अगले हफ्ते कैसी रहेगी सोने-चांदी की चाल? एक्सपर्ट्स की राय- आ सकता है करेक्शन; इन फैक्टर्स पर टिकी नजर
विश्लेषकों के मुताबिक 16 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व समेत प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों और मिडिल ईस्ट में जारी जियो पॉलिटिकल टेंशन पर रहेगी, जो बुलियन बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.
Gold-Silver Outlook for 16 March Week: वैश्विक आर्थिक संकेतों और जियो पॉलिटिकल घटनाक्रमों के बीच आने वाले सप्ताह यानी 16 मार्च से शुरू हफ्ते में सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव या हल्का करेक्शन देखने को मिल सकता है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर इस समय दो प्रमुख कारकों पर टिकी हुई है- पश्चिम एशिया में जारी तनाव और दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति बैठकों पर. इन घटनाओं के आधार पर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों की दिशा तय हो सकती है, जिसका असर कीमती धातुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा.
क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम बाजार के लिए अहम ट्रिगर साबित हो सकते हैं. अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे सोना और चांदी को सहारा मिल सकता है. वहीं अगर स्थिति में सुधार या तनाव में कमी आती है तो कीमतों में दबाव भी देखने को मिल सकता है. JM Financial Services के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च विभाग के वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के अनुसार, आने वाले सप्ताह में वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है क्योंकि निवेशक मिडिल ईस्ट की स्थिति पर बारीकी से नजर रखेंगे. उन्होंने कहा कि अगर संघर्ष में किसी तरह की बढ़ोतरी या कमी के संकेत मिलते हैं, तो इसका असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ बुलियन मार्केट पर भी पड़ सकता है.
केंद्रीय बैंकों की बैठकों पर भी नजर
जियो पॉलिटिकल घटनाओं के अलावा निवेशकों का ध्यान इस सप्ताह होने वाली दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों पर भी रहेगा. इनमें सबसे अहम बैठक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की है, जिसका नीतिगत फैसला बुधवार, 18 मार्च को आने वाला है. इसके बाद यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ इंग्लैंड गुरुवार को अपनी नीतिगत घोषणाएं करेंगे, जबकि चीन का पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना शुक्रवार को अपनी मौद्रिक नीति पर फैसला सुनाएगा.
बाजार की मौजूदा उम्मीदों के अनुसार इन केंद्रीय बैंकों द्वारा फिलहाल ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव किए जाने की संभावना कम है. हालांकि निवेशक इन बैंकों के फॉरवर्ड गाइडेंस यानी भविष्य की नीतिगत दिशा से जुड़े संकेतों का गहराई से विश्लेषण करेंगे. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों का रुख आगे कैसा रहने वाला है.
पिछले सप्ताह दबाव में रहा बुलियन बाजार
बीते सप्ताह घरेलू बाजार में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में करीब 8,850 रुपये यानी लगभग 3.3 फीसदी की गिरावट आई. वहीं सोने की कीमत में भी करीब 3,168 रुपये यानी लगभग 2 फीसदी की कमजोरी देखी गई. प्रणव मेर के अनुसार, सोने की कीमतें पिछले सप्ताह अपने कंसोलिडेशन रेंज से नीचे आ गईं और सप्ताह के अंत तक करीब 2 फीसदी गिरावट के साथ बंद हुईं. इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती और यह अनुमान रहा कि बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के चलते वैश्विक केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को टाल सकते हैं.
निवेशकों की मुनाफावसूली भी कारण
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले सप्ताह शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले एसेट्स में भी बिकवाली देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद सोने में अपेक्षित तेजी नहीं आई. इसकी एक वजह यह भी रही कि कई निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली की. कुछ मामलों में निवेशकों को मार्जिन कॉल या अन्य जरूरतों के कारण भी अपनी होल्डिंग बेचनी पड़ी, जिससे कीमतों पर दबाव बना. हालांकि इसके बावजूद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण सोने और चांदी को सेफ हेवन एसेट के रूप में कुछ समर्थन मिलता रहा. यही वजह है कि गिरावट के बावजूद कीमतों में बहुत ज्यादा कमजोरी नहीं आई.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट
वैश्विक बाजार में भी पिछले सप्ताह कीमती धातुओं में गिरावट का रुख देखने को मिला. कॉमेक्स (COMEX) पर चांदी की कीमत करीब 3 डॉलर यानी 3.5 फीसदी तक फिसल गई, जबकि सोने की कीमत लगभग 97 डॉलर यानी करीब 2 फीसदी नीचे आ गई. विशेषज्ञों के मुताबिक चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई. इसके पीछे एक ओर जहां मजबूत डॉलर का दबाव रहा, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक धातुओं में आई करेक्शन ने भी चांदी की कीमतों को प्रभावित किया.
लंबी अवधि में निवेश का महत्व
InCred Money के सीईओ विजय कुप्पा का कहना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद सोना और चांदी निवेश पोर्टफोलियो में अहम भूमिका निभाते हैं. उनका मानना है कि इन धातुओं की असली ताकत केवल रिटर्न में नहीं बल्कि इस बात में है कि वे अन्य एसेट क्लास के मुकाबले अलग तरह से व्यवहार करती हैं. उन्होंने बताया कि सोना और चांदी का इक्विटी बाजार के साथ कम को-रिलेशन होता है, जिससे ये पोर्टफोलियो को संतुलित रखने में मदद करते हैं.
इसके अलावा ये मुद्रास्फीति और करेंसी के अवमूल्यन के खिलाफ भी एक तरह का सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं. उनके अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बदलते व्यापार मार्गों का असर कमोडिटी बाजार पर पड़ रहा है. ऐसे में निवेशकों को बाजार का सही समय पकड़ने की कोशिश करने के बजाय दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनानी चाहिए.
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