क्या XP100 बनेगा E20 पेट्रोल का विकल्प? जानें क्या है यह फ्यूल और किन वाहनों के लिए सही
E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच इंडियन ऑयल का XP100 फ्यूल चर्चा में है. 100 ऑक्टेन रेटिंग वाला यह पेट्रोल पूरी तरह एथेनॉल-फ्री है और हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के लिए बनाया गया है. इसे सामान्य 91 ऑक्टेन वाली गाड़ियों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
What is XP100: E20 पेट्रोल को लेकर उठी चिंताओं के बीच इंडियन ऑयल का प्रीमियम फ्यूल XP100 चर्चा में है. कुछ वाहन मालिकों ने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज कम होने और पुराने इंजनों पर असर पड़ने जैसी शिकायतें की हैं. ऐसे में कई लोग XP100 को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. आइए जानते हैं कि XP100 क्या है और क्या इसे आपकी गाड़ी में इस्तेमाल किया जा सकता है.
क्या है XP100?
XP100 इंडियन ऑयल का 100 ऑक्टेन रेटिंग वाला प्रीमियम पेट्रोल है, जिसे दिसंबर 2020 में लॉन्च किया गया था. यह पूरी तरह एथेनॉल-फ्री है, जबकि E20, XP95 और कई प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट होती है. इसे खासतौर पर सुपरकार, लग्जरी कारों और हाई-परफॉर्मेंस बाइक्स के लिए तैयार किया गया है.
सरकार E20 पेट्रोल को क्यों दे रही बढ़ावा?
सरकार एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है क्योंकि इससे प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है. E20 पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल होता है. हालांकि, कुछ उपभोक्ताओं ने पुराने वाहनों में इसके इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है.
क्या सामान्य गाड़ियों में भी भरवा सकते हैं XP100?
इंडियन ऑयल के अनुसार, 91 ऑक्टेन पेट्रोल पर चलने वाले वाहन में भी XP100 का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे इंजन को कोई नुकसान नहीं होगा. कंपनी का दावा है कि इससे इंजन अधिक स्मूद चलता है, एक्सेलेरेशन बेहतर होता है और फ्यूल सिस्टम की सफाई में भी मदद मिलती है. हालांकि, इसका पूरा फायदा उन इंजनों में मिलता है जिन्हें हाई ऑक्टेन फ्यूल के लिए डिजाइन किया गया है.
क्या 91 और XP100 को मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं?
अगर वाहन में 91 ऑक्टेन और XP100 दोनों पेट्रोल मिल जाते हैं, तब भी इंजन को कोई नुकसान नहीं होगा. मिश्रण के बाद फ्यूल की ऑक्टेन रेटिंग बढ़ जाएगी, जिससे वाहन पहले की तुलना में अधिक स्मूद चल सकता है.
क्या वारंटी पर पड़ेगा असर?
इंडियन ऑयल का कहना है कि XP100 सहित उसके सभी पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों पर खरे उतरते हैं. इसलिए वाहन निर्माता कंपनियां (OEM) इंजन वारंटी को लेकर कोई आपत्ति नहीं करतीं.
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