सरकार ने ₹127500 करोड़ के ‘सेमीकॉन 2.0’ का किया ऐलान, चिप इकोसिस्टम के लिए किसे और कितना मिलेगा इंसेंटिव?
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सेमीकंडक्टर दुनिया भर में एक अहम रणनीतिक संसाधन बन गए हैं. AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल की वजह से एडवांस्ड चिप्स और मेमोरी की मांग में जबरदस्त उछाल आया है. 'सेमीकॉन 2.0' स्कीम को केंद्रीय कैबिनेट ने 15 जुलाई, 2026 को मंजूरी दी थी.
Highlights
- स्कीम को केंद्रीय कैबिनेट ने 15 जुलाई, 2026 को मंजूरी दी थी.
- इसमें चिप बनाने से लेकर एक पूरा इकोसिस्टम तैयार करना शामिल है.
- एडवांस्ड चिप्स और मेमोरी की मांग में जबरदस्त उछाल आया है.
सरकार ने सोमवार को ‘सेमीकॉन 2.0’ स्कीम का नोटिफिकेशन जारी कर दिया. इसके साथ ही 1,27,500 करोड़ रुपये की उस योजना पर काम शुरू हो गया है, जिसका मकसद भारत की सेमीकंडक्टर से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को और आगे बढ़ाना है. इसमें चिप बनाने से लेकर एक पूरा इकोसिस्टम तैयार करना शामिल है, जिसमें देश में ही डिजाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) तैयार करना, उपकरण, मटीरियल, एडवांस्ड पैकेजिंग, R&D और टैलेंट डेवलपमेंट जैसी चीजें शामिल हैं.
रणनीतिक संसाधन बन गए हैं सेमीकंडक्टर
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सेमीकंडक्टर दुनिया भर में एक अहम रणनीतिक संसाधन बन गए हैं. AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल की वजह से एडवांस्ड चिप्स और मेमोरी की मांग में जबरदस्त उछाल आया है.
साथ ही, सप्लाई-चेन में कमजोरियों और बदलती जियो-पॉलिटिक्स (भू-राजनीति) को लेकर बढ़ती चिंताओं ने ग्लोबल कंपनियों को सेमीकंडक्टर बनाने की क्षमता बढ़ाने और कुछ खास जगहों पर प्रोडक्शन पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित किया है.
प्रोग्राम की रूपरेखा
‘सेमीकॉन 2.0’ स्कीम को केंद्रीय कैबिनेट ने 15 जुलाई, 2026 को मंजूरी दी थी. सोमवार को जारी नोटिफिकेशन में इस नए प्रोग्राम की रूपरेखा बताई गई है. इसमें बताया गया है कि 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट को कैसे लागू किया जाएगा, इंसेंटिव (प्रोत्साहन) कैसे दिए जाएंगे और अलग-अलग कैटेगरी के लिए क्या योग्यता शर्तें होंगी.
क्या है स्कीम का मकसद?
IT सेक्रेटरी एस. कृष्णन ने एक ब्रीफिंग में कहा, ‘अब ‘सेमीकॉन 2.0′ के जरिए सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने के अगले चरण में आगे बढ़ने का सही समय आ गया है. इस स्कीम का मकसद आत्मनिर्भरता हासिल करना और एक ऐसी इंडस्ट्री बनाना है जो दुनिया भर में मुकाबला कर सके.’
कौन सी कंपनियां उठा सकती हैं इसका लाभ
कमर्शियल सेक्टर के लिए चिप्स की डिजाइनिंग के मामले में स्टार्टअप्स और भारतीय नागरिकों या ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) के मालिकाना हक वाली कंपनियां इसके लिए योग्य होंगी. स्टार्टअप्स के लिए आर्थिक मदद ग्रांट और इक्विटी को-इन्वेस्टमेंट के रूप में मिलेगी, जबकि कंपनियों के लिए यह रॉयल्टी फाइनेंसिंग या इक्विटी को-इन्वेस्टमेंट के रूप में होगी.
साथ ही अधिक फैब्स (सेमीकंडक्टर बनाने वाली यूनिट्स) लगाने के मामले में नई स्कीम सिलिकॉन फैब्स के लिए 40 फीसदी और कंपाउंड, डिस्प्ले (LCD, OLED, माइक्रो LED) व अन्य खास तरह के फैब्स के लिए 35 फीसदी वित्तीय सहायता देगी.
एडवांस्ड और पारंपरिक पैकेजिंग
ATMP/OSAT (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग/आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट) को मजबूत करने के लिए, यह एडवांस्ड और पारंपरिक पैकेजिंग दोनों को सपोर्ट करती है. इसमें एडवांस्ड पैकेजिंग के लिए CAPEX (कैपिटल एक्सपेंडिचर) का 35 फीसदी और पारंपरिक पैकेजिंग के लिए CAPEX का 25 फीसदी इंसेंटिव दिया जाएगा.
12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
इससे पहले प्रोग्राम के पहले चरण में सरकार ने छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी. इनमें से तीन यूनिट्स, माइक्रोन का ATMP प्लांट, केन्स सेमीकॉन और CG सेमी OSAT यूनिट, ने इस साल की शुरुआत में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है.
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