IMD ने 2026 में सामान्य से कम मॉनसून का दिया संकेत, 92 फीसदी बारिश का अनुमान; इन फसलों पर पड़ेगा असर
Monsoon Forecast: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, जो आम तौर पर 1 जून के आस-पास केरल में शुरू होता है और सितंबर के मध्य तक लौट जाता है. 2026 में मॉनसून का सामान्य से कम रहना, पिछले तीन साल में ऐसा पहला मौका होगा.

Monsoon Forecast: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने लंबी अवधि के पूर्वानुमान में बताया है कि 2026 में भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून से होने वाली बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है. बारिश का अनुमान लंबी अवधि के औसत (LPA) का 92 फीसदी लगाया गया है. इस अनुमान में मॉडल की गलती की गुंजाइश ±5 फीसदी है, जिसमें जून-सितंबर सीजन के लिए LPA 87 cm तय किया गया है, जो 1971-2020 की अवधि पर आधारित है. LPA के 96% से कम बारिश को ‘सामान्य से कम’ माना जाता है.
सामान्य से कम बारिश
क्षेत्रीय रूप से देश के बड़े हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की उम्मीद है, हालांकि पूर्वोत्तर, पश्चिमोत्तर और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, जो आम तौर पर 1 जून के आस-पास केरल में शुरू होता है और सितंबर के मध्य तक लौट जाता है, भारत की खेती के लिए बहुत जरूरी है. यह देश की लगभग आधी खेती की जमीन की सिंचाई करता है.
कमजोर मॉनसून का असर
कमजोर मॉनसून चावल, दालों और तिलहनों जैसी बारिश पर निर्भर फसलों के उत्पादन पर असर डाल सकता है, साथ ही खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ा सकता है और गांवों में मांग को कम कर सकता है.
अल नीनो फैक्टर
IMD ने कहा कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान अल नीनो-साउथ ऑसिलेशन (ENSO)-न्यूट्रल स्थितियां रहने की संभावना है, जबकि मॉनसून के मौसम में अल नीनो की स्थितियां बनने की उम्मीद है. यह एक ऐसा फैक्टर है जो आमतौर पर भारत में बारिश को कम कर देता है.
तीन साल में पहला मौका
2026 में मॉनसून का सामान्य से कम रहना, पिछले तीन साल में ऐसा पहला मौका होगा. नीति-निर्माता और बाजार इस पर बारीकी से नजर रखेंगे, ताकि फसल उत्पादन, महंगाई और कुल आर्थिक विकास पर इसके असर को समझा जा सके. IMD से मई के आखिरी हफ़्ते में मॉनसून के लिए एक अपडेटेड पूर्वानुमान जारी करने की उम्मीद है.