अफवाहों ने मचाया हड़कंप! पेट्रोल-डीजल के लिए उमड़ी भीड़, 400 पंप सूखे, सरकार ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं
देश के कुछ हिस्सों में अफवाहों के चलते पेट्रोल-डीजल की पैनिक बायिंग देखने को मिली, जिससे कई पेट्रोल पंप सूख गए. सरकार ने साफ किया है कि ईंधन की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. तेल कंपनियां सप्लाई सामान्य करने में जुटी हुई हैं.

देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल खत्म होने की अफवाहों ने आम जनता के बीच भारी हलचल पैदा कर दी है. सोशल मीडिया पर फैली इन खबरों के बाद पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिससे ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) की स्थिति बन गई है. हालांकि, केंद्र सरकार ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताते हुए स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है.
अफवाहों ने बिगाड़ा खेल, 400 पंप हुए ‘ड्राई’
पेट्रोल-डीजल की किल्लत और कीमतों में भारी बढ़ोतरी की अफवाहों का सबसे ज्यादा असर आंध्र प्रदेश में देखा गया. यहां कई शहरों में रविवार को पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसके चलते करीब 400 पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म हो गया. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि कुछ चुनिंदा इलाकों में डीजल की मांग में अचानक 30 से 33 प्रतिशत का ‘असाधारण’ उछाल देखा गया है, जिसकी वजह से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है.
सरकार की सफाई: स्टॉक है भरपूर
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने भरोसा दिलाया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां (PSUs) स्थिति को संभालने में जुटी हैं. सरकार के अनुसार:
- देश के सभी रिफाइनरी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं.
- कच्चे तेल (Crude Oil) का भंडार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.
- पैनिक बाइंग के बावजूद तेल कंपनियां सप्लाई सामान्य करने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रही हैं.
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के आउटलेट्स पर स्टॉक सुनिश्चित किया जा रहा है.
क्यों मची भगदड़?
दरअसल, पश्चिम बंगाल चुनाव के अंतिम चरण (29 अप्रैल) के बाद तेल की कीमतें बढ़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं, लेकिन भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने लंबे समय से भाव नहीं बढ़ाए हैं. इसी ‘प्राइस हाइक’ के डर ने लोगों को टैंक फुल कराने के लिए मजबूर कर दिया.
वैश्विक तनाव के बीच राहत की कोशिश
मिडल-ईस्ट (मध्य पूर्व) के संकट और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, सरकार का दावा है कि भारत ने अपनी ईंधन आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया है. आम आदमी को महंगाई से बचाने के लिए सरकार ने पहले ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी. साथ ही, घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डीजल और एटीएफ (हवाई ईंधन) के निर्यात पर लेवी भी बढ़ाई गई है.
यह भी पढ़ें: चांदी हुई 3500 रुपये महंगी, सोने की कीमतों में मामूली इजाफा; जानें- 24 कैरेट वाले गोल्ड का आज क्या है भाव
सरकार ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा तेल खरीदकर भंडारण न करें. तेल की आपूर्ति सामान्य है और सरकारी पेट्रोल पंपों पर कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं.