नहीं थम रही तेल की कीमतों में लगी आग, $100 के पार बरकरार कच्चा तेल, जानें क्या है बाजार का हाल
पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है. ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार और WTI करीब 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और महंगाई की चिंता बढ़ गई है.
Crude Oil Price Today: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक कच्चे तेल के बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. ताजा आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड लगभग 100.449 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड करीब 95.668 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है. हालांकि दिन के कारोबार में मामूली गिरावट देखी गई, लेकिन महीने और सालाना आधार पर कीमतों में मजबूत बढ़त बनी हुई है.
ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार, बाजार में अस्थिरता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 100.449 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई. दिन के कारोबार में इसमें करीब 0.01% की मामूली गिरावट देखी गई, लेकिन इसके बावजूद कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है, जिससे कीमतें रॉकेट की तरह ऊपर जा रही है.
WTI क्रूड भी 95 डॉलर के ऊपर कायम
अमेरिकी बैंचमार्क WTI क्रूड की कीमत करीब 95.668 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई. दिन के दौरान इसमें 0.07% की हल्की गिरावट रही, लेकिन बाजार अभी भी मजबूत बना हुआ है. यह स्तर दर्शाता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में जोखिम की धारणा अभी खत्म नहीं हुई है.
महीने और सालाना आधार पर बड़ी तेजी
आंकड़ों के अनुसार WTI क्रूड में मासिक आधार पर लगभग 53.28% और सालाना आधार पर करीब 42.21% की तेजी दर्ज की गई है. वहीं ब्रेंट क्रूड में महीने में करीब 46.10% और सालाना आधार पर लगभग 42.18% की बढ़त देखी गई. यह दर्शाता है कि लंबे समय से तेल की कीमतें ऊपर की ओर ट्रेंड में बनी हुई हैं.
भू-राजनीतिक तनाव से सप्लाई पर खतरे की आशंका
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण पश्चिम एशिया में तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें और तेज हो सकती हैं, जिसका असर भारत सहित कई देशों की महंगाई और ऊर्जा लागत पर भी पड़ सकता है.
भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरत का 80 से 85% हिस्सा आयात करता है, के लिए संकट और गहराता जा रहा है. हालांकि अमेरिका ने दुनिया भर के देशों के लिए रूस से तेल खरीदने पर लगे प्रतिबंध को 30 दिनों के लिए रोक दिया है. अब सभी देश समुद्र में फंसे रूस के टैंकर से तेल खरीद सकते हैं. इससे किल्लत दूर होने और तेल की कीमतों में गिरावट की गुंजाइश बनती नजर आ रही है.
