E20 पेट्रोल पर आया बड़ा फैसला! Grand Vitara बदलो या ₹20.50 लाख लौटाओ; आयोग ने मारुति सुजुकी को दिया 45 दिन का अल्टीमेटम
E20 पेट्रोल विवाद के बीच रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने Maruti Suzuki को बड़ा झटका दिया है. आयोग ने Grand Vitara Strong Hybrid Zeta Plus को 45 दिनों के भीतर नई E20 कंपैटिबल कार से बदलने या कुल 20.50 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है. शिकायतकर्ता ने E20 पेट्रोल भरवाने के बाद इंजन में बार-बार खराबी आने का आरोप लगाया था.

E20 Petrol: E20 पेट्रोल को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (अतिरिक्त पीठ) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. आयोग ने Maruti Suzuki को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता की 2023 मॉडल Grand Vitara Strong Hybrid Zeta Plus कार को 45 दिनों के भीतर नई E20 Compatible कार से बदले. यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो कंपनी को वाहन की पूरी कीमत, आरटीओ शुल्क और बीमा प्रीमियम सहित कुल 20.50 लाख रुपये वापस करने होंगे. इसके अलावा आयोग ने मानसिक उत्पीड़न के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा और 10,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का भी आदेश दिया है.
क्या है पूरा मामला
mint की रिपोर्ट के मुताबिक, रायपुर निवासी डॉ. प्रेमराज देवता ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने 2023 मॉडल की Maruti Suzuki Grand Vitara खरीदी थी. शिकायत के अनुसार, वाहन में E20 पेट्रोल भरवाने के बाद बार-बार इंजन से जुड़ी समस्याएं आने लगीं. कार कई बार रास्ते में बंद हो गई. फ्यूल टैंक की सफाई करनी पड़ी और वाहन को बार-बार सर्विस सेंटर ले जाना पड़ा. शिकायतकर्ता का आरोप था कि वाहन E20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं था, जबकि बाजार में E20 ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा था. उनका यह भी कहना था कि कंपनी और डीलर ने उन्हें इस संबंध में पर्याप्त जानकारी नहीं दी.
आयोग ने क्या कहा
14 जुलाई 2026 को दिए गए 23 पन्नों के आदेश में आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीज ने माना कि शिकायतकर्ता को बेची गई Grand Vitara, E20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं थी. आयोग ने कहा कि कंपनी और डीलर उपभोक्ता को E20 Compatible वाहन उपलब्ध कराने में विफल रहे, जो Deficiency in Service और Unfair Trade Practice की श्रेणी में आता है.
आयोग ने Maruti Suzuki को निर्देश दिया कि वह 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की कार वापस लेकर नई E20 Compatible Grand Vitara उपलब्ध कराए. यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो कंपनी को वाहन की कीमत 18.29 लाख रुपये, आरटीओ शुल्क 1.86 लाख रुपये और बीमा प्रीमियम 34,644 रुपये मिलाकर कुल 20,50,494 रुपये लौटाने होंगे.
साथ ही आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय के भीतर आदेश का पालन नहीं होने पर कंपनी को मुआवजे और मुकदमे के खर्च की राशि पर आदेश की तारीख से भुगतान होने तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.
E20 पेट्रोल विवाद के बीच फैसले का महत्व
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह E20 पेट्रोल विवाद में शुरुआती न्यायिक फैसलों में से एक है. केंद्र सरकार देश में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और पर्यावरणीय लाभ हासिल करना चाहती है. हालांकि, कई उपभोक्ता और विशेषज्ञ पुराने या गैर-अनुकूल वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
उनका कहना है कि इससे इंजन की कार्यक्षमता, माइलेज और लंबे समय की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है. इसी बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा था कि जो उपभोक्ता E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, उनके लिए भविष्य में 100 प्रतिशत पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध हो सकता है, लेकिन उसकी कीमत अधिक होगी.
यह भी पढ़ें: घाटे से मुनाफे में लौटी यह कंपनी, गोली की रफ्तार से भागे शेयर, कमाई भी हुई दोगुनी; रखें नजर