ईरान युद्ध का बड़ा असर! पेट्रोल-डीजल महंगा पड़ते ही EV, CNG और Hybrid कारों की बिक्री 29% उछली
ईरान युद्ध के बाद बढ़ी तेल कीमतों ने भारतीय ऑटो बाजार की तस्वीर बदल दी है. जून में पहली बार इलेक्ट्रिक (EV), हाइब्रिड और CNG गाड़ियों की संयुक्त हिस्सेदारी 40.35% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. FADA के मुताबिक यात्री वाहन बिक्री करीब 29 फीसदी बढ़कर 4.10 लाख यूनिट से अधिक रही.
पश्चिम एशिया में छिड़े ईरान युद्ध ने जहां दुनिया भर में तेल का संकट खड़ा कर दिया, वहीं भारतीय कार बाजार में इसने एक ऐतिहासिक बदलाव ला दिया है. पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान होकर भारतीय ग्राहकों ने भारी संख्या में इलेक्ट्रिक (EV), हाइब्रिड और सीएनजी (CNG) गाड़ियों का रुख किया है. जून महीने में देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने रफ्तार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिसमें सबसे बड़ा योगदान इन वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuels) वाली गाड़ियों का रहा.
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के मुताबिक, जून में बिकने वाली कुल यात्री गाड़ियों (PV) में वैकल्पिक ईंधन मॉडल की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 40.35 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो मई में 38 प्रतिशत थी.
कुल बिक्री में 29% का जोरदार उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक, मई में पेट्रोल और डीजल के दामों में कई बार हुई बढ़ोतरी के बाद ग्राहकों ने तेजी से बजट-फ्रेंडली विकल्पों को अपनाया. जून में यात्री वाहनों (PV) की खुदरा बिक्री सालाना आधार पर 28.6% (लगभग 29%) बढ़कर 4,10,853 यूनिट तक पहुंच गई. वहीं, सभी श्रेणियों के वाहनों की कुल बिक्री 21.8% की बढ़त के साथ 26 लाख यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज की गई.
CNG और हाइब्रिड की मची धूम
वैकल्पिक ईंधन बाजार में इस बार सीएनजी गाड़ियों का दबदबा सबसे ज्यादा रहा:
- CNG गाड़ियां: कुल यात्री वाहन बिक्री में 24.3% हिस्सेदारी.
- हाइब्रिड गाड़ियां: 8.3% हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर.
- इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV): 7.8% हिस्सेदारी.
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के अनुसार, तेल की कीमतें बढ़ने के बाद से उनकी सीएनजी कारों की बुकिंग में 40% का भारी उछाल आया है. सिर्फ कारें ही नहीं, बल्कि टू-व्हीलर मार्केट में भी पहली बार इलेक्ट्रिक स्कूटर्स और बाइक्स की हिस्सेदारी दहाई के आंकड़े को पार करते हुए 10.6% पर पहुंच गई.
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क्या यह बदलाव हमेशा के लिए है?
रॉयटर्स ने फाडा (FADA) के अध्यक्ष सी.एस. विग्नेश्वर के हवाले से बताया, “हमें यह देखना होगा कि ग्राहकों का यह फैसला तेल संकट को देखकर लिया गया कोई तात्कालिक कदम है या फिर यह बदलाव अब हमेशा के लिए बना रहेगा.” उन्होंने यह भी बताया कि ईरान युद्ध के कारण उपजा कच्चे तेल का संकट और सप्लाई चेन की दिक्कतें अब काफी हद तक कम हो चुकी हैं, लेकिन बाजार को पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ तिमाहियों का समय लग सकता है.
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