सोमनाथ मंदिर से महमूद गजनवी ने कितना लूटा था सोना, 1000 साल बाद फिर जिंदा हुआ सवाल; आज होती इतनी कीमत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोमनाथ दौरे और ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के बीच एक बार फिर इतिहास के उस अध्याय पर चर्चा तेज हो गई है, जब महमूद गजनवी ने पवित्र सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था. सवाल वही पुराना है- आखिर उस हमले में कितना सोना और खजाना लूटा गया था और आज उसकी कीमत कितनी मानी जाती है?

सोमनाथ मंदिर और सोने की लूट? Image Credit: @AI/Money9live

Somnath Mandir and Mahmood Ghaznavi and Gold: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया सोमनाथ दौरे ने देश को एक बार फिर उस गौरवशाली लेकिन दर्दनाक इतिहास की याद दिला दी, जिसने भारत की आस्था और आत्मसम्मान को सदियों तक झकझोरा है. रविवार, 11 जनवरी को गुजरात के पवित्र सोमनाथ मंदिर में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने करीब 1000 साल पहले इस मंदिर की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि आज सोमनाथ मंदिर पर लहराता ध्वज पूरी दुनिया को भारत की शक्ति और उसकी कर गुजरने की क्षमता का संदेश देता है. प्रधानमंत्री के इस संबोधन के साथ ही इतिहास का एक बड़ा सवाल फिर चर्चा में आ गया- आखिर सोमनाथ मंदिर से महमूद गजनवी कितना खजाना लूटकर ले गया था?

आस्था का केंद्र और आक्रमणों का निशाना

गुजरात के प्रभास पाटन में समुद्र तट के किनारे स्थित सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यह मंदिर प्राचीन काल से ही कपिला, हिरण और सरस्वती नदियों के संगम के कारण एक प्रमुख तीर्थ रहा है. इतिहास में कई बार इस मंदिर पर आक्रमण हुए, लेकिन सबसे चर्चित हमला 1025-26 ईस्वी में महमूद गजनवी ने किया था. इतिहासकारों के अनुसार, उस दौर में सोमनाथ मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद समृद्ध था. तमाम वजहों में से एक वजह यह भी थी जिससे सोमनाथ मंदिर आक्रमणकारियों के निशाने पर रहा करता था.

कितना सोना लूटा गया था?

इतिहास और शोध के अलग-अलग स्रोत बताते हैं कि महमूद गजनवी सोमनाथ मंदिर से करोड़ों-अरबों रुपये के सोने और दूसरी बेशकीमती चीजों को लूटा है. सरकारी आंकड़े की बात करें तो सोमनाथ जिले की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, गजनवी ने करीब 20 मिलियन (2 करोड़) सोने के दीनार लूटकर ले गया था. कुछ विवरणों में यह आंकड़ा और भी ज्यादा, यानी 100 मिलियन दीनार तक बताया गया है. कई इतिहासकारों का अनुमान है कि केवल सोने के रूप में ही करीब 6 टन सोना मंदिर से लूटा गया था. इसमें चांदी, हीरे-जवाहरात और दूसरे कीमती वस्तुएं शामिल नहीं थी.

सिर्फ सोना ही नहीं, अनमोल धरोहर भी लूटी गई

सोमनाथ की लूट केवल सिक्कों तक सीमित नहीं थी. कहा जाता है कि मंदिर के 56 विशाल खंभे, हजारों सोने-चांदी की मूर्तियां, मंदिर की घंटियों से जुड़ी भारी सोने की चेन (जिसका वजन करीब 6,700 किलो बताया जाता है) और चंदन की लकड़ी से बना मुख्य द्वार भी गजनवी अपने साथ ले गया था. इससे इतर, लूट के दौरान गजनवी ने कई मूर्तियों को तोड़ कर उन्हें खंडित भी कर दिया था.

आज के समय में उस खजाने की कीमत कितनी?

अगर आज के भाव से देखें तो सोने की कीमत करीब ₹1,40,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास है. ऐसे में 6,000 किलो सोने की मौजूदा कीमत करीब 84,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है. वहीं, 20 मिलियन सोने के दीनार की आज की क्रय शक्ति के हिसाब से कीमत अरबों डॉलर में आंकी जाती है. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इस लूट का महत्व सिर्फ पैसों से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विनाश से जुड़ा है. वहीं, कई जगहों पर इस बात की चर्चा भी की जाती है कि आक्रमणकारियों ने लूट-पाट केवल पैसों के लिए नहीं की बल्कि लोगों के अंदर खुद का डर पैदा करना भी अहम कारण हुआ करता था.

टूटता रहा, फिर भी खड़ा रहा सोमनाथ

सोमनाथ मंदिर को महमूद गजनवी से पहले और बाद भी कई बार तोड़ा गया- अलाउद्दीन खिलजी, जफर खान जैसे शासकों के हमलों का भी यह गवाह रहा. लेकिन हर बार यह मंदिर फिर से खड़ा हुआ. कई राजाओं ने अपने शासन के दौरान मंदिर का पुर्ननिर्माण भी करवाया. आजादी के बाद तत्कालीन डिप्टी प्राइम मिनिस्टर सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से इसका पुनर्निर्माण हुआ और 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने यहां प्राण-प्रतिष्ठा की.

आक्रमणकारी इतिहास बने, सोमनाथ अमर रहा

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि गजनवी से लेकर औरंगजेब तक कई आक्रांताओं ने सोचा कि तलवार के बल पर उन्होंने सोमनाथ को मिटा दिया, लेकिन समय के साथ वे इतिहास के पन्नों में सिमट गए और सोमनाथ आज भी अडिग खड़ा है. उनके शब्दों में, सोमनाथ सिर्फ पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारत की आस्था, पहचान और सभ्यतागत गौरव का जीवंत प्रतीक है. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व इसी भावना का उत्सव है जो याद दिलाता है कि भारत की आस्था को कभी मिटाया नहीं जा सकता.

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