स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ा तनाव! आखिर कितनी रफ्तार से चलते हैं तेल टैंकर, क्यों युद्ध के समय बढ़ जाता है इनपर खतरा
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजर उस समुद्री रास्ते पर टिक गई है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि लाखों बैरल तेल ढोने वाले ये विशाल टैंकर कितनी रफ्तार से चलते हैं और संकट के समय उनकी यही धीमी गति क्यों बड़ा जोखिम बन जाती है?
पर्शियन गल्फ के मुहाने पर स्थित स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज इन दिनों एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. दुनिया के कई देशों तक पहुंचने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां पैदा हुआ तनाव सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को प्रभावित करता है. इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम पहलू तेल ढोने वाले विशाल जहाजों की रफ्तार भी है, जो संकट के समय जोखिम को और बढ़ा देती है.
तेल टैंकर की औसत रफ्तार कितनी होती है
समुद्र के रास्ते कच्चा तेल ले जाने वाले बड़े क्रूड ऑयल टैंकर आमतौर पर बहुत तेज नहीं चलते. समुद्री परिवहन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश बड़े तेल टैंकरों की औसत गति लगभग 12 से 16 नॉट होती है. सामान्य भाषा में समझें तो यह लगभग 22 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे के बराबर होती है. यह गति सुनने में कम लग सकती है, लेकिन इतने बड़े और भारी जहाजों के लिए यही सुरक्षित और ईंधन के लिहाज से व्यावहारिक मानी जाती है.
तेल टैंकरों का आकार बेहद विशाल होता है. कई सुपर टैंकरों की लंबाई 300 मीटर से भी अधिक होती है और वे लाखों बैरल कच्चा तेल लेकर समुद्र में चलते हैं. इतने भारी जहाज को अचानक तेज गति देना या तुरंत दिशा बदलना आसान नहीं होता. जहाज की गति बढ़ाने में समय लगता है और उसे नियंत्रित करने के लिए भी लंबी दूरी की जरूरत होती है. यही वजह है कि समुद्र में किसी सैन्य तनाव या संभावित हमले की स्थिति में ऐसे जहाज दूसरों के मुकाबले ज्यादा असुरक्षित माने जाते हैं.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का संकरा रास्ता बढ़ाता है जोखिम
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज भौगोलिक रूप से भी बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग है. इसकी कुल चौड़ाई लगभग 33 किलोमीटर है, लेकिन जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निर्धारित नेविगेशन चैनल इससे काफी संकरा होता है. जहाजों को तय लेन में ही आगे बढ़ना पड़ता है और अक्सर उन्हें नियंत्रित गति से ही चलना पड़ता है. ऐसे में यदि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ जाएं तो जहाजों के पास तेजी से रास्ता बदलने या खतरे से दूर निकलने के विकल्प बहुत सीमित हो जाते हैं.
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तनाव के समय क्यों धीमी पड़ जाती है सप्लाई
संकट के दौरान शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सावधानी बरतती हैं. कई बार जहाजों को समुद्र में ही रुकने के निर्देश दिए जाते हैं या उनकी गति कम कर दी जाती है. इससे तेल की सप्लाई में देरी हो सकती है. उदाहरण के तौर पर अगर कोई तेल टैंकर लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रहा हो, तो 100 किलोमीटर का समुद्री रास्ता तय करने में उसे करीब चार घंटे लगते हैं. लेकिन सुरक्षा कारणों से गति कम होने या रास्ता बदलने पर यह समय और बढ़ सकता है.
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