कम नहीं हो रही हैं अनिल अंबानी की मुश्किलें, CBI ने दर्ज की नई FIR; LIC को 3750 करोड़ का नुकसान पहुंचाने का मामला
CBI ने यह शिकायत तब दर्ज की जब SBI ने दावा किया कि RCom और अनिल अंबानी द्वारा कथित तौर पर पैसों के गलत इस्तेमाल के कारण उसे 2,929 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने Reliance Group के चेयरमैन और उनकी संपत्तियों की चल रही जांच में हो रही देरी पर चिंता जताई थी.
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने बुधवार को उद्योगपति अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को कथित तौर पर 3,750 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के लिए एक नया केस दर्ज किया. PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, CBI ने LIC की शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत साजिश, धोखाधड़ी और गबन के कथित अपराधों के लिए एक मामला दर्ज किया है. यह कंपनी और अनिल अंबानी के खिलाफ चौथा मामला है.
यह घटना अनिल अंबानी के दिल्ली में CBI के सामने पूछताछ के लिए पेश होने के कुछ दिनों बाद हुई है.
क्या आरोप हैं?
रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि 2009 से 2012 के बीच, रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसके मैनेजमेंट द्वारा कंपनी की वित्तीय स्थिति, और NCDs खरीदते समय LIC को दी गई सुरक्षा और एसेट कवर के बारे में झूठे दावे करके, LIC को धोखे से 4500 करोड़ रुपये के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) खरीदने के लिए उकसाया गया.
इसके चलते भारतीय जीवन बीमा निगम को 3,750 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ और उसने कंपनी के खिलाफ फोरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया.
अनिल अंबानी के खिलाफ पिछली FIR
इससे पहले 8 मार्च को CBI ने उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ 1,085 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में केस दर्ज किया था. यह केस पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, और इसमें उनकी कंपनी, रिलायंस कम्युनिकेशंस और इसकी पूर्व डायरेक्टर, मंजरी अशोक काकर का नाम भी शामिल है.
इस कथित नुकसान में PNB को 621.39 करोड़ रुपये और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को 463.80 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने Reliance Group के चेयरमैन और उनकी संपत्तियों की चल रही जांच में हो रही देरी पर चिंता जताई थी.
कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई करते हुए, SC ने CBI और ED द्वारा दिखाई गई हिचकिचाहट को ‘अस्वीकार्य’ बताया.
शीर्ष अदालत ने पहले भी यह टिप्पणी की थी कि ED और CBI अपनी जांच में सुस्त रही हैं और कहा था कि अब वह उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद करती है. अदालत ने एजेंसियों को यह भी निर्देश दिया था कि वे इस मामले में अपनी जांच की प्रगति के बारे में समय-समय पर उसे सूचित करें.
ED ने पिछले साल इस मामले में अपनी जांच शुरू की थी, जिसके बाद CBI ने एक FIR दर्ज की थी, जिसमें अनिल अंबानी, RCom और अन्य लोगों पर धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे.
जांच का मुख्य केंद्र RCom और उसकी सहयोगी कंपनियां हैं, जिन्होंने 2010 और 2012 के बीच भारतीय और विदेशी बैंकों से कुल 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लिया था. इनमें से पांच खातों को कर्ज देने वाले बैंकों द्वारा अब धोखाधड़ी वाला घोषित कर दिया गया है.
