ट्रंप के खिलाफ कोर्ट पहुंचे 25 अमेरिकी राज्य, भारत और 59 अन्य देशों पर नए टैरिफ लगाने के विरोध में मुकदमा दायर

इन राज्यों का तर्क है कि इसी तरह के कदमों पर कोर्ट के कई फैसलों के बावजूद, ट्रंप प्रशासन एक बार फिर अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है. विवादित टैरिफ व्यवस्था 24 जुलाई को लागू हुई.

ट्रंप के खिलाफ कोर्ट पहुंचे अमेरिकी राज्य. Image Credit: Getty image

Highlights

  • डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 अमेरिकी राज्य कोर्ट पहुंचे.
  • यह मामला ट्रंप की टैरिफ रणनीति की नई परीक्षा है.
  • राज्यों का कहना है कि ट्रंप कोर्ट के फैसले नहीं मान रहे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने के नए कदम के खिलाफ फिर से कोर्ट में मामला पहुंचा है. सोमवार को डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने भारत समेत 60 व्यापारिक साझेदारों से होने वाले आयात पर लगाए गए नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया. इन राज्यों का तर्क है कि इसी तरह के कदमों पर कोर्ट के कई फैसलों के बावजूद, ट्रंप प्रशासन एक बार फिर अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है.

टैरिफ को चुनौती

न्यूयॉर्क में ‘यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ में दायर इस मुकदमे में 10% से 12.5% ​​तक के उन टैरिफ को चुनौती दी गई है, जो पिछले महीने ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 301 के तहत लागू हुए थे. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये शुल्क उन देशों के खिलाफ लगाए गए हैं, जो जबरन मजदूरी से बने सामान के निर्यात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहे हैं.

यह मामला ट्रंप की टैरिफ रणनीति की नई परीक्षा है, जो अमेरिकी अदालतों में बार-बार झटके लगने के बावजूद कायम रही है.

25 राज्यों ने दायर किया मुकदमा

अमेरिका के राज्यों का कहना है कि ट्रंप कोर्ट के फैसलों को नहीं मान रहे हैं. यह मुकदमा 25 राज्यों ने दायर किया है, जिनमें ओरेगन और न्यूयॉर्क शामिल हैं. इन सभी राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी के गवर्नर या अटॉर्नी जनरल हैं. राज्यों का तर्क है कि ट्रंप आयात पर भारी टैक्स (टैरिफ) को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें कोर्ट पहले ही गैर-कानूनी करार दे चुका है. इसके लिए वे एक अलग कानूनी आधार का इस्तेमाल कर रहे हैं.

शिकायत के अनुसार, सेक्शन 301 का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से उन खास देशों या उद्योगों के खिलाफ किया गया है जिन पर गलत व्यापारिक तौर-तरीके अपनाने का आरोप है, न कि लगभग सभी अमेरिकी आयातों पर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए.

कानून के गलत इस्तेमाल का आरोप

मुकदमे में प्रशासन पर यह आरोप भी लगाया गया है कि वे 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 का इस्तेमाल करके उन टैरिफ को फिर से लागू कर रहे हैं, जिन्हें पहले कोर्ट में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था. राज्यों का कहना है कि कानून का गलत इस्तेमाल करके उन ड्यूटीज को फिर से शुरू किया जा रहा है जिनकी पहले ही कानूनी जांच हो चुकी है.

24 जुलाई से लागू हुई विवादित टैरिफ व्यवस्था

विवादित टैरिफ व्यवस्था 24 जुलाई को लागू हुई, जिसने ट्रंप प्रशासन द्वारा शुरू किए गए ग्लोबल टैरिफ के पुराने नियमों की जगह ली. इन उपायों में भारत, चीन और यूरोपीय संघ समेत अमेरिका के कई बड़े व्यापारिक साझेदारों से होने वाला आयात शामिल है और कई देशों ने इनकी आलोचना की है.

इस नीति का बचाव करते हुए, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा था कि अमेरिका ने हमेशा जबरन मजदूरी से तैयार किए गए सामान के आयात पर रोक लगाई है और दूसरे देशों से भी ऐसे ही नियम अपनाने को कहा है.

नए टैरिफ का असर 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों पर पड़ेगा

विवादित टैरिफ की घोषणा 24 जुलाई को की गई थी और ये यूरोपीय संघ और भारत सहित 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों से होने वाले आयात पर लागू होते हैं. कुछ देशों को कड़े नियम लागू करने के बाद कम टैरिफ दरें मिलीं. उदाहरण के लिए, प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारत के लिए टैरिफ 12.5 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया.

तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक और US-मेक्सिको-कनाडा समझौते के तहत ड्यूटी-फ्री (टैक्स-मुक्त) सुविधा पाने वाले सामानों सहित कुछ उत्पादों को इन नए टैरिफ से छूट दी गई थी.

यह भी पढ़ें: डाबर के ‘100%’ दावे वाले शहद, घी और तेल बेचने पर रोक, FSSAI को जांच में मिली ये गड़बड़ी; बैन कर दिए कई प्रोडक्ट