Strait of Hormuz तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा सप्लाई सुरक्षित, ऑस्ट्रेलिया-कनाडा ने गैस सप्लाई की पेशकश की

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक स्रोत तैयार कर लिए हैं. सरकारी सूत्रों के मुताबिक अब देश किसी एक समुद्री मार्ग पर निर्भर नहीं है. ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने अतिरिक्त गैस सप्लाई की पेशकश भी की है.

India oil import strategy Image Credit: FreePik

India oil import strategy: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने की आशंका के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा भरोसा जताया है. पीटीआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि भारत अब किसी एक समुद्री रास्ते या एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है. देश ने पिछले कुछ वर्षों में तेल और गैस की आपूर्ति के लिए कई वैकल्पिक स्रोत तैयार किए हैं. यही वजह है कि मौजूदा वैश्विक संकट के बावजूद भारत में ऊर्जा आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है.

कई देशों से मिल रही अतिरिक्त गैस की पेशकश

पीटीआई सूत्रों के मुताबिक भारत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया, कनाडा समेत कई देशों ने अतिरिक्त गैस सप्लाई की पेशकश की है. भारत भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए नए स्रोतों की तलाश जारी रखे हुए है. हाल ही में भारत ने अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े नए समझौते भी किए हैं, ताकि लंबी अवधि तक स्थिर सप्लाई सुनिश्चित की जा सके.

हॉर्मुज पर पूरी तरह निर्भर नहीं है भारत

अधिकारियों ने बताया कि भारत के कुल कच्चे तेल आयात का केवल करीब 40 फीसदी हिस्सा ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है. बाकी लगभग 60 फीसदी तेल अन्य मार्गों से भारत पहुंचता है, जो अभी प्रभावित नहीं हुए हैं.

रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका, मध्य एशिया और खाड़ी क्षेत्र के बाहर के कई देशों से भी भारत को तेल मिलता है. इसलिए किसी एक समुद्री रास्ते में रुकावट आने पर भी सप्लाई पूरी तरह प्रभावित नहीं होती.

पिछले दशक में सप्लायर देशों की संख्या बढ़ी

सरकारी सूत्रों के अनुसार पिछले दस वर्षों में भारत ने अपनी ऊर्जा कूटनीति को काफी विस्तार दिया है. पहले भारत लगभग 27 देशों से तेल खरीदता था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 40 देशों तक पहुंच चुकी है.

इस रणनीति की वजह से भारत अब किसी एक क्षेत्र या समुद्री मार्ग पर निर्भर नहीं रहा. यही कारण है कि वैश्विक संकट या महामारी जैसे दौर में भी देश में ऊर्जा की कमी नहीं हुई.

भारत का सिद्धांत- जहां सस्ता और उपलब्ध, वहीं से खरीद

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पीटीआई के हवाले से कहा कि भारत की ऊर्जा खरीद का मुख्य सिद्धांत राष्ट्रीय हित है. देश वहां से तेल खरीदता है जहां सप्लाई उपलब्ध हो, कीमत प्रतिस्पर्धी हो और डिलीवरी संभव हो.

यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ा तनाव! आखिर कितनी रफ्तार से चलते हैं तेल टैंकर, क्यों युद्ध के समय बढ़ जाता है इनपर खतरा

भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने में भी अहम भूमिका निभाता रहा है. अधिकारियों के मुताबिक सरकार के हर फैसले में तीन बातों का ध्यान रखा जाता है, ईंधन की कीमत किफायती हो, आपूर्ति लगातार बनी रहे और व्यवस्था टिकाऊ हो.

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