UPI में होगा 6 साल बाद बड़ा बदलाव! सरकार MDR लागू करने की कर रही तैयारी; जानें किन कारोबारियों पर पड़ेगा असर
देश में UPI पेमेंट सिस्टम से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव हो सकता है. केंद्र सरकार बड़े कारोबारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने पर विचार कर रही है. हालांकि छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं को इससे राहत मिलने की संभावना है.
UPI MDR: देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2020 में UPI (Unified Payments Interface) पर Merchant Discount Rate (MDR) को पूरी तरह खत्म कर दिया गया था. अब करीब 6 साल बाद केंद्र सरकार इस व्यवस्था में बदलाव करने पर विचार कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार बड़े कारोबारियों के लिए चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शन पर दोबारा MDR लागू कर सकती है. हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और इस पर उच्च स्तर पर चर्चा जारी है.
2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर हो सकता है लागू
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ऐसे व्यापारियों पर MDR लगाने पर विचार कर रही है, जिनका सालाना कारोबार 1 करोड़ रुपये से 1.5 करोड़ रुपये या उससे अधिक है. इसके अलावा, यह शुल्क केवल 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर लागू हो सकता है. यानी छोटे दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना नहीं है.
क्या होता है MDR
Merchant Discount Rate (MDR) वह शुल्क है, जो किसी ग्राहक के डिजिटल पेमेंट करने पर व्यापारी बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है. यह शुल्क डिजिटल पेमेंट की प्रोसेसिंग, पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव और फंड सेटलमेंट जैसी सर्विस की लागत को पूरा करने के लिए लिया जाता है.
जनवरी 2020 में सरकार ने UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR को शून्य कर दिया था. इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना और नकद लेनदेन पर निर्भरता कम करना था. इस फैसले के बाद देश में UPI का इस्तेमाल रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया.
6 साल में कई गुना बढ़ा UPI का उपयोग
National Payments Corporation of India (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के जरिए करीब 2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे. वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 242 अरब ट्रांजैक्शन पर पहुंच गई. इसी अवधि में UPI के जरिए होने वाले कुल पेमेंट का मूल्य 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गया. केवल जून 2026 में ही UPI के माध्यम से 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल कीमत 28.92 लाख करोड़ रुपये रहा. ये आंकड़े बताते हैं कि आज UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत पेमेंट प्रणाली बन चुकी है.
सरकार फिर क्यों कर रही है MDR पर विचार?
बैंकों और डिजिटल पेमेंट कंपनियों का लंबे समय से कहना है कि बिना MDR के इतनी बड़ी संख्या में ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करना उनके लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. उन्हें सर्वर, साइबर सुरक्षा, तकनीकी रखरखाव और पेमेंट सेटलमेंट पर लगातार खर्च करना पड़ता है.
हालांकि, सरकार समय-समय पर इस लागत की भरपाई के लिए सब्सिडी देती रही है, लेकिन उद्योग का कहना है कि यह सहायता वास्तविक लागत की तुलना में पर्याप्त नहीं है. इसी कारण बड़े व्यापारियों पर सीमित MDR लगाने का प्रस्ताव सामने आया है.
किन लोगों पर पड़ सकता है असर?
यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो इसका असर केवल चुनिंदा कारोबारियों पर पड़ेगा. प्रस्ताव के मुताबिक-
- जिन व्यापारियों का वार्षिक कारोबार 1 करोड़ रुपये से 1.5 करोड़ रुपये या उससे अधिक है.
- 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन.
- MDR की दर 5 से 7 बेसिस पॉइंट (0.05% से 0.07%) के बीच तय की जा सकती है.
इससे पहले Payments Council of India बड़े व्यापारियों के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.30 फीसदी MDR लगाने की सिफारिश भी कर चुका है.
छोटे व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार, देश में UPI स्वीकार करने वाले करीब 90 फीसदी व्यापारी छोटे कारोबारियों की श्रेणी में आते हैं. सरकार उन्हें इस प्रस्ताव से बाहर रखने पर विचार कर रही है. इसका मतलब है कि किराना दुकान, छोटे रिटेल स्टोर, रेहड़ी-पटरी और छोटे कारोबारियों को फिलहाल किसी अतिरिक्त शुल्क का सामना नहीं करना पड़ सकता है.
वित्त संबंधी संसदीय समिति भी दे चुकी है सुझाव
मार्च 2026 में संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने भी सरकार को सुझाव दिया था कि UPI के लिए ग्रेडेड MDR व्यवस्था पर विचार किया जाए. समिति ने यह भी कहा था कि छोटे शहरों और छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए कैशबैक और सब्सिडी जैसी प्रोत्साहन योजनाएं जारी रहनी चाहिए.
अंतिम फैसला अभी बाकी
फिलहाल सरकार ने इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न मंत्रालयों और संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा. यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह वर्ष 2020 के बाद UPI नीति में सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा. हालांकि, सरकार की कोशिश यही रहेगी कि बड़े कारोबारियों से सीमित शुल्क लेकर डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाया जाए, जबकि छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर इसका अतिरिक्त बोझ न पड़े.
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