ईरान की लाइफलाइन पर ट्रंप क्यों मेहरबान, चाहें तो एक झटके में सरेंडर कर दें IRGC, अमेरिका को इस बात का डर

फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग आइलैंड ईरान की तेल सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. यहां से देश के करीब 90% कच्चे तेल का निर्यात होता है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी तनाव के बावजूद इस रणनीतिक द्वीप पर अब तक कोई हमला नहीं हुआ है.

खार्ग आइलैंड ईरान की तेल सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. Image Credit: money9live

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध चल रहा है. इस संघर्ष में दोनों पक्ष एक-दूसरे के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला कर रहे हैं. इस बीच फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटे से आइलैंड ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और पिछले 1–2 दिनों से मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है. दरअसल, फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग आइलैंड ईरान का सबसे महत्वपूर्ण द्वीप माना जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अपने लगभग 90 फीसदी तेल का निर्यात इसी आइलैंड से करता है. युद्ध शुरू हुए एक सप्ताह से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अब तक इस पर कोई हमला नहीं हुआ है. यही वजह है कि यह आइलैंड चर्चा में है कि आखिर क्यों इसे निशाना नहीं बनाया गया.

ईरान की लाइफलाइन

खार्ग आइलैंड ईरान के मुख्य भूभाग से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है. 1960 के दशक से ही यह ईरान का प्रमुख ऑयल टर्मिनल रहा है, जहां से वह दुनिया के कई देशों को तेल की सप्लाई करता है. ईरान ने 1960 के दशक में एक अमेरिकी कंपनी के साथ मिलकर इस आइलैंड को विकसित किया था. इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस टर्मिनल से प्रतिदिन लगभग 7 मिलियन बैरल तेल लोड किया जा सकता है. ईरान के करीब 90 फीसदी क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट यहीं से होता है. समुद्र के नीचे बिछी पाइपलाइनों के जरिए दक्षिणी ईरान के बड़े तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल यहां पहुंचाया जाता है. यहां बने लंबे जेट्टी और बड़े स्टोरेज टैंक सुपरटैंकर जहाजों में तेल भरने की सुविधा देते हैं.

अमेरिका ने हमला क्यों नहीं किया?

हाल के दिनों में ईरान के कई सैन्य ठिकानों और एनर्जी स्ट्रक्चर पर हमले हुए हैं, लेकिन खार्ग आइलैंड को अब तक निशाना नहीं बनाया गया है. इसकी सबसे बड़ी वजह इसके संभावित वैश्विक असर को माना जा रहा है. जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी इस द्वीप पर हमला करते हैं या इसे कब्जे में लेने की कोशिश करते हैं, तो ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होगा. लेकिन इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र में ऑयल स्ट्रक्चर पर जवाबी हमलों का खतरा भी बढ़ सकता है.

वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर

खार्ग आइलैंड हॉर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित है, जहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई गुजरती है. ऐसे में अगर यहां कोई बड़ा सैन्य टकराव होता है तो ग्लोबल एनर्जी स्ट्रक्चर सप्लाई बाधित हो सकती है. अगर इस टर्मिनल पर हमला होता है तो ग्लोबल ऑयल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है. इसके अलावा एशियाई बाजारों में तेल की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है.

अमेरिका के सामने दुविधा

अमेरिका के लिए खार्ग आइलैंड एक बड़ा रणनीतिक फैसला बन गया है. अगर इस टर्मिनल को कब्जे में लिया जाता है तो ईरान की तेल आय में भारी कमी लाई जा सकती है. हालांकि कई जानकार का मानना है कि ऐसा कदम पूरे खाड़ी क्षेत्र में व्यापक युद्ध को जन्म दे सकता है और तेल बाजार में भारी अस्थिरता पैदा कर सकता है.

युद्ध के आर्थिक दांव का केंद्र

खार्ग आइलैंड पहले भी संघर्ष का केंद्र रहा है. 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध के दौरान इस द्वीप पर कई बार बमबारी की गई थी, क्योंकि यह ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र था. आज भी इसकी रणनीतिक अहमियत उतनी ही बड़ी है. चीन सहित एशियाई देशों को जाने वाला अधिकांश ईरानी तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है.

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आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल खार्ग आइलैंड से तेल लोडिंग जारी है और जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. लेकिन अगर युद्ध और बढ़ता है, तो इस द्वीप को लेकर लिया गया कोई भी फैसला न केवल वेस्ट एशिया युद्ध की दिशा तय करेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार को भी प्रभावित कर सकता है.

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