Xi Jinping का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ‘सीक्रेट लेटर’, भारत-चीन के सुधरने लगे संबंध; एक चिट्ठी ने बिगाड़ा ट्रंप का खेल: रिपोर्ट

भारत और चीन के बीच पिछले कुछ समय से रिश्ते बेहतर हो रहे हैं. इसके पीछे एक बड़ा कारण चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping का भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखा एक सीक्रेट लेटर है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में Xi Jinping ने यह पत्र लिखा था. इस पत्र में Xi Jinping ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने की इच्छा जताई थी.

भारत-चीन रिश्ता Image Credit: Canva

India-China Relation: भारत-चीन के संबंध ऐसे रहे हैं कि रिश्तों की हद नापना एक मुश्किल काम है, ऐसे में नई गरमी कितनी कारगर होगी अब सभी की इस पर नजर है. दोनों देशों के बीच ऐसी ही एक पहल बीते मार्च में हुई थी. जिसने साबित किया कुछ शब्दों में इतनी ताकत होती है कि वे न सिर्फ दिलों को जोड़ते हैं, बल्कि देशों के बीच की दूरियां भी पाट देते हैं. भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ समय से तनाव की लकीरें खींची हुई थीं. लेकिन इस बदलाव की कहानी शुरू होती है एक ‘सीक्रेट लेटर’ से. यह लेटर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखा. यह लेटर बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचा. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि यह न सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है, बल्कि दो देशों के बीच नए सिरे से रिश्ते बुनने की एक कोशिश है.

बेहतर हो रहे हैं रिश्ते

जी हां, भारत और चीन के बीच पिछले कुछ समय से रिश्ते बेहतर हो रहे हैं. इसके पीछे एक बड़ा कारण चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping का भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखा एक सीक्रेट लेटर है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के यह दावा किया गया कि, मार्च में Xi Jinping ने यह पत्र लिखा था. इस पत्र में Xi Jinping ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने की इच्छा जताई थी. साथ ही, उन्होंने चिंता जाहिर की थी कि अगर भारत और अमेरिका के बीच कोई समझौता हुआ, तो इससे चीन को नुकसान हो सकता है. हालांकि, भारत सरकार और चीन की ओर से इस खबर की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

भारत और चीन के बीच निकटता

मार्च में भारतीय और चीनी मीडिया ने बताया था कि Xi Jinping ने मुर्मू को लेटर लिखा है, लेकिन यह साफ नहीं है कि ब्लूमबर्ग उसी लेटर की बात कर रहा है या किसी और की. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी और चीन पर 145 फीसदी तक के भारी टैरिफ लगा दिए. ट्रंप की इस व्यापार जंग ने भारत और चीन को एक-दूसरे के करीब आने के लिए मजबूर किया. हालांकि, अब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार वार्ता चल रही है और दोनों देशों ने कुछ समय के लिए तनाव कम किया है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने जून में शी के इस प्रस्ताव पर गंभीरता से जवाब देना शुरू किया. उस समय भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में तनाव बढ़ गया था. ट्रंप ने मई में यह झूठा दावा भी किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव खत्म करवाया, जिससे भारत-अमेरिका रिश्तों में और खटास आ गई. ट्रंप की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत की स्थिति को कमजोर करने की कोशिश ने भी भारत को नाराज किया.

दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें

दूसरी ओर, भारत और चीन के बीच रिश्ते कई मोर्चों पर गर्मजोशी के साथ बढ़ रहे हैं. चीन ने भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश-मानसरोवर यात्रा का रास्ता फिर से खोल दिया है. भारत ने भी चीनी पर्यटकों के लिए वीजा सुविधा बहाल कर दी है. दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू हो गई हैं. चीन ने ट्रंप टैरिफ के खिलाफ भारत का खुलकर समर्थन किया है. चीनी अधिकारियों ने इन टैरिफ को अनुचित बताया है. भारत और चीन के बीच रिश्तों में यह नजदीकी सिर्फ ट्रंप के टैरिफ तक सीमित नहीं है. पिछले साल दोनों देशों ने लद्दाख सीमा विवाद को आंशिक रूप से सुलझाने के लिए एक समझौता किया था.

अमेरिकी दबाव के खिलाफ हो रहे हैं एकजुट

अब प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को चीन में होने वाले Shanghai Cooperation Organisation (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इस दौरान उनकी मुलाकात शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होगी. इस मुलाकात को अमेरिका के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि भारत और चीन इस समय अमेरिकी दबाव के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं. ट्रंप की नीतियों ने अनजाने में इन दोनों देशों को करीब ला दिया है और दोनों अब अपने हितों को साथ मिलकर सुरक्षित करने की दिशा में बढ़ रहे हैं.

ये भी पढ़े: 15777 करोड़ का ऑर्डर बुक… अब मिला एक और प्रोजेक्ट , रेखा झुनझुनवाला का भी लगा है पैसा; 3 साल में दिया 530% रिटर्न