कैबिनेट ने गन्ने का FRP ₹365 प्रति क्विंटल किया तय, एविएशन और MSMEs के लिए 18100 करोड़ की क्रेडिट योजना को मंजूरी

सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि कैबिनेट ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 को मंजूरी दे दी है. आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का FRP भी तय कर दिया है.

गन्ना किसानों के लिए बड़ा ऐलान. Image Credit: tv9

केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को एविएशन और MSME सेक्टर के लिए एक इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी स्कीम को मंजूरी दे दी. इसके साथ ही 2026-27 के लिए गन्ने की ज्यादा कीमत और 5,659 करोड़ रुपये के कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन को भी मंजूरी दी गई.

MSME और एविएशन के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम

सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि कैबिनेट ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 को मंजूरी दे दी है. यह स्कीम उन बिजनेस को अतिरिक्त क्रेडिट सहायता देगी जो पश्चिम एशिया के हालात की वजह से लिक्विडिटी की कमी का सामना कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘यह स्कीम नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के जरिए कर्ज देने वाली संस्थाओं को MSME के ​​लिए 100 फीसदी और नॉन-MSME व एयरलाइंस के लिए 90 फीसदी गारंटी कवरेज देगी.’

केंद्र सरकार ने एक बयान में कहा कि योग्य उधारकर्ताओं में MSME, मौजूदा वर्किंग कैपिटल लिमिट वाले नॉन-MSME और 31 मार्च, 2026 तक बकाया क्रेडिट वाले शेड्यूल पैसेंजर एयरलाइंस शामिल हैं, बशर्ते उनके खाते स्टैंडर्ड हों.

इस योजना के तहत, FY26 की चौथी तिमाही में इस्तेमाल किए गए अधिकतम वर्किंग कैपिटल का 20 फीसदी तक अतिरिक्त क्रेडिट दिया जा सकता है, जिसकी ऊपरी सीमा 100 करोड़ रुपये है. एयरलाइंस के लिए, यह सीमा 100 फीसदी तक है, जिसकी ऊपरी सीमा प्रति उधारकर्ता 1,500 करोड़ रुपये है, जो कुछ खास शर्तों के अधीन है.

लोन की अवधि पांच साल

MSMEs और अन्य व्यवसायों के लिए लोन की अवधि पांच वर्ष होगी, जिसमें एक वर्ष की मोहलत शामिल है. जबकि एयरलाइन कर्ज की अवधि सात वर्ष होगी, जिसमें दो वर्ष की मोहलत मिलेगी.

यह योजना 31 मार्च, 2027 तक मंजूर किए गए कर्जों पर लागू होगी. इसका मकसद कारोबारों को ‘पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने’ में मदद करना है, और इससे उनके कामकाज को सहारा मिलने, रोजगार सुरक्षित रहने और सप्लाई चेन बनी रहने की उम्मीद है.

गन्ने का FRP ₹365 प्रति क्विंटल तय

एक अलग बयान के अनुसार, आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय करने को भी मंजूरी दे दी है. यह मूल्य 10.25 प्रतिशत की मूल रिकवरी दर पर आधारित है. किसानों को इस स्तर से ऊपर रिकवरी में होने वाली हर 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के लिए 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलेगा और रिकवरी कम होने पर इसी अनुपात में कटौती की जाएगी.

5 करोड़ गन्ना किसानों को मिलेगा लाभ

सरकार ने फैसला किया है कि जिन मिलों में रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम है, वहां कोई कटौती नहीं की जाएगी. ऐसे किसानों को 338.3 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जाएगा. मंजूर किया गया FRP, 182 रुपये प्रति क्विंटल की अनुमानित उत्पादन लागत से लगभग 100.5 फीसदी अधिक है, और मौजूदा 2025–26 सीजन से 2.81 प्रतिशत अधिक है. इस फैसले से लगभग 5 करोड़ गन्ना किसानों और चीनी मिलों तथा संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाले लगभग 5 लाख श्रमिकों को लाभ होने की उम्मीद है.

कपास क्षेत्र के लिए ₹5,659 करोड़ का मिशन

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कैबिनेट ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए ‘कपास उत्पादकता मिशन’ (Mission for Cotton Productivity) के लिए 5,659.22 करोड़ रुपये के आउटले को भी मंजूरी दे दी है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य कपास क्षेत्र में उत्पादकता और गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना है और यह सरकार के ‘5F विजन’ के अनुरूप है, जो खेत से लेकर वैश्विक बाजारों तक पूरी वैल्यू चेन को कवर करता है.

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