अमेरिका के दबाव से भारत के हितों पर क्या पड़ेगा असर, जानें भारत अपने फायदे की कैसे करेगा रक्षा
दुनिया की राजनीति सच में लोकतंत्र के लिए है या फिर तेल के लिए, यह सवाल आज सबसे बड़ा बन गया है. अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना कम करे, ताकि रूस पर दबाव बनाया जा सके. लेकिन भारत के लिए मामला भावनाओं का नहीं, ज़रूरत का है. रूस से मिलने वाला तेल सस्ता है, जिससे भारत की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी होती हैं और महंगाई को काबू में रखने में मदद मिलती है. पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद India और China रूस के डिस्काउंटेड तेल के बड़े खरीदार बनकर उभरे हैं. इससे साफ है कि प्रतिबंध कई बार देशों को रोकने के बजाय व्यापार के रास्ते बदल देते हैं. दूसरी तरफ United States अपनी ऊर्जा और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना चाहता है. वहीं Venezuela जैसे तेल उत्पादक देश भी वैश्विक राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत अपनी ऊर्जा नीति खुद तय करेगा या अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकेगा. भारत अब साफ कर चुका है कि उसके फैसले राष्ट्रीय हित और जनता की ज़रूरतों को देखकर ही होंगे.
More Videos
Budget 2026: कैसे होती है केंद्र सरकार की कमाई , जानिए पूरी डिटेल
America- Venezuela Conflict: जून 2026 तक $50/बैरल पर आ सकता है कच्चा तेल, क्या कम होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
Bank Employees Strike: बैंक कर्मचारी हड़ताल पर क्यों, ग्राहकों पर पड़ेगा असर?




