अमेरिका की नई जांच से बढ़ सकती हैं भारत और चीन की मुश्किलें, सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर पड़ सकता है असर
अमेरिका ने वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी के आरोपों की जांच के लिए सेक्शन 301 के तहत नई जांच शुरू की है. इस जांच में भारत और चीन समेत करीब 60 अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं. थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंसेंटिव के अनुसार चीन के शिनजियांग क्षेत्र को लेकर जांच में खास फोकस हो सकता है.
US Forced Labour Probe: अमेरिका ने ग्लोबल सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी के आरोपों की जांच के लिए एक नया ट्रेड जांच अभियान शुरू किया है. यह जांच करीब 60 देशों को कवर करेगी जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं. इस जांच में चीन पर खास नजर रहने की संभावना है क्योंकि शिनजियांग क्षेत्र में जबरन मजदूरी को लेकर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं. जानकारोंका कहना है कि इस जांच का असर भारत के कुछ निर्यात सेक्टर पर भी पड़ सकता है. खासकर सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और गारमेंट निर्यात को अधिक जांच का सामना करना पड़ सकता है.
सेक्शन 301 के तहत जांच
यह जांच ऑफिस ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने सेक्शन 301 के तहत शुरू की है. 12 मार्च को शुरू हुई इस जांच में यह देखा जाएगा कि क्या अलग -अलग देशों की नीतियां जबरन मजदूरी से बने सामान को रोकने में नाकाम हैं. अगर ऐसा पाया जाता है कि किसी देश की नीतियां अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचा रही हैं तो उस देश के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई की जा सकती है. इसमें टैरिफ या अन्य प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं.
चीन पर ज्यादा ध्यान
जानकारों का मानना है कि इस जांच का सेंटर चीन हो सकता है. शिनजियांग क्षेत्र में उइगर और अन्य मुस्लिम समुदायों के साथ जबरन मजदूरी के आरोप पहले भी लगते रहे हैं. हालांकि चीन इन आरोपों को खारिज करता रहा है और कहता है कि वहां एंप्लॉयमेंट एंड स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं. इसके बावजूद कई ग्लोबल सप्लाई चेन में चीनी उत्पादों को जोखिम वाला माना जाता है.
भारत पर भी पड़ सकता है असर
इस जांच का असर भारत के कुछ निर्यात सेक्टर पर भी पड़ सकता है. भारत से अमेरिका को भेजे जाने वाले सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और गारमेंट उत्पाद अधिक जांच के दायरे में आ सकते हैं. इसका कारण यह है कि इन उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कई कच्चे माल या पार्ट्स चीन से आयात किए जाते हैं. अगर इन सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी से जुड़े इनपुट पाए गए तो निर्यात की जांच बढ़ सकती है.
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर खास असर
भारत के सोलर पैनल निर्यात में कई बार पोलिसिलिकॉन या सोलर सेल जैसे कंपोनेंट चीन से आते हैं. इन पर पहले भी शिनजियांग क्षेत्र से जुड़े होने के आरोप लगे हैं. इसी तरह भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी चीनी पार्ट्स और सब असेंबली पर काफी निर्भर है. अगर इन कंपोनेंट की सप्लाई चेन संदिग्ध पाई जाती है तो अमेरिकी जांच का दायरा बढ़ सकता है.
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जांच के बाद लग सकते है बैन
सेक्शन 301 प्रक्रिया के तहत जांच में पब्लिक कंसल्टेंसी और सबूत जुटाने और सुनवाई जैसे चरण शामिल होते हैं. जांच पूरी होने के बाद अगर अमेरिका को लगता है कि किसी देश की नीतियां अनुचित हैं तो वह आयात पर टैरिफ या अन्य ट्रेड बैन लगा सकता है. इसलिए इस जांच को ग्लोबल ट्रेड के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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