GST: सरकार ने रिटेलर्स के लिए जारी की गाइडलाइंस, कहा- बिल पर लिखें कितना सस्ता हुआ सामान

GST: आने वाले हफ्ते न केवल बिक्री रणनीतियों की टेस्टिंग करेंगे, बल्कि यह भी मापेंगे कि चेकआउट काउंटर पर टैक्स सुधारों का प्रमोशन कितनी प्रभावी ढंग से किया जाता है. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उपभोक्ताओं को नई जीएसटी व्यवस्था का लाभ मिले.

GST रेट कट Image Credit: Getty image

GST: सरकार ने एक महत्वपूर्ण नए निर्देश में भारत की प्रमुख रिटेल चेन को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) स्ट्रक्चर में व्यापक बदलाव के बाद छूट का स्पष्ट रूप से विज्ञापन करने को कहा है. भारतीय रिटेलर एसोसिएशन को भेजे एक नोट में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने निर्देश दिया है कि रसीदों और बिलों में ‘GST छूट’ स्पष्ट रूप से नजर आनी चाहिए. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि विजिबलिटी अत्यंत महत्वपूर्ण है और दुकानों से आग्रह किया है कि वे कीमतों में गिरावट के बारे में जानकारी देने के लिए प्रिंट, टेलीविजन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पोस्टर, फ्लायर्स और विज्ञापन का उपयोग करें.

टैक्स सुधारों का प्रमोशन

इसका मतलब है कि भारत के खुदरा विक्रेताओं के लिए, आने वाले हफ्ते न केवल बिक्री रणनीतियों की टेस्टिंग करेंगे, बल्कि यह भी मापेंगे कि चेकआउट काउंटर पर टैक्स सुधारों का प्रमोशन कितनी प्रभावी ढंग से किया जाता है. यह कदम त्योहारी सीजन की शुरुआत के ठीक पहले उठाया गया है, क्योंकि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उपभोक्ताओं को नई जीएसटी व्यवस्था का लाभ मिले. अधिकारियों ने खुदरा विक्रेताओं को त्योहारों के दौरान बिक्री की मात्रा पर नजर रखने और कर कटौती के प्रभाव को दर्शाने के लिए आंकड़े दिखाने की भी सलाह दी है.

400 वस्तुएं होंगी सस्ती

22 सितंबर से नवरात्रि के पहले दिन से लगभग 400 वस्तुओं – जिनमें साबुन, शैम्पू, कार, ट्रैक्टर और एयर कंडीशनर शामिल हैं – की कीमतों में कमी देखने को मिलेगी. यह सुधार टैक्स स्ट्रक्चर को दो स्लैब में आसान बनाता है. आवश्यक और आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के लिए 5 फीसदी और बाकी के लिए 18 फीसदी का स्लैब बनाया गया है. पहले के 12 फीसदी और 28 फीसदी के स्लैब को समाप्त कर दिया जाएगा.

कंज्यूमर सेंटीमेंट में सुधार लाने की कोशिश

बदले हुए टैक्स स्ट्रक्चर के तहत, ज्यादातर रोजमर्रा के खाने-पीने और किराने की चीजों पर सिर्फ 5 फीसदी का टैक्स लगेगा, जबकि ब्रेड, दूध और पनीर जैसी जरूरी चीजों पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा. इन बदलावों का उद्देश्य परिवारों पर कर का बोझ कम करना और साल के सबसे व्यस्त खरीदारी समय में कंज्यूमर सेंटीमेंट में सुधार लाना है.

हालांकि, प्राइस रिलीफ से मांग में वृद्धि होने की उम्मीद है, लेकिन सरकार का विज्ञापन पर जोर देना एक व्यापक इरादे का संकेत देता है कि वो यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उपभोक्ता जीएसटी सुधार के साथ कम बिल को सीधे तौर पर जोड़ दें.

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