री Nawaz Sharif भी इस योजना का समर्थन कर रहे हैं. पंजाब सरकार के अधिकारियों का कहना है कि ऐतिहासिक नामों को वापस लाने का फैसला मरियम नवाज की अध्यक्षता में लिया गया. यह कदम पाकिस्तान की बहुसांस्कृतिक पहचान को दिखाने की कोशिश है.
भारत-पाक विभाजन से पहले लाहौर में बड़ी संख्या में हिंदू, सिख और जैन समुदाय के लोग रहते थे. ऐसे में पुराने नामों को वापस लाना इतिहास और विरासत को संरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
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