27 जुलाई को IDBI Bank कर्मचारियों की भूख हड़ताल, प्राइवेटाइजेशन का करेंगे विरोध; नौकरी, पेंशन और आरक्षण पर जताई चिंता
IDBI Bank के प्रस्तावित प्राइवेटाइजेशन के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ IDBI ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज ने 27 जुलाई को देशव्यापी एक दिन की भूख हड़ताल का ऐलान किया है. कर्मचारियों का कहना है कि प्राइवेटाइजेशन से नौकरी, पेंशन, आरक्षण व्यवस्था और सामाजिक बैंकिंग पर असर पड़ेगा. संगठन ने केंद्र सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है.
IDBI Bank Privatisation: IDBI Bank के प्रस्तावित प्राइवेटाइजेशन के विरोध में कर्मचारियों का आंदोलन तेज हो गया है. यूनाइटेड फोरम ऑफ IDBI ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज ने 27 जुलाई को देशभर में एक दिन की भूख हड़ताल का ऐलान किया है. संगठन का कहना है कि निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के जरिए बैंक का प्राइवेटाइजेशन अगस्त के आखिरी तक पूरा किया जा सकता है. ऐसे में कर्मचारियों के बीच नौकरी, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.
प्राइवेटाइजेशन का किया विरोध
फोरम के नेताओं का कहना है कि पिछले छह सालों में IDBI Bank ने लगातार मुनाफा कमाया है और वित्तीय व परिचालन प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया है. ऐसे समय में प्राइवेटाइजेशन का फैसला कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है.
आरक्षण और दिव्यांग कर्मचारियों को लेकर चिंता
संगठन ने बैंक में कार्यरत 884 दिव्यांग कर्मचारियों के फ्यूचर पर भी चिंता जताई है. इसके अलावा बैंक में 3070 अनुसूचित जाति (SC), 1,214 अनुसूचित जनजाति (ST), 5,604 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और 805 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के कर्मचारी कार्यरत हैं. कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण के बाद बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के आरक्षण नियमों के दायरे से बाहर हो जाएगा, जिससे सामाजिक न्याय पर असर पड़ सकता है.
पारदर्शिता घटने का दावा
फोरम का कहना है कि निजीकरण के बाद बैंक सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और संसदीय समितियों जैसी निगरानी व्यवस्थाओं के दायरे से बाहर हो जाएगा. इससे पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही प्रभावित हो सकती है.
दो करोड़ से ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं
संगठन के अनुसार, IDBI Bank की देशभर में 2,193 शाखाएं हैं और बैंक दो करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवाएं देता है. बैंक का कुल जमा आधार 3.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें 1.55 लाख करोड़ रुपये कम लागत वाली जमा (Low-cost Deposits) शामिल हैं.
सरकारी योजनाओं में निभा रहा अहम भूमिका
फोरम ने कहा कि बैंक कई सरकारी वित्तीय समावेशन योजनाओं को भी लागू कर रहा है. इनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के 18.72 लाख खाते, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के 10.86 लाख नामांकन, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के 3.81 लाख नामांकन और अटल पेंशन योजना (APY) के 5.48 लाख सब्सक्राइबर शामिल हैं.
इसके अलावा बैंक 191 आधार नामांकन केंद्र और एक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) का संचालन भी करता है. कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण के बाद बैंक का फोकस सामाजिक बैंकिंग की बजाय केवल मुनाफे पर केंद्रित हो सकता है.
30,000 करोड़ रुपये से अधिक की रियल एस्टेट संपत्ति
फोरम के मुताबिक, बैंक के पास देशभर के 21 से अधिक प्रमुख स्थानों पर रियल एस्टेट संपत्तियां हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है.
विदेशी स्वामित्व को लेकर भी जताई चिंता
संगठन का कहना है कि यदि रणनीतिक बिक्री पूरी होती है तो IDBI Bank विदेशी स्वामित्व में जाने वाला पहला सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक बन जाएगा. फोरम ने दावा किया कि यह आत्मनिर्भर भारत की भावना के विपरीत होगा. संगठन ने सभी राजनीतिक दलों, संसद सदस्यों, विपक्ष के नेताओं, ट्रेड यूनियनों, अर्थशास्त्रियों और नागरिकों से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की अपील की है.
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