UP के किसानों को बड़ी राहत, अब बिना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी MSP पर बेच सकेंगे गेहूं; जानें कारण
उत्तर प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीद नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता खत्म कर दी है. अब किसान सीधे सरकारी केंद्रों पर MSP पर फसल बेच सकेंगे. जानें सरकार ने आखिर ये फैसला क्यों लिया.
UP Wheat Procurement and MSP: उत्तर प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीद को लेकर एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है, जिससे लाखों किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. अब राज्य के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद केंद्रों में अपनी फसल बेचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बिना भी पात्र होंगे. यानी जो किसान अब तक डिजिटल प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे थे, वे भी बिना किसी बाधा के अपनी उपज सरकार को बेच सकेंगे.
क्यों लिया गया ये फैसला?
दरअसल, राज्य में इस साल गेहूं खरीद के लिए ‘फार्मर रजिस्ट्री’ को अनिवार्य कर दिया गया था. इस सिस्टम का मकसद था किसानों की सही पहचान करना और उनकी फसल का सत्यापन करना, ताकि खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बन सके. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही सामने आई. बड़ी संख्या में किसान, खासकर छोटे, सीमांत और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले, इस ऑनलाइन प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाए. कई जगह इंटरनेट की कमी, तकनीकी दिक्कतें और जानकारी का अभाव बड़ी बाधा बन गया.
किसानों पर पड़ा असर!
इसका सीधा असर किसानों पर पड़ा. जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया, वे सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने से वंचित रह गए. मजबूरी में उन्हें अपनी फसल स्थानीय व्यापारियों या बिचौलियों को कम कीमत पर बेचनी पड़ी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. MSP का लाभ, जो किसानों की आय सुरक्षा के लिए बनाया गया है, उन तक नहीं पहुंच पा रहा था. जैसे ही यह स्थिति सामने आई, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया और तुरंत हस्तक्षेप किया. उन्होंने साफ निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए और खरीद प्रक्रिया को सरल बनाया जाए. इसके बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य सूची से हटा दिया.
नई व्यवस्था के तहत क्या होगा?
नई व्यवस्था के तहत अब किसान पहले की तरह सीधे सरकारी खरीद केंद्रों पर जाकर अपना गेहूं बेच सकेंगे. रजिस्ट्रेशन की बाध्यता खत्म होने से प्रक्रिया तेज और आसान होगी. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों (DM) और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस आदेश को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी किसान को खरीद केंद्रों पर परेशानी न हो.
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इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन किसानों को होगा, जो डिजिटल सिस्टम से अभी पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं. खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले किसानों के लिए यह राहत भरा कदम है. साथ ही, इससे बिचौलियों की भूमिका भी कम होने की उम्मीद है, क्योंकि अब किसान सीधे सरकार को अपनी फसल बेच सकेंगे और उन्हें MSP का पूरा लाभ मिलेगा.
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