RBI Warning: कर्ज बांट कर बुरा फंसे बैंक! क्या कर्ज लेना हो जाएगा महंगा?
भारत के बैंकिंग सिस्टम में Credit-to-Deposit Ratio का रिकॉर्ड 81.75 फीसदी तक पहुंचना एक अहम चेतावनी माना जा रहा है. इसका सीधा मतलब है कि बैंक जितना पैसा जमा के रूप में जुटा रहे हैं, उसके मुकाबले कहीं ज्यादा कर्ज बांट रहे हैं. Reserve Bank of India के ताजा आंकड़े बताते हैं कि क्रेडिट ग्रोथ तेज बनी हुई है, जबकि डिपॉजिट ग्रोथ अपेक्षाकृत धीमी है. यही वजह है कि सिस्टम में लिक्विडिटी पर दबाव बढ़ रहा है.
बैंक खास तौर पर पर्सनल लोन, होम लोन और एमएसएमई सेक्टर में आक्रामक तरीके से कर्ज दे रहे हैं. दूसरी ओर, लोग पहले जैसी तेजी से बैंक डिपॉजिट नहीं कर रहे, क्योंकि बेहतर रिटर्न के लिए म्यूचुअल फंड और दूसरे इन्वेस्टमेंट विकल्पों की ओर रुझान बढ़ा है. इस गैप की वजह से बैंकों को सीडी, बॉन्ड और शॉर्ट-टर्म फंडिंग का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी फंडिंग कॉस्ट बढ़ सकती है.
अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो आने वाले समय में लोन इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने की आशंका है. आम उधारकर्ताओं के लिए इसका मतलब महंगा कर्ज और डिपॉजिटर्स के लिए संभावित रूप से बेहतर फिक्स्ड डिपॉजिट रेट हो सकता है.
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