Forex Reserve: विदेशी मुद्रा भंडार 4.38 अरब डॉलर घटा, तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक 22 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.38 अरब डॉलर घटकर 690.72 अरब डॉलर रह गया. इस दौरान FCA में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई, जबकि गोल्ड रिजर्व SDR और IMF रिजर्व में जमा रकम में भी गिरावट आई है.
15 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में फॉरेक्स रिजर्व 1.48 बिलियन बढ़कर 695.10 बिलियन तक पहुंच गया था. वहीं, सितंबर 2024 के अंत में यह अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 704.885 बिलियन पर था. मौजूदा गिरावट से रिजर्व अपने रिकॉर्ड हाई से लगभग 14 बिलियन नीचे है.
FCA में सबसे ज्यादा गिरावट
RBI के डाटा के मुताबिक फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में सबसे ज्यादा गिरावट हुई है. यह कुल रिजर्व का सबसे बड़ा हिस्सा होता है. इसमें 3.65 अरब डॉलर की कमी हुई है. यह घटकर 582.25 अरब डॉलर रह गया है. FCA में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है.
गोल्ड रिजर्व और SDR में बदलाव
Gold Reserves में इस दौरान 66.5 करोड़ डॉलर की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह घटकर 66.58 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इसी अवधि में SDRs भी 4.6 करोड़ डॉलर घटकर 18.73 अरब डॉलर पर आ गया है.
IMF रिजर्व में भी कमजोरी
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की रिजर्व पोजिशन 2.3 करोड़ डॉलर घटकर 4.73 अरब डॉलर हो गई है. यह लगातार दूसरी बार है जब IMF पोजिशन में गिरावट दर्ज की गई है.
RBI का दखल और स्थिरता का प्रयास
RBI समय-समय पर डॉलर की बिक्री और अन्य लिक्विडिटी ऑपरेशंस के जरिये विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है. इसका मकसद रुपये में तेज उतार-चढ़ाव को रोकना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना होता है, न कि किसी खास एक्सचेंज रेट लेवल को टारगेट करना. फिलहाल, भारत का फॉरेक्स रिजर्व 690 अरब डॉलर से ऊपर है, जो दुनिया के चार सबसे बड़े रिजर्व में शामिल है. हालांकि, हाल की गिरावट यह दिखाती है कि ग्लोबल करेंसी फ्लक्चुएशंस और गोल्ड प्राइस मूवमेंट का असर भारतीय रिजर्व पर सीधा पड़ रहा है. RBI का संतुलित दखल आने वाले हफ्तों में रिजर्व और रुपये दोनों की दिशा तय करेगा.
टारगेट के 29.9 फीसदी पर पहुंचा फिस्कल डेफिसिट
केंद्र का फिस्कल डेफिसिट जुलाई के अंत तक पूरे साल के टारगेट की तुलना में 29.9 फीसदी तक पहुंच गया गया है. CAG की तरफ से शुक्रवार को जारी डाटा के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के पहले चार महीनों में यह 17.2 फीसदी रहा था. इससे पहले पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के अंत तक घाटा पूरे वर्ष के लक्ष्य का 17.9 प्रतिशत पर रहा था. वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जुलाई अवधि में रियल फिस्कल डेफिसिट और रेवेन्यू के बीच का अंतर 4,68,416 करोड़ रुपये रहा.