Diet Coke और बीयर कंपनियों को बड़ी राहत, एल्यूमिनियम कैन सर्टिफिकेशन की डेडलाइन बढ़ी
डाइट कोक और बीयर कंपनियों को एल्यूमिनियम कैन की कमी के बीच सरकार ने राहत दी है. अनिवार्य क्वालिटी सर्टिफिकेशन की समयसीमा बढ़ा दी गई है. बड़े निर्माताओं के लिए नियम 1 अप्रैल 2027, छोटे उद्यमों के लिए 1 जुलाई और माइक्रो कंपनियों के लिए 1 अक्टूबर 2027 से लागू होंगे. इससे कंपनियों को उत्पादन और सप्लाई बढ़ाने का समय मिलेगा.
Highlights
- एल्यूमिनियम कैन सर्टिफिकेशन की डेडलाइन आगे बढ़ी
- कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय
- महंगे आयातित कैन से कंपनियों पर कितना असर?
डाइट कोक और बीयर जैसे पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों को सरकार ने बड़ी राहत दी है. एल्यूमिनियम बेवरेज कैन के लिए अनिवार्य क्वालिटी सर्टिफिकेशन की समयसीमा को करीब छह महीने आगे बढ़ा दिया गया है. पहले यह नियम 31 अक्टूबर 2026 से लागू होना था, लेकिन अब अलग-अलग श्रेणी के निर्माताओं के लिए नई समयसीमा तय की गई है.
अब कब से लागू होगा नियम?
नई व्यवस्था के तहत बड़े निर्माताओं के लिए एल्यूमिनियम कैन का अनिवार्य सर्टिफिकेशन 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा. छोटे उद्यमों को 1 जुलाई 2027 तक और माइक्रो कंपनियों को 1 अक्टूबर 2027 तक समय दिया गया है. इस फैसले से बेवरेज इंडस्ट्री को उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कैन की सप्लाई बेहतर करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है.
कैन की कमी से परेशान थीं कंपनियां
भारत में बीयर और सॉफ्ट ड्रिंक की बिक्री में एल्यूमिनियम कैन की हिस्सेदारी एक चौथाई से ज्यादा हो चुकी है. पिछले दो वर्षों में इनकी हिस्सेदारी करीब दोगुनी हुई है. लेकिन घरेलू कैन निर्माता बढ़ती मांग के हिसाब से उत्पादन नहीं बढ़ा पाए हैं. इसका असर कुछ ब्रांड्स की सप्लाई पर भी पड़ा है. डाइट कोक और कुछ बीयर ब्रांड्स को एल्यूमिनियम कैन की कमी का सामना करना पड़ा है.
600 मिलियन अतिरिक्त कैन बनाने का था लक्ष्य
इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि घरेलू निर्माता करीब 60 करोड़ अतिरिक्त कैन का उत्पादन बढ़ा पाएंगे. हालांकि, लक्ष्य का लगभग आधा ही हासिल हो सका. नई समयसीमा से कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने, नई मशीनें और प्रोडक्शन लाइन लगाने तथा गर्मियों के सीजन से पहले पर्याप्त स्टॉक तैयार करने का मौका मिलेगा.
विदेश से मंगाने पर 25-30% ज्यादा खर्च
घरेलू सप्लाई की कमी के कारण बेवरेज कंपनियां यूएई, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे बाजारों से एल्यूमिनियम कैन मंगा रही हैं. लेकिन आयातित कैन घरेलू कैन के मुकाबले करीब 25-30% महंगे पड़ रहे हैं.
इससे कंपनियों की पैकेजिंग लागत बढ़ रही है. अगर यह अतिरिक्त लागत लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर कंपनियों के मार्जिन और कुछ मामलों में उत्पाद की कीमत पर भी पड़ सकता है.
नई प्रोडक्शन लाइन लगाने में लग सकता है एक साल
देश में मौजूदा कैन उत्पादन क्षमता लगभग पूरी तरह इस्तेमाल हो रही है. नए उत्पादन प्लांट या प्रोडक्शन लाइन लगाने में करीब एक साल तक का समय लग सकता है. यही वजह है कि इंडस्ट्री लंबे समय से सरकार से नियमों को लागू करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग कर रही थी.
BIS सर्टिफिकेशन क्यों जरूरी है?
एल्यूमिनियम बेवरेज कैन को अनिवार्य क्वालिटी कंट्रोल नियमों के तहत लाने का मकसद कैन की गुणवत्ता, सुरक्षा, पैकेजिंग की मजबूती और रिसाइक्लिंग से जुड़े मानकों को बेहतर करना है. इसके तहत कैन के मटेरियल, आकार, सीलिंग, दबाव सहने की क्षमता, लीकेज और अंदर की प्रोटेक्टिव कोटिंग जैसे मानकों की जांच की जाती है.
गर्मियों से पहले कंपनियों को मिलेगा समय
बीयर और सॉफ्ट ड्रिंक की मांग गर्मियों में तेजी से बढ़ती है. ऐसे में कंपनियों के लिए पर्याप्त कैन उपलब्ध होना बेहद जरूरी है. नई समयसीमा से निर्माताओं को अगले समर सीजन के लिए इन्वेंट्री तैयार करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने का अतिरिक्त समय मिलेगा. हालांकि, कंपनियों के सामने अब भी घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने की चुनौती बनी हुई है.
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