भारत की FTA डिप्लोमेसी, 35 लाख करोड़ डॉलर की GDP तक सीधी पहुंच, 140 करोड़ आबादी का बाजार, मोदी ने बदल दिया ट्रेड का खेल

भारत बदलते वैश्विक व्यापार हालात में FTA को रणनीतिक हथियार बना रहा है. यूरोपीय यूनियन, ASEAN, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया, यूएई और यूके जैसे देशों के साथ समझौतों से भारत को दुनिया की बड़ी आबादी, मजबूत अर्थव्यवस्थाओं और अहम बाजारों तक सीधी पहुंच मिली है, जिससे वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत हुई है.

भारत की एफटीए डिप्लोमेसी Image Credit: Canva

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब अलग-अलग देशों पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे रहे हैं, ऐसे में कई देश अपने व्यापार को सुरक्षित रखने के नए रास्ते तलाश रहे हैं. भारत भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ता दिख रहा है. भारत ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाना शुरू कर दिया है. पहले जहां भारत चुनिंदा देशों तक ही सीमित था, अब वह लगातार अपना दायरा बढ़ा रहा है. मौजूदा दौर में भारत जिन देशों और समूहों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में है, उनकी संख्या 15 से ज्यादा हैं. वे सिर्फ व्यापारिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि दुनिया की आबादी, भू-भाग और आर्थिक ताकत का बड़ा हिस्सा भी कवर करते हैं. आइए जानते हैं कैसे.

भारत–यूरोपीय यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट

27 जनवरी 2026 को यूरोपीय यूनियन के साथ हुआ एफटीए इस रणनीति की सबसे बड़ी मिसाल है. यूरोपीय यूनियन 27 देशों का समूह है, जिसकी कुल आबादी करीब 45 करोड़ है. यह दुनिया की कुल आबादी का लगभग 5.5 फीसदी हिस्सा रखता है. क्षेत्रफल के लिहाज से देखें तो यूरोपीय यूनियन का कुल भू-भाग करीब 42 लाख वर्ग किलोमीटर है, जो दुनिया के कुल भू-भाग का लगभग 3 प्रतिशत बनता है. यानी भारत को एक ऐसे बाजार तक सीधी पहुंच मिली है, जहां आबादी भी बड़ी है और भौगोलिक फैलाव भी मजबूत है. आंकड़ों के मुताबिक, यूरोपीय संघ (EU) की कुल नॉमिनल GDP करीब 22.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के बीच है.

2025-26 के आंकड़ों के अनुसार वैश्विक जीडीपी में यूरोपीय यूनियन का योगदान लगभग 13.3 से 14.7 प्रतिशत के बीच है. EU दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. भारत और EU मिलकर वैश्विक जीडीपी का करीब 25 प्रतिशत और दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा संभालते हैं.

भारत–ASEAN एफटीए: एशिया का सबसे बड़ा कलेक्टिव बाजार

ASEAN यानी एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस में 10 देश शामिल हैं, जिनमें इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया शामिल हैं. 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक ASEAN देशों की कुल आबादी करीब 680 से 686 मिलियन है, जो दुनिया की आबादी का करीब 8.5 फीसदी है. यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े हिस्से को कवर करता है.

ASEAN का कुल जीडीपी वैश्विक जीडीपी का लगभग 6.5 से 7.2 फीसदी है और यह दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. भारत–ASEAN एफटीए साल 2010 से लागू है, जिसके तहत करीब 80 प्रतिशत उत्पादों पर सीमा शुल्क कम या खत्म किया गया है.

भारत–ऑस्ट्रेलिया एफटीए

ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है, हालांकि इसकी आबादी 26 जनवरी 2026 तक लगभग 28.3 मिलियन ही है, जो वैश्विक जनसंख्या का करीब 0.33 फीसदी है. ऑस्ट्रेलिया का भू-भाग विशाल है और यह प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर देश है. इसकी जीडीपी करीब 1.8 ट्रिलियन डॉलर है.

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एफटीए साल 2022 से लागू है, जिसके तहत भारत से ऑस्ट्रेलिया को होने वाले 96 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क हटा दिया गया है.

भारत–जापान एफटीए

जापान की आबादी 2026 तक करीब 12.2 से 12.3 करोड़ है, जो वैश्विक जनसंख्या का करीब 1.5 फीसदी है. जापान की जीडीपी लगभग 4.18 ट्रिलियन डॉलर है और वैश्विक जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी करीब 3 प्रतिशत है. भले ही जापान का भू-भाग सीमित है, लेकिन यह दुनिया की सबसे विकसित औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है.

भारत और जापान के बीच साल 2011 से एफटीए लागू है, जिससे भारत के इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिला है.

