भारत-न्यूजीलैंड FTA पर 27 अप्रैल को लगेगी मुहर, एक्सपोर्ट के लिए खुलेगा बड़ा बाजार; जानें डेयरी, एग्री के लिए क्या फैसला?

भारत और न्यूजीलैंड के बीच 27 अप्रैल को भारत मंडपम में अहम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं. इस समझौते का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. डील से भारतीय एक्सपोर्ट, फार्मा, मेडिकल डिवाइस, IT और प्रोफेशनल सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है. न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता भी जताई है.

भारत न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट Image Credit: FreePik

India New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती मिलने जा रही है. दोनों देश 27 अप्रैल को एक अहम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं. इस समझौते का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है. यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक, दोनों नजरिया से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. समझौते पर हस्ताक्षर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में भारत मंडपम में होगा. चार महीने पहले 22 दिसंबर को वार्ता पूरी होने के बाद अब दोनों देश इसे औपचारिक रूप देने जा रहे हैं.

व्यापार बढ़ाने पर रहेगा फोकस

इस समझौते का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों के बीच व्यापार को अगले पांच साल में 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच नया बाजार उपलब्ध कराएगा.

भारत को क्या होगा फायदा

FTA के तहत भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी. साथ ही भारतीय दवा कंपनियों और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को तेज रेगुलेटरी मंजूरी का लाभ मिल सकता है. इससे निर्यात बढ़ने की संभावना है. इसके अलावा भारतीय पेशेवरों को न्यूजीलैंड में अस्थायी रोजगार वीजा का रास्ता भी मिलेगा. हर साल 5,000 वीजा कोटा तय किया गया है, जिसमें IT, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा, AYUSH विशेषज्ञ, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षक जैसे पेशे शामिल हैं.

न्यूजीलैंड को क्या मिलेगा

इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड को ऊन, कोयला, लकड़ी, वाइन, कीवीफ्रूट, सेब, एवोकाडो, चेरी, समुद्री प्रोडक्ट और कई अन्य वस्तुओं पर शुल्क राहत मिलेगी. न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता भी जताई है. यह निवेश मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विस, इनोवेशन और रोजगार सृजन में होगा.

किन क्षेत्रों को रखा गया बाहर

भारत ने घरेलू किसानों और MSME सेक्टर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डेयरी, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल, रबर और कुछ कृषि उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है. इसका मतलब इन क्षेत्रों में कोई शुल्क छूट नहीं दी जाएगी.

भारत के लिए क्यों अहम है यह डील

भारत पहले ही UAE, Australia, UK और अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर चुका है. न्यूजीलैंड के साथ यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को और मजबूत करेगा. साथ ही यह भारतीय निर्यातकों, पेशेवरों और निवेशकों के लिए नए अवसर खोल सकता है. यह डील सिर्फ व्यापार समझौता नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक पहुंच बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है.

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