भारत और न्यूजीलैंड ने साइन किया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, एक दशक की बातचीत के बाद हुआ समझौता
यह दोनों देशों के बीच सामान और सर्विस के ट्रेड, इन्वेस्टमेंट फ्लो और लेबर मोबिलिटी के लिए नए रास्ते खोलेगा. इस समझौते को कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल और उनके न्यूजीलैंड के काउंटरपार्ट टॉड मैक्ले की मौजूदगी में औपचारिक रूप दिया गया.
भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को एक लंबे समय से इंतजार किए जा रहे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर साइन किए. यह उस बात का संकेत है जिसे प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने ‘वन इन ए जेनरेशन’ समझौता बताया है. यह दोनों देशों के बीच सामान और सर्विस के ट्रेड, इन्वेस्टमेंट फ्लो और लेबर मोबिलिटी के लिए नए रास्ते खोलेगा. इस समझौते को कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल और उनके न्यूजीलैंड के काउंटरपार्ट टॉड मैक्ले की मौजूदगी में औपचारिक रूप दिया गया.
शामिल हैं 20 चैप्टर
यह समझौता उन बातचीत का नतीजा है जो 2010 में शुरू हुई थी और 2015 में 9 दौर के बाद रुक गई थी. फिर मार्च 2025 में फिर से शुरू होकर पिछले साल दिसंबर में पूरी हुई. इस तरह यह भारत के सबसे तेजी से पूरे हुए FTA (मुक्त व्यापार समझौतों) में से एक बन गया है. इसमें 20 चैप्टर शामिल हैं, जिनमें गुड्स, सर्विसेज, रुल्स ऑफ ओरिजिन, सीमा शुल्क सुविधा, सैनेटरी एंड फाइटोसैनिटरी, व्यापार में तकनीकी बाधाएं, विवाद निपटान और कानूनी प्रावधान शामिल हैं.
ड्यूटी-फ्री पहुंच
असल में FTA व्यापार में आने वाली रुकावटों को कम करता है और दोनों तरफ बाजार तक पहुंच को बढ़ाता है. भारत ने न्यूजीलैंड को किए जाने वाले अपने सभी एक्सपोर्ट के लिए ड्यूटी-फ्री पहुंच हासिल कर ली है, जिसमें कपड़ा, चमड़ा, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग सामान जैसे अधिक लेबर वाले सेक्टर भी शामिल हैं.
यह समझौता सर्विसेज के क्षेत्र में भी फायदे देता है, जो भारत की व्यापार रणनीति का एक अहम हिस्सा है. इसमें IT, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में वादे किए गए हैं. इसके साथ ही, एक नया टेम्पररी रोजगार वीजा रास्ता भी बनाया गया है, जिससे 5,000 तक भारतीय प्रोफेशनल न्यूजीलैंड में तीन साल तक काम कर पाएं.
भारत के लिए खुलेंगे नए मौके
यह भारत के लिए इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में, साथ ही AYUSH (आयुष) जैसे खास क्षेत्रों में भी सेवाओं के एक्सपोर्ट को बढ़ाने के नए मौके खोलता है. AYUSH में योग सिखाने वाले, भारतीय शेफ और संगीत के टीचर जैसे लोग शामिल हैं.
इसके अलावा, इस समझौते से निवेश के प्रवाह में तेजी आने की उम्मीद है. अनुमान है कि अगले 15 साल में न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब डॉलर तक का सीधा विदेशी निवेश (FDI) आएगा.
न्यूजीलैंड को क्या मिलेगा?
न्यूजीलैंड के लिए, यह समझौता भारत को किए जाने वाले उसके 54 फीसदी से ज्यादा एक्सपोर्ट के लिए तुरंत ड्यूटी-फ्री पहुंच देता है. इसमें भेड़ का मांस, ऊन, कोयला और जंगल से मिलने वाले उत्पाद शामिल हैं. समुद्री भोजन, लोहा, स्टील और एल्युमीनियम जैसे कई दूसरे सामानों पर लगने वाले टैरिफ को समय के साथ कम किया जाएगा या पूरी तरह से हटा दिया जाएगा.
संवेदनशील सेक्टरों को सुरक्षित किया गया
व्यापक उदारीकरण के बावजूद, दोनों पक्ष राजनीतिक रूप से संवेदनशील सेक्टरों पर सावधानी से आगे बढ़े हैं. भारत ने सेब, कीवी फल, मानुका शहद और डेयरी जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों को टैरिफ-रेट कोटा, न्यूनतम आयात कीमतों और सुरक्षा उपायों के जरिए सुरक्षित किया है.
भारत सरकार ने घरेलू उत्पादकों, खासकर छोटे किसानों को बचाने के लिए डेयरी, चीनी और कुछ खास धातुओं जैसे सेक्टरों को पूरी तरह से बाहर रखा है.
यह दृष्टिकोण एक संतुलित व्यापार रणनीति को दर्शाता है, जो बाजार तक पहुंच और घरेलू संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाती है. कृषि क्षेत्र में इस साझेदारी के बारे में बात करते हुए गोयल ने कहा, ‘मैं चाहूंगा कि कुछ मानुका शहद भारत आए, लेकिन साथ ही मैं यह भी चाहूंगा कि हमारे कीवी किसानों को भी इस साझेदारी से लाभ मिले.’
इंडो-पैसिफिक व्यापार का हिसाब-किताब
जहां 2024 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.4 अरब डॉलर रहा. वहीं इस समझौते से आर्थिक संबंध और गहरे होने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की व्यापारिक भागीदारी मजबूत होने की उम्मीद है. यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत छोटे, अधिक कीमत वाले बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है और अपनी व्यापारिक साझेदारियों में विविधता लाना चाहता है.
वहीं, न्यूजीलैंड को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक और एक बड़े उपभोक्ता वर्ग तक बेहतर पहुंच मिलती है. इस समझौते से कृषि और ज्यादा कीमत वाले खाद्य उत्पादों सहित विभिन्न क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
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