भारत–दक्षिण कोरिया एफटीए

दक्षिण कोरिया की आबादी फिलहाल करीब 51.7 मिलियन है, जो दुनिया की आबादी का करीब 0.63 प्रतिशत है. दक्षिण कोरिया की जीडीपी करीब 1.86 ट्रिलियन डॉलर है और वैश्विक जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी लगभग 1.6 से 1.8 प्रतिशत के बीच है. यह एशिया का एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब है. भारत और दक्षिण कोरिया के बीच एफटीए साल 2010 से लागू है.

भारत–यूएई एफटीए

संयुक्त अरब अमीरात की आबादी 2025-26 में लगभग 11.3 से 11.5 मिलियन है, जो वैश्विक जनसंख्या का करीब 0.14 प्रतिशत है. यूएई की जीडीपी लगभग 500 से 540 अरब डॉलर है. भू-भाग भले ही सीमित हो, लेकिन यूएई दुनिया के सबसे बड़े ट्रेड और लॉजिस्टिक्स हब्स में से एक है.

भारत और यूएई के बीच एफटीए साल 2022 से लागू है. इस समझौते के तहत 90 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर सीमा शुल्क को खत्म या कम किया गया है, जिसका लक्ष्य पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है.

भारत–यूके एफटीए

यूनाइटेड किंगडम की आबादी जनवरी 2026 में लगभग 6.99 करोड़ है, जो वैश्विक आबादी का करीब 0.85 प्रतिशत है. ब्रिटेन की जीडीपी करीब 3.6 ट्रिलियन डॉलर है और यह दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. भारत और यूके के बीच एफटीए साल 2025 में हुआ है, जिससे कपड़ा, जूते और रत्न-आभूषण जैसे भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बड़े बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी.

भारत–सिंगापुर और मॉरीशस एफटीए

सिंगापुर की आबादी लगभग 6.1 मिलियन है, जबकि मॉरीशस की आबादी करीब 1.26 मिलियन है. आबादी और भू-भाग दोनों ही सीमित हैं, लेकिन आर्थिक और रणनीतिक नजरिये से दोनों देश भारत के लिए बेहद अहम हैं. सिंगापुर एशिया का बड़ा फाइनेंशियल हब है, जबकि मॉरीशस को अफ्रीका में भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है. इन दोनों देशों के साथ भारत के एफटीए लागू हैं.

आबादी, GDP और ग्लोबल कवरेज

देश / ट्रेड ब्लॉकशामिल देशसमझौते की स्थितिकुल आबादी (लगभग)संयुक्त GDP (USD)दुनिया के ट्रेड में हिस्सेदारीदुनिया के भू-भाग में हिस्सेदारी
ASEAN10 देशFTA लागू~66 करोड़~$3.6 ट्रिलियन~7%~3%
जापानजापानCEPA लागू~12.4 करोड़~$4.2 ट्रिलियन~4%<1%
दक्षिण कोरियासाउथ कोरियाCEPA लागू~5.1 करोड़~$1.7 ट्रिलियन~3%<1%
ऑस्ट्रेलियाऑस्ट्रेलियाECTA लागू~2.6 करोड़~$1.7 ट्रिलियन~1.5%~5%
UAEसंयुक्त अरब अमीरातCEPA लागू~1.1 करोड़~$0.5 ट्रिलियन~1.3%<1%
सिंगापुरसिंगापुरCECA लागू~60 लाख~$0.5 ट्रिलियन~2%नगण्य
श्रीलंकाश्रीलंकाFTA लागू~2.2 करोड़~$0.08 ट्रिलियन<0.1%<0.1%
नेपालनेपालट्रेड ट्रीटी~3 करोड़~$0.04 ट्रिलियननगण्य<0.1%
भूटानभूटानट्रेड एग्रीमेंट~8 लाख~$0.003 ट्रिलियननगण्यनगण्य
मॉरीशसमॉरीशसCECPA लागू~13 लाख~$0.014 ट्रिलियन<0.1%नगण्य
अफगानिस्तानअफगानिस्तानप्रेफरेंशियल ट्रेड~4 करोड़~$0.02 ट्रिलियननगण्य~0.5%
यूरोपीय यूनियन (EU)27 देशFTA बातचीत में~45 करोड़~22.5 ट्रिलियन डॉलर~15%~3%

ऐसे में भारत जिन देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए में है, उनकी कुल आबादी करीब 142 से 143 करोड़ है. यह दुनिया की कुल आबादी का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है. इन देशों की संयुक्त जीडीपी करीब 35 लाख करोड़ डॉलर है, जिससे भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से तक सीधी व्यापारिक पहुंच मिली है.

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