2030 तक पेट्रोल गाड़ियों की जगह दौड़ेंगी 35 लाख EVs, कच्चे तेल का इंपोर्ट बिल होगा कम; बचेंगे 1 लाख करोड़ रुपये

रिपोर्ट में पश्चिम एशिया के तनाव के बाद EV अपनाने में आई तेजी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों और अगले 10-15 वर्षों के लिए व्यापक रोडमैप की जरूरत पर जोर दिया गया है. मौजूदा ट्रेंड के आधार पर, SBI का अनुमान है कि 2026 में कुल EV रजिस्ट्रेशन 25 लाख का आंकड़ा पार कर लेंगे.

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है. Image Credit: money9live

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है और इसका सीधा फायदा देश की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगर 2030 तक देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बाजार हिस्सेदारी 20 फीसदी तक पहुंच जाती है, तो भारत के कच्चे तेल के इंपोर्ट बिल में सालाना करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. रिपोर्ट में पश्चिम एशिया के तनाव के बाद EV अपनाने में आई तेजी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों और अगले 10-15 वर्षों के लिए व्यापक रोडमैप की जरूरत पर जोर दिया गया है.

बच सकते हैं 1 लाख करोड़

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2027-2030 के दौरान पेट्रोल गाड़ियों की जगह लगभग 35 लाख और इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs) आने की उम्मीद है. अगर 2030 तक EV का हिस्सा गाड़ी बाजार का 20 फीसदी हो जाता है, तो इससे भारत को कच्चे तेल के इंपोर्ट बिल में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये बचाने में मदद मिलेगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2026 में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से EV को अपनाने की रफ्तार काफी तेज हुई है और इनके रजिस्ट्रेशन में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है.

35 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां

इसमें कहा गया है, ‘हमारे अनुमान के मुताबिक, 2027-2030 के चार साल के दौरान पेट्रोल गाड़ियों की जगह 35 लाख और EV (इलेक्ट्रिक गाड़ियां) आने की उम्मीद है. 2026 तक EV गाड़ियों की हिस्सेदारी 8 फीसदी से ज्यादा हो गई है. 2030 तक 20 फीसदी हिस्सेदारी होने से इंपोर्ट बिल में 1 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है.’

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च-जून 2026 के दौरान हर महीने EV रजिस्ट्रेशन का औसत 1.3 लाख (2025 में) से बढ़कर 2.3 लाख हो गया, यानी हर महीने लगभग 1 लाख गाड़ियों की बढ़ोतरी हुई.

2026 में EV रजिस्ट्रेशन आंकड़ा

मौजूदा ट्रेंड के आधार पर, SBI का अनुमान है कि 2026 में कुल EV रजिस्ट्रेशन 25 लाख का आंकड़ा पार कर लेंगे. SBI ने कहा कि फरवरी 2026 के बाद पैसेंजर कारों, दो-पहिया और तीन-पहिया वाहनों में EV की बढ़ती मार्केट हिस्सेदारी यह बताती है कि पश्चिम एशिया के संघर्ष के असर ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में ग्राहकों की दिलचस्पी को बढ़ाया है.

तेजी से अपनाने में मदद के लिए, रिपोर्ट में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर फास्ट चार्जर्स को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया. अभी, देश के चार्जिंग नेटवर्क में फास्ट चार्जर्स की हिस्सेदारी सिर्फ़ 30% के आसपास है. रिपोर्ट में 10-15 साल के एक व्यापक EV रोडमैप की मांग की गई है, जिसमें गाड़ी के अलग-अलग सेगमेंट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रेगुलेटरी पॉलिसी और बैटरी बनाने जैसे मामलों के लिए साफ लक्ष्य तय हों.ा

EV रोडमैप की मांग

रिपोर्ट में 10-15 साल के एक व्यापक EV रोडमैप की मांग की गई है, जिसमें वाहन के प्रकार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रेगुलेटरी पॉलिसी और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग जैसे मामलों के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किए जाएं. इसमें EV इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कई उपाय भी सुझाए गए हैं, जैसे EV क्रेडिट गारंटी फंड बनाना, पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए रियायती दरों पर जमीन देना, इलेक्ट्रिक वाहनों की सरकारी खरीद बढ़ाना और ग्रीन मोबिलिटी के लिए एक अलग कैटेगरी बनाना.

SBI ने देखा कि अलग-अलग राज्यों में चार्जिंग स्टेशनों पर भार (लोड) काफी अलग-अलग है. कुछ राज्यों में हर चार्जिंग स्टेशन 200 से ज्यादा EV को सर्विस देता है, जबकि दूसरे राज्यों में यह संख्या प्रति चार्जिंग स्टेशन लगभग 50 गाड़ियां है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभी 29,151 चार्जिंग स्टेशन हैं, जिनमें से कर्नाटक और महाराष्ट्र मिलकर कुल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का 35 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं.

फास्ट चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

रिपोर्ट में बताया गया है कि तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और गोवा जैसे राज्यों ने फास्ट चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है. इन राज्यों में कुल चार्जिंग स्टेशनों में से 50 फीसदी से अधिक फास्ट चार्जर हैं. इसमें यह भी बताया गया कि दिल्ली सरकार अपनी नई EV पॉलिसी के तहत अगले चार साल में 32,000 चार्जिंग पॉइंट लगाने की योजना बना रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की लंबे समय की सफलता काफी हद तक देश भर में पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता पर निर्भर करेगी.

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