ट्रंप टैरिफ के बाद भारत ने ढूंढा निर्यात के लिए नया बाजार, चीन-जापान में बढ़ाई खपत, लेदर-टेक्सटाइल सेक्टर अब भी संकट में
अमेरिका द्वारा भारी टैरिफ लगाने के बाद भी भारत के निर्यात ने मजबूती दिखाई. तीन महीनों में ही भारतीय कंपनियों ने नए बाजारों में तेजी से पकड़ बनाई. झींगा (shrimp), जेम्स-ज्वेलरी और ऑटो पार्ट्स जैसे उत्पाद यूरोप, चीन, जापान और यूएई में खूब बिके. चुनौतियों के बीच भारत ने दिखा दिया कि एक बाजार बंद हो तो कई नए खुल सकते हैं.
India-US Export: अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय सामानों पर 50 फीसदी तक भारी टैरिफ थोप दिया. पहले लगा था कि भारत का निर्यात बहुत बुरी तरह गिर जाएगा. लेकिन सिर्फ तीन महीने में ही भारतीय कंपनियों ने कमाल कर दिखाया. झींगा, हीरे-जवाहरात, गाड़ी के पुर्जे और बिजली का सामान अब यूरोप, चीन, जापान, थाईलैंड और दुबई जैसे नए देशों में तेजी से बिक रहा है. कुछ चीजें तो पहले से ज्यादा बिक रही हैं. हालांकि सस्ते कपड़े, जूते और खेल का सामान अभी मुश्किल में हैं. सरकार ने भी पूरा जोर लगा दिया है. यूरोप-रूस के दरवाजे खोल दिए, 45 हजार करोड़ की मदद दी और कहा कि कीमत मत गिराओ. कुल मिलाकर भारत ने साबित कर दिया कि एक दरवाजा बंद हुआ तो दस नए खुल सकते हैं. यही इस पूरी कहानी का सबसे रोचक हिस्सा है.
एक साल में कितना बदला भारत का एक्सपोर्ट मार्केट
| देश | सितंबर 2024 (%) | सितंबर 2025 (%) |
|---|---|---|
| अमेरिका | 35.66% | 21.11% |
| चीन | 15.81% | 20.48% |
| जापान | 5.78% | 6.43% |
| थाईलैंड | 6.13% | 8.42% |
| बेल्जियम | 2.87% | 5.13% |
| कनाडा | 2.84% | 3.28% |
| अन्य | 30.91% | 35.15% |
जेम्स एंड ज्वेलरी इंडस्ट्री का नया बाजार
सितंबर में अमेरिका को जेम्स एंड ज्वेलरी का निर्यात 76 फीसदी तक गिर गया. लेकिन कुल निर्यात सिर्फ 1.5 फीसदी ही कम हुआ. UAE को 79 फीसदी ज्यादा माल भेजा गया. हांगकांग को 11 फीसदी ज्यादा और बेल्जियम को 8 फीसदी ज्यादा निर्यात हुआ. इससे अमेरिका से लगने वाले झटके कम हुए.
इन इंडस्ट्रीज का भी है बोलबाला
ऑटो कंपोनेंट्स का अमेरिका निर्यात सितंबर में 12 फीसदी कम हुआ. लेकिन जर्मनी, यूएई और थाईलैंड की वजह से कुल निर्यात 8 फीसदी बढ़ गया. समुद्री उत्पाद यानी झींगा-मछली का निर्यात सितंबर में 25 फीसदी और अक्टूबर में 11 फीसदी बढ़ा. चीन को 60 फीसदी, जापान को 37 फीसदी, थाईलैंड को 70 फीसदी और यूरोप को भी ज्यादा माल गया. झींगा भारत का सबसे बड़ा समुद्री निर्यात है. पिछले साल यह 4.88 अरब डॉलर का था जो कुल सीफूड का 65 फीसदी से ज्यादा है.
खेल का सामान का 40 फीसदी अमेरिका जाता था. इसलिए अक्टूबर में कुल निर्यात 6 फीसदी कम हो गया. कपास के कपड़े का अमेरिका निर्यात 25 फीसदी गिरा. यूएई, स्पेन, इटली और सऊदी अरब को कुछ ज्यादा भेजा, लेकिन कुल निर्यात फिर भी 6 फीसदी कम रहा. चमड़े के जूते का कुल निर्यात 10 फीसदी गिर गया. इस इडस्ट्री को वियतनाम, बांग्लादेश और चीन से कड़ी टक्कर मिल रही है.
सरकार ने खोले यूरोप और रूस के दरवाजे, दी बड़ी मदद
समुद्री सामान के लिए यूरोप ने 102 नई भारतीय फैक्ट्रियों को मंजूरी दी. पहले 502 थीं, अब 604 हो गईं. अब यूरोप में 20-25 फीसदी ज्यादा निर्यात होने की उम्मीद है. रूस में भी 25 भारतीय फैक्ट्रियां जल्द मंजूरी पा सकती हैं. सरकार ने 45,060 करोड़ रुपये की मदद दी है. इसमें 20,000 करोड़ रुपये बैंक लोन की गारंटी है. कुल 8 अरब डॉलर से ज्यादा का अमेरिका निर्यात प्रभावित हुआ था. इसमें से करीब 2 अरब डॉलर का माल नए देशों में भेजने की कोशिश हो रही है.
सरकार का सख्त आदेश – कीमत ना करें कम
सरकार ने निर्यातकों को कहा है कि नए बाजार में कीमत बहुत कम मत करें. अभी भी कुछ माल अमेरिका जा रहा है क्योंकि वहां पुराना स्टॉक खत्म हो रहा है. लेकिन धीरे-धीरे इंडोनेशिया और इक्वाडोर वहां जगह ले रहे हैं. उनपर टैरिफ सिर्फ 15-19 फीसदी है. लेकिन उन देशों ने कीमत बढ़ा दी है इसलिए भारतीय माल अभी भी कुछ जगह प्रतिस्पर्धी है. यूरोप से FTA पूरा होने पर वहां टैरिफ 12 फीसदी से और कम हो जाएगा. पिछले साल यूरोप को 1.1 अरब डॉलर का सीफूड गया था.