Delhi LPG New Rule: रोजाना 9,000 की जगह सिर्फ 1,800 कमर्शियल सिलेंडर मिलेंगे, जानें किसे मिलेगी प्राथमिकता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई बाधित होने के बीच दिल्ली सरकार ने कमर्शियल LPG की रोजाना आपूर्ति सीमित कर दी है. अब शहर में औसतन 9,000 की जगह करीब 1,800 सिलेंडर ही प्रतिदिन वितरित किए जाएंगे. सरकार ने गैस वितरण के लिए प्राथमिकता प्रणाली लागू की है, जिसमें अस्पताल, स्कूल, रेलवे और एयरपोर्ट को सबसे पहले गैस दी जाएगी.
Delhi LPG New Rule: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई रूट्स पर असर के बीच दिल्ली सरकार ने कमर्शियल LPG की आपूर्ति को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने शनिवार को आदेश जारी कर शहर में कमर्शियल LPG सिलेंडर की रोजाना सप्लाई सीमित करने का निर्णय लिया है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि गैस की कमी की स्थिति में भी अस्पताल, स्कूल और अन्य जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर गैस मिलती रहे.
रोजाना सप्लाई पर लगाई गई सीमा
दिल्ली सरकार के खाद्य, आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग ने शनिवार को आदेश जारी करते हुए कहा कि अब शहर में रोजाना होने वाली औसत बिक्री का केवल करीब 20 प्रतिशत कमर्शियल LPG सिलेंडर ही वितरित किए जाएंगे. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में रोजाना लगभग 9,000 कमर्शियल LPG सिलेंडर (19 किलोग्राम) की बिक्री होती है. नए आदेश के तहत अब करीब 1,800 सिलेंडर हर दिन प्राथमिकता के आधार पर बांटे जाते हैं.
आठ प्राथमिकता श्रेणियों में बांटा गया सिस्टम
जारी ऑर्डर के मुताबिक, नई व्यवस्था के तहत गैस की आपूर्ति को आठ अलग-अलग प्राथमिकता श्रेणियों में बांटा गया है.
सबसे ऊंची प्राथमिकता उन सेवाओं को दी गई है जो आम लोगों के लिए बेहद जरूरी हैं. इसमें शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, रेलवे और एयरपोर्ट शामिल हैं. इन क्षेत्रों को उनकी जरूरत के मुताबिक 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति दी जाएगी.
दूसरी श्रेणी में सरकारी विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान आते हैं, जहां कैंटीन चलती हैं.
दिल्ली में कमर्शियल LPG का सबसे ज्यादा इस्तेमाल रेस्टोरेंट और खाने-पीने के कारोबार में होता है. इसलिए इस सेक्टर को कुल नियंत्रित सप्लाई का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा दिया गया है. इसके अलावा होटल, गेस्ट हाउस, डेयरी, बेकरी और मिठाई की दुकानें भी उस कैटेगरी में शामिल हैं जहां गैस की खपत ज्यादा होती है.
बुकिंग के आधार पर होगी सप्लाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि गैस की आपूर्ति तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के जरिए की जाएगी और यह पूरी तरह बुकिंग के आधार पर होगी.
अगर किसी उपभोक्ता को तुरंत सिलेंडर नहीं मिल पाता है तो वितरण सबसे पहले उन्हें दिया जाएगा जिन्होंने पहले बुकिंग की (First-in-First-out) के आधार पर किया जाएगा.
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क्यों लिया गया यह फैसला
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई रूट्स पर दबाव बना हुआ है. सरकार का कहना है कि यह अस्थायी व्यवस्था है और गैस की उपलब्धता और मांग की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की प्राथमिकता व्यवस्था से जरूरी सेवाओं तक गैस की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी और संभावित संकट के असर को कम किया जा सकेगा.
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