चीन ने भारतीय बिजनेस पर कसा शिकंजा, Business Visa में सख्ती से कंपनियों के सामने आई चुनौती

चीन ने भारतीय कारोबारियों के लिए Business Visa जारी करने की प्रक्रिया सख्त कर दी है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब केवल 20% से 40% Business Visa आवेदन ही मंजूर हो रहे हैं. इसका असर सप्लाई चेन, प्रोजेक्ट्स और तकनीकी सहयोग पर पड़ सकता है.

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Highlights

  • चीन ने भारतीय कारोबारियों के लिए Business Visa नियम सख्त कर दिए हैं.
  • अब केवल 20% से 40% Business Visa आवेदनों को ही मिल रही मंजूरी.
  • वीजा में सख्ती से मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और प्रोजेक्ट्स पर बढ़ा असर.

China Business Visa: भारत और चीन के बीच कारोबारी रिश्तों को लेकर एक नई चुनौती सामने आई है. चीन ने भारतीय कारोबारियों के लिए Business Visa जारी करने की प्रक्रिया को पहले के मुकाबले काफी सख्त कर दिया है. इसका असर खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की उन भारतीय कंपनियों पर पड़ रहा है, जिनका कारोबार चीन से आयात होने वाले कंपोनेंट्स, मशीनरी और तकनीकी सहयोग पर निर्भर है.

20 से 40 फीसदी ही मिल रही मंजूरी

ET ने उद्योग जगत से जुड़े अधिकारियों के हवाले से बताया है कि पिछले कुछ महीनों में भारतीय कंपनियों के Business Visa आवेदनों की मंजूरी दर में तेज गिरावट आई है. जहां पहले लगभग सभी योग्य आवेदनों को मंजूरी मिल जाती थी, वहीं अब कई कंपनियों के केवल 20% से 40% आवेदन ही स्वीकृत हो रहे हैं. इससे कंपनियों के अधिकारियों की चीन यात्रा प्रभावित हो रही है और कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हो रही है.

मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस पर पड़ रहा असर

भारतीय उद्योग जगत का कहना है कि चीन से Business Visa मिलना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है. वीजा प्रक्रिया लंबी हो गई है और यदि किसी आवेदन को अस्वीकार कर दिया जाता है, तो पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ती है. इसके बावजूद मंजूरी मिलने की संभावना पहले की तुलना में काफी कम हो गई है.

इसका सबसे अधिक असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है, जिन्हें नई मशीनों की स्थापना, सप्लायर मीटिंग, क्वालिटी इंस्पेक्शन, तकनीकी प्रशिक्षण और प्रोडक्शन से जुड़े कार्यों के लिए नियमित रूप से चीन जाना पड़ता है. वीजा में देरी के कारण कई प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं.

चीन पर काफी हद तक निर्भर है भारत

भारत आज भी कई उद्योगों के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है. इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सोलर, केमिकल और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स और कैपिटल इक्विपमेंट चीन से आयात किए जाते हैं. उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, अलग-अलग सेक्टरों में 50% तक कंपोनेंट्स और मशीनरी चीन से आती हैं.

ऐसे में भारतीय अधिकारियों की चीन यात्रा पर लगी पाबंदियां सप्लाई चेन और उत्पादन, दोनों को प्रभावित कर सकती हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई कंपनियों ने अनौपचारिक रूप से केंद्र सरकार से इस मुद्दे को चीन के सामने कूटनीतिक स्तर पर उठाने का अनुरोध किया है. सरकार भी पूरे घटनाक्रम से अवगत है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

सोशल मीडिया पर भी बढ़ीं शिकायतें

चीन की यात्रा करने वाले कई भारतीय कारोबारी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर Reddit, पर लगातार अपनी परेशानी साझा कर रहे हैं. उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें दोबारा शुरू होने के बावजूद Business Visa मंजूर होने में काफी दिक्कत आ रही है और अस्वीकृति की घटनाएं पहले की तुलना में बढ़ गई हैं.

गलवान विवाद के बाद बिगड़े थे रिश्ते

भारत और चीन के संबंध वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद काफी तनावपूर्ण हो गए थे. इसके बाद भारत ने चीनी कंपनियों के निवेश पर सख्त नियम लागू किए और Press Note 3 के तहत कई मंत्रालयों की मंजूरी अनिवार्य कर दी. साथ ही, भारत ने चीनी नागरिकों के लिए वीजा नियम भी कड़े कर दिए थे. हालांकि, PLI योजना के तहत भारतीय कंपनियों के साथ काम करने वाले तकनीकी विशेषज्ञों को कुछ मामलों में छूट दी गई थी.

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