अब कोयले से बनेगी गैस; 37500 करोड़ रुपये की स्कीम मंजूर; अगले 4 साल में 100 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए 37500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है. इस योजना का मकसद स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है. सरकार 2030 तक 100 मिलियन टन कोल गैसीफिकेशन क्षमता विकसित करना चाहती है.

कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए 37500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी. Image Credit: money9live

Coal Gasification Scheme: केंद्र सरकार ने कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए 37500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दे दी है. सरकार का मकसद क्लीन एनर्जी प्रोडक्शन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है. इस योजना के तहत देश में कोयले को गैस में बदलने वाली परियोजनाएं लगाई जाएंगी. सरकार का कहना है कि इससे घरेलू संसाधनों का बेहतर यूज होगा और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी. कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की बैठक में इस फैसले को मंजूरी दी गई. सरकार ने 2030 तक 100 मिलियन टन कोल गैसीफिकेशन क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा है.

37500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी

सरकार ने कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट के लिए 37500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस योजना के तहत करीब 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है. इसके जरिए 75 मिलियन टन कोयले के गैसीफिकेशन की परियोजनाएं विकसित की जाएंगी. सरकार का मानना है कि इससे एनर्जी सेक्टर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. साथ ही रोजगार और इंडस्ट्रियल सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा.

क्या होता है कोल गैसीफिकेशन

कोल गैसीफिकेशन एक ऐसी प्रोसेस है जिसमें कोयले को सिंथेटिक गैस यानी सिंगैस में बदला जाता है. इस गैस का यूज वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जाता है. इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है. इस प्रक्रिया से मेथनॉल, खाद, हाइड्रोजन और कई तरह के केमिकल भी बनाए जा सकते हैं.

इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने की तैयारी

सरकार का कहना है कि इस योजना से एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और कोकिंग कोल जैसे प्रोडक्ट के आयात पर निर्भरता कम होगी. भारत अभी तेल और मेथनॉल के आयात पर काफी खर्च करता है. कोल गैसीफिकेशन से घरेलू स्तर पर इन उत्पादों का उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा. इससे विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी. सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान का अहम हिस्सा मान रही है.

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200 साल का कोयला भंडार

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत के पास 401 मिलियन टन से ज्यादा कोयला भंडार मौजूद है. यह भंडार अगले 200 साल तक देश की जरूरतें पूरी कर सकता है. सरकार का मानना है कि घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत की जा सकती है. मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने पर जोर दे रही है.

2030 तक बड़ा लक्ष्य

भारत ने 2030 तक 100 मिलियन टन कोल गैसीफिकेशन क्षमता कैपिसिटी करने का लक्ष्य तय किया है. सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में एनर्जी की मांग तेजी से बढ़ेगी. फिलहाल देश की एनर्जी जरूरतों का 55 फीसदी से ज्यादा हिस्सा कोयले से पूरा होता है. जानकारों का कहना है कि गैसीफिकेशन तकनीक से कोयले का उपयोग ज्यादा स्वच्छ और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा.