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गोल्ड हॉलमार्किंग हुआ महंगा, 45 से बढ़कर 75 रुपये हुई फीस, क्या आपको भी देने होंगे ज्यादा पैसे

सोने की ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए हॉलमार्किंग फीस में बदलाव हुआ है. BIS ने गोल्ड आर्टिकल की हॉलमार्किंग फीस 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये प्रति आर्टिकल कर दी है. नई फीस 14 सितंबर 2026 से लागू हो गई है. हालांकि ग्राहकों को हर ज्वेलरी पर सीधे 30 रुपये ज्यादा देने जरूरी नहीं हैं.

सोने की कीमतें Image Credit: money9live

Highlights

  • BIS ने गोल्ड हॉलमार्किंग फीस 45 रुपये से बढाकर 75 रुपये प्रति आर्टिकल कर दी है.
  • नई हॉलमार्किंग फीस 14 सितंबर 2026 से लागू हो गई है.
  • ग्राहकों से हर ज्वेलरी पर सीधे 30 रुपये ज्यादा लेना जरूरी नहीं है.

गोल्ड ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर है. ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड यानी BIS ने सोने की ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग फीस बढ़ा दी है. अब ज्वेलर्स को हर गोल्ड आर्टिकल की हॉलमार्किंग के लिए 75 रुपये देने होंगे. पहले यह फीस 45 रुपये थी. नई फीस 14 सितंबर 2026 से लागू हो गई है. हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि ग्राहकों को हर ज्वेलरी पर 30 रुपये ज्यादा देने होंगे. ज्वेलर्स इस अतिरिक्त लागत को खुद वहन कर सकते हैं या इसे ज्वेलरी की कुल कीमत में शामिल कर सकते हैं.

गोल्ड हॉलमार्किंग फीस 45 से बढ़कर 75 रुपये

BIS ने गोल्ड आर्टिकल की हॉलमार्किंग फीस में 30 रुपये की बढ़ोतरी की है. पहले ज्वेलर्स को हर गोल्ड आर्टिकल के लिए 45 रुपये देने होते थे. अब यह फीस 75 रुपये प्रति आर्टिकल हो गई है. यानी फीस में करीब 67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ ही एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम फीस 200 रुपये रखी गई है. यह बदलाव BIS हॉलमार्किंग संशोधन नियम 2026 के तहत किया गया है.

चांदी की हॉलमार्किंग फीस में बदलाव नहीं

सोने के साथ चांदी की हॉलमार्किंग फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सिल्वर आर्टिकल के लिए फीस अभी भी 35 रुपये प्रति आर्टिकल है. एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम फीस 150 रुपये तय है. BIS को मिलने वाली फीस भी नियमों में तय की गई है. गोल्ड के लिए AHC को BIS को 7.50 रुपये प्रति आर्टिकल देने होंगे. सिल्वर के लिए यह फीस 3.50 रुपये प्रति आर्टिकल है.

हर ज्वेलरी पर 30 रुपये ज्यादा देने होंगे

नई फीस बढ़ने का सीधा असर ग्राहकों पर 30 रुपये प्रति ज्वेलरी के रूप में जरूरी नहीं है. 75 रुपये की फीस ज्वेलर्स द्वारा मान्यता प्राप्त परख और हॉलमार्किंग सेंट्र को दी जाती है. नियमों में ग्राहकों से अलग से 75 रुपये लेने की बात नहीं कही गई है. ज्वेलर्स चाहें तो इस अतिरिक्त लागत को खुद उठा सकते हैं. वे इसे ज्वेलरी की कुल कीमत में भी शामिल कर सकते हैं.

ज्वेलरी की कीमत पर कैसे पड़ सकता है असर

सोने की ज्वेलरी की अंतिम कीमत कई चीजों से मिलकर बनती है. इसमें सोने का बाजार भाव, मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स शामिल होते हैं. हॉलमार्किंग फीस भी ज्वेलर की लागत का हिस्सा बन सकती है. इसलिए ग्राहक को सिर्फ हॉलमार्किंग फीस देखकर कीमत का अनुमान नहीं लगाना चाहिए. साथ ही कंसाइनमेंट की न्यूनतम फीस के कारण हर आर्टिकल पर वास्तविक लागत 75 रुपये के बराबर होना जरूरी नहीं है.

न्यूनतम फीस का नियम

BIS के नए नियम में एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम 200 रुपये की फीस रखी गई है. इसका मतलब है कि अगर ज्वेलर सिर्फ एक गोल्ड आर्टिकल हॉलमार्किंग के लिए जमा करता है तो उसे 75 रुपये के बजाय न्यूनतम 200 रुपये देने होंगे. वहीं ज्यादा आर्टिकल एक साथ जमा करने पर प्रति आर्टिकल फीस के आधार पर लागत तय होगी. इसलिए वास्तविक हॉलमार्किंग लागत जमा किए गए आर्टिकल की संख्या पर भी निर्भर करेगी.

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हॉलमार्क देखकर कैसे खरीदें सोने की ज्वेलरी

सोने की ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहक को हॉलमार्क जरूर देखना चाहिए. BIS के अनुसार हॉलमार्क ग्राहक को सोने की शुद्धता की जानकारी देता है. गोल्ड ज्वेलरी पर BIS का स्टैंडर्ड मार्क, प्योरिटी या फाइननेस और छह अंकों वाला HUID नंबर देखना चाहिए. HUID नंबर की मदद से ग्राहक हॉलमार्क की जानकारी की जांच कर सकता है. BIS के अनुसार गोल्ड ज्वेलरी में 14K, 18K, 20K, 22K, 23K और 24KS ग्रेड की हॉलमार्किंग की जा सकती है.