बायबैक पर सरकार का बड़ा ऐलान, कैपिटल गेन पर अब ज्यादा लगेगा टैक्स, 12% सरचार्ज लगाने की तैयारी, निवेशकों को झटका
फाइनेंस बिल 2026 में बायबैक पर ज्यादा सरचार्ज लागू होने का सरकार ने प्रस्ता रखा है. जिसे लोकसभा में पास कर दिया गया है. इससे निवेशकों का टैक्स बोझ बढ़ेगा.इस बदलाव से बायबैक महंगा होगा और कंपनियां डिविडेंड जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकती हैं.
Finance Bill amendments: लोकसभा ने बुधवार को फाइनेंस बिल 2026 को 32 संशोधनों के साथ पास कर दिया, जिसमें बायबैक पर सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. इसके तहत अब बायबैक से होने वाले कैपिटल गेन पर निवेशकों को ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा. जिससे उनकी जेब पर बोझ और बढ़ सकता है. लोक सभा के बाद अब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा.
क्या बदला है नियम?
नए नियम के तहत अब बायबैक से होने वाले कैपिटल गेन पर 12% का सरचार्ज लगेगा. पहले 50 लाख रुपये तक कोई सरचार्ज नहीं था और 50 लाख से 1 करोड़ तक 10% सरचार्ज लागू होता था. इस बदलाव से टैक्स का बोझ बढ़ेगा और बायबैक का रास्ता महंगा हो जाएगा. जानकारों का मानना है कि अब कंपनियां डिविडेंड जैसे विकल्पों की ओर ज्यादा फोकस कर सकती हैं और छोटे निवेशकों की दिलचस्पी बायबैक में कम हो सकती है.
प्रमोटर्स पर भी असर
1 फरवरी को पेश किए गए यूनियन बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रस्ताव रखा था कि सभी प्रकार के शेयरधारकों के लिए बायबैक को कैपिटल गेन के रूप में टैक्स में शामिल किया जाएगा. टैक्स आर्बिट्रेज के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रमोटर्स पर अतिरिक्त बायबैक टैक्स लगाने की बात कही गई थी. इससे कॉरपोरेट प्रमोटर्स के लिए प्रभावी टैक्स करीब 22% और गैर-कॉरपोरेट प्रमोटर्स के लिए करीब 30% तक पहुंच सकता है.
किन पर पड़ेगा ज्यादा प्रभाव?
छोटे और मिड-साइज बायबैक पर इसका ज्यादा असर देखने को मिलेगा. हालांकि बड़े बायबैक, जहां 1 करोड़ से ज्यादा का गेन होता है, वहां सरचार्ज पहले से ज्यादा था, इसलिए कुछ मामलों में 3% तक राहत भी मिल सकती है.
रेट्रोस्पेक्टिव बदलाव भी अहम
फाइनेंस बिल में यह भी साफ किया गया है कि ई-प्रोसेस से दिए गए टैक्स अप्रूवल को सिर्फ तकनीकी खामियों जैसे डिजिटल सिग्नेचर या ऑथेंटिकेशन की कमी के आधार पर अमान्य नहीं माना जाएगा. यह नियम 1 अप्रैल 2021 से ही लागू माना जाएगा.
पुराने मामलों पर भी असर
इस बदलाव से कई पुराने टैक्स विवादों पर असर पड़ सकता है. ऐसे केस, जो तकनीकी कारणों से खारिज हो सकते थे, अब दोबारा एक्टिव हो सकते हैं. सरकार ने यह कदम टैक्स सिस्टम को सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए उठाया है, इससे निवेशकों और कंपनियों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
बिल में ये मुद्दे भी थे अहम
लोकसभा ने बुधवार 25 मार्च को फाइनेंस बिल 2026 को 32 संशोधनों के साथ पास कर दिया. अब यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां मंजूरी मिलने के बाद 2026-27 का बजट पूरी तरह लागू हो जाएगा. इस दौरान बायबैक से होने वाले कैपिटल गेन टैक्स नियम में बदलाव के अलावा सरकार ने बजट 2026-27 में कुल खर्च 53.47 लाख करोड़ रुपये प्रस्तावित किया है, जो चालू वित्त वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत ज्यादा है. साथ ही आने वाले वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये रखा गया है. वहीं FY27 के लिए सरकार ने कुल उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है. जबकि राजकोषीय घाटा GDP का 4.3 प्रतिशत रहने का लक्ष्य रखा गया है, जो मौजूदा वित्त वर्ष के 4.4 प्रतिशत के लक्ष्य से थोड़ा कम है.
