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टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिल सकती है बड़ी राहत! सरकार कच्चे कपास पर 11% ड्यूटी हटाने की तैयारी में

देश के टेक्सटाइल उद्योग को राहत देने के लिए सरकार कच्चे कपास के आयात पर लगने वाली 11% कस्टम ड्यूटी हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है. घरेलू बाजार में कपास की ऊंची कीमतों और 45 लाख गांठ की सप्लाई कमी के चलते कपड़ा कंपनियों की लागत तेजी से बढ़ रही है.

कपास आयात शुल्क Image Credit: FreePik

देश के टेक्सटाइल इंडस्ट्री को लागत के भारी बोझ से बचाने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. कच्चे कपास के आयात पर लगने वाली 11 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह हटाने पर सरकार बेहद गंभीरता से विचार कर रही है. पीटीआई की रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि इस मामले में मंत्रालयों के बीच बातचीत ‘एडवांस्ड स्टेज’ में है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला आ सकता है.

मंत्रालयों के बीच आखिरी दौर की चर्चा

कपास पर से ड्यूटी हटाने को लेकर सरकार के तीन प्रमुख मंत्रालय आपस में लगातार मंथन कर रहे हैं:

  • शामिल मंत्रालय: वित्त, कपड़ा और कृषि मंत्रालय मिलकर इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं.
  • वजह: घरेलू बाजार में कपास की ऊंची कीमतों के कारण कपड़ा कंपनियों पर लागत का भारी दबाव है, जिसे कम करने के लिए इंडस्ट्री लंबे समय से इस ड्यूटी को हटाने की मांग कर रही थी.
  • अधिकारी का बयान: पीटीआई (PTI) से बात करते हुए अधिकारी ने उम्मीद जताई कि बहुत जल्द इस परामर्श प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा.

हाल ही में रेडीमेड गारमेंट उद्योग के प्रतिनिधियों और निर्यातकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की थी. इस बैठक में डेलिगेशन ने टैक्स हटाने के पक्ष में मजबूत दलीलें पेश कीं.

45 लाख गांठ की भारी किल्लत, आंकड़ों से समझें पूरा गणित

बिजनेस इंडस्ट्री के मुताबिक, इस समय देश में कपास की मांग और सप्लाई के बीच एक बड़ा अंतर आ गया है:

  • कुल जरूरत: चालू वर्ष के लिए कपड़ा उद्योग को करीब 337 लाख गांठ (Bales) कपास की आवश्यकता है.
  • घरेलू सप्लाई: साल 2025-26 के सीजन में घरेलू बाजार में केवल 292.15 लाख गांठ कपास आने का अनुमान है.
  • सप्लाई-डिमांड गैप: इस वजह से बाजार में लगभग 45 लाख गांठ कपास की भारी कमी हो गई है.

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कपास की इसी किल्लत के चलते कताई मिलों और कपड़ा निर्माताओं को बेहतरीन क्वालिटी का कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ रही है. अगर सरकार 11% ड्यूटी हटाती है, तो सस्ते आयात से इस कमी को पूरा किया जा सकेगा.