ईरान-इजराइल जंग के बीच अमिताभ कांत की बड़ी चेतावनी, कच्चे तेल में प्रति बैरल $10 की बढ़ोतरी से भारत पर 14 अरब डॉलर तक बढ़ेगा बोझ
अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए चिंता बढ़ा रही है. पूर्व नीति आयोग प्रमुख अमिताभ कांत ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत के सालाना आयात में लगभग 13 से 14 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.
Israel USA-Iran War: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते सैन्य खतरे के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है. इस स्थिति को लेकर पूर्व नीति आयोग प्रमुख और भारत के पूर्व G20 शेरपा अमिताभ कांत ने चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होती है, तो भारत के सालाना आयात बिल में लगभग 13 से 14 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है. इससे देश के चालू खाते का घाटा बढ़ने और रुपये पर दबाव आने की आशंका भी है. असर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इसका असर बाजार पर भी दिख सकता है.
तेल कीमतों में तेजी की वजह
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण मध्य-पूर्व से तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है. रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तेल टैंकरों को निशाना बनाया है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 77 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है.
भारत के लिए बढ़ सकती है आर्थिक चुनौती
अमिताभ कांत के मुताबिक तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारत के लिए आर्थिक दबाव पैदा कर सकती है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी देश के आयात बिल को 13-14 अरब डॉलर तक बढ़ा सकती है, जिससे चालू खाते का घाटा बढ़ने और रुपये पर दबाव पड़ने की संभावना है.
ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्या है रास्ता?
अमिताभ कांत का मानना है कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए घरेलू ऊर्जा स्रोतों पर ज्यादा ध्यान देना होगा. इसके लिए सोलर-विंड हाइब्रिड ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, आधुनिक बिजली ग्रिड, बड़े पैमाने पर बैटरी और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज जैसी तकनीकों को अपनाना जरूरी है. साथ ही परमाणु ऊर्जा जैसे स्थिर स्रोतों को भी मजबूत करना होगा. उनका कहना है कि केवल क्षमता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि साफ ऊर्जा की भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करना ही असली समाधान है.
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