राजेश Exports का गोल्ड साम्राज्य! गैराज से निकला सबसे बड़ा रिफाइनर, 35 साल की मेहनत पर एक चूक पड़ेगी भारी?
कभी भारत के 'Gold King' कहे जाने वाले राजेश मेहता आज अपने करियर के सबसे बड़े संकट का सामना कर रहे हैं. SEBI ने Rajesh Exports और उसके प्रमोटर पर 15.15 लाख करोड़ रुपये की कथित वित्तीय हेराफेरी और रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने के आरोप लगाए हैं.

कल तक जिस शख्स को देश का ‘गोल्ड किंग’ कहा जाता था, आज वह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है. मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 3 जून की शाम राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता पर 15.15 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय हेराफेरी का आरोप लगाते हुए बड़ा बैन लगा दिया. इस खबर के बाद आज यानी 4 जून की सुबह राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 5 फीसदी के लोअर सर्किट के साथ 103.92 रुपये पर आ गिरा.
हालांकि, मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, राजेश मेहता ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि “यह सिर्फ एक अंतरिम आदेश है और इसमें कुछ भी सच नहीं है. हम इसका अध्ययन कर रहे हैं और जल्द ही जवाब तैयार करेंगे.” लेकिन इस बड़े झटके ने बाजार को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर फर्श से अर्श पर पहुंचे राजेश मेहता के इस ‘साम्राज्य’ की शुरुआत कैसे हुई थी और अब वह इस मोड़ पर कैसे आ खड़े हुए.
गैराज से हुई थी शुरुआत
राजेश मेहता के बिजनेस की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है. उन्होंने साल 1989 में अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ मिलकर बहुत छोटे स्तर पर काम शुरू किया था. शुरुआत में वह चेन्नई से आभूषण खरीदते थे और उन्हें गुजरात के राजकोट में जाकर बेचते थे. धीरे-धीरे उन्होंने बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में अपना नेटवर्क फैलाया.
इस बिजनेस का टर्निंग पॉइंट तब आया जब 1989 में राजेश मेहता ने बेंगलुरु में अपने एक छोटे से गैराज से सोने के गहने बनाना शुरू किया. उनकी मेहनत रंग लाई और देखते ही देखते उनके बनाए सोने के उत्पाद ब्रिटेन, दुबई, ओमान, कुवैत, अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकने लगे. मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का रेवेन्यू मौजूदा वक्त में 2,516 करोड़ रुपये है.
फोर्ब्स की लिस्ट में बनाई जगह
राजेश मेहता की कंपनी भारत से सोने के उत्पादों की सबसे बड़ी निर्यातक बन गई. साल 2015 में उन्होंने दुनिया की दिग्गज स्विस गोल्ड रिफाइनर कंपनी ‘वालकाम्बी एसे’ (Valcambi SA) को खरीदकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था. इसके बाद भारत, स्विट्जरलैंड और दुबई तीनों जगहों से उनका बिजनेस चलने लगा.
REL दुनिया की सबसे बड़ी सोने की रिफाइनर है, जिसके पास सलाना 2400 टन से सोने के उत्पाद बनाने की क्षमता वाली मॉडर्न यूनिट है. उनका बिजनेस 60 से अधिक देशों में फैला है.
राजेश मेहता कंपनी के फाउंडर चेयरमैन होने के साथ-साथ इसके फाइनेंस और मार्केटिंग वर्टिकल को खुद संभालते हैं. उनकी इस कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2019 में मशहूर फोर्ब्स मैगजीन ने उनकी नेटवर्थ 1.57 बिलियन डॉलर (आज के हिसाब से करीब 14,915 करोड़ रुपये) आंकी थी.
यह भी पढ़ें: ₹15.15 लाख करोड़ की हेराफेरी, फंसेगा LIC का पैसा? केनरा बैंक की बढ़ी आफत, शेयर बाजार में क्यों मचा हड़कंप?
क्या है मौजूदा संकट?
जिस राजेश मेहता ने एक गैराज से उठकर अरबों का साम्राज्य खड़ा किया, आज वह अपनी ही कंपनी के शेयर बाजार में ट्रेड करने से रोक दिए गए हैं. SEBI का आरोप है कि उनकी कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया, जो कि कुल रेवेन्यू का 99.80% है. साथ ही उन पर जांच में सहयोग न करने का भी आरोप है.
SEBI ने अब कंपनी का नए सिरे से फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया है. कल तक जो निवेशक राजेश मेहता की सूझबूझ के मुरीद थे, आज वे अपनी गाढ़ी कमाई डूबने के डर से शेयर बेचकर भाग रहे हैं. हालांकि राजेश मेहता कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन इस एक झटके ने उनके दशकों पुराने सोने के साम्राज्य की साख पर एक बड़ा दाग लगा दिया है